गणतंत्र दिवस विशेष: संविधान के लचीलेपन का हो रहा आपराधिक इस्तेमाल


-राजीव सक्सेना
एक ओर हम देश का गौरवशाली 71वां गणतंत्र दिवस पर्व मनाने जा रहे हैं, दूसरी ओर देशभर में हंगामा है संविधान प्रदत्त व्यवस्था के तहत संसद से अच्छे बहुमत से पारित हुए संशोधित नागरिकता कानून (सीसीए) के खिलाफ। यह कानून आइने की तरह साफ बता रहा है कि इससे कोई भी भारतीय प्रभावित नहीं है, फिर भी भारी बवाल, भारी हिंसा, आगजनी, धरने-प्रदर्शनों में उठ रही देश विरोधी आवाजें……..…इस पर तुर्रा यह कि यह सब संविधान बचाने के लिए हो रहा है। बड़े-बड़े नेता सीएए की ऐसी खामियां, बुराइयां सामने रख देश के बड़े तबके को डरा, उन्हें इसके खिलाफ उकसा अपनी छाती ठोक रहे हैं, खुश हो रहे हैं, जो वास्तव में इसमें हैं ही नहीं। इसके अलावा अभी जिस एनआरसी का ड्राफ्ट तक तैयार नहीं है, उसे लेकर भी ये आपराधिक तरीके से खौफ पैदा करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। उस एनपीए को लेकर भी गलतफहमियां पैदा की जा रही हैं, जिसकी व्यवस्था पूर्व की सरकारों के समय से चली आ रही है, क्रियान्विति हुई है। विरोध के नाम पर जारी धरनों-प्रदर्शनों, हिंसा से देश को अरबों का नुकसान हो चुका है। विश्वभर में भारत की गलत छवि बन रही है वो अलग। यह सबसे अधिक नुकसानदेह है।
सरकार हर स्तर पर विरोधियों को समझाने की कोशिश कर चुकी है, मगर नहीं समझने की मानसिकता से या सब कुछ समझते हुए भी विरोध कर रहे पक्षों के राजनीतिक खेल को समझा जा सकता है। ऐसे लोगों के दिल में अगर देश के संविधान के प्रति जरा भी सम्मान हो, जरा भी देशहित की भावना हो तो, उन्हें तुरंत ये खुराफात बंद करनी चाहिए। इनके लिए सही मायने में गणतंत्र दिवस तभी सार्थक होगा। तभी लगेगा कि ये संविधान के साथ हैं।
(लेखक राजस्थान के प्रथम वेब न्यूज चैनल newschakraindia.com के Editor in Chief हैं। इन्हें 26 साल से भी अधिक पत्रकारिता का अनुभव है। दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका में प्रमुख पदों पर रहे। जागरूक टाइम्स, मुम्बई के संस्थापक सम्पादक रहे)