कोरोना और बीजेपी: 10 मुख्यमंत्रियों में से 8 का दिखा पूरा दमखम

एनसीआई @ सेन्ट्रल डेस्क
देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों और लॉक डाउन के बीच महामारी को नियंत्रित करने की कई राज्यों की प्रतिक्रिया को उनकी सफलता का पैमाना माना जा रहा है। ऐसे समय में जहां कई मुख्यमंत्री अपने को साबित करने की कोशिश में हैं, वहीं कुछ को तो पहले ही अपने कदमों के लिए लगातार तारीफ मिल रही हैं। इसमें भी अगर भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की बात की जाए तो कई ने संकट की इस घड़ी को अपने लिए मौके में बदला है। न सिर्फ खुद को राजनीतिक तौर पर मजबूत करने के लिए, बल्कि विपक्षियों को कमजोर करने में भी। हालांकि, इस बीच कुछ अन्य सीएम राजनीति के गहरे अनुभव के बावजूद कोरोना के समय में नाकाम रहे हैं।


कोरोना के समय में भाजपा के जिन मुख्यमंत्रियों को सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली, उनमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर और त्रिपुरा के सीएम बिप्लब कुमार देब शामिल हैं। दूसरी तरफ काफी अनुभवी और हाई-प्रोफाइल नेता शिवराज सिंह चौहान अभी तक कोरोना को पूरी तरह नियंत्रण में लाने के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। हालांकि यह बात सही है कि इस राज्य में है तबलीगी जमात के कारण हालात बुरे हुए हैं। इसके अलावा भाजपा शासित प्रदेश गुजरात के सीएम विजय रूपाणी राज्य में अब तक न तो महामारी के बढ़ते प्रकोप को रोकने में सफल हुए हैं, न ही प्रवासी मजदूरों की समस्या को सम्भाल पाए हैं। हालांकि, उनका अनुभव भाजपा के कई अन्य मुख्यमंत्रियों से काफी कम है।
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्व शर्मा के साथ कोरोना को रोकने में अच्छी भूमिका निभाई है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व की तरफ से उन्हें सराहा भी जा चुका है। इसके अलावा गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत की भी भाजपा हाईकमान ने बेहतर तरीके से स्थिति सम्भालने के लिए तारीफ की है। इन सभी मुख्यमंत्रियों के तत्काल एक्शन लेने और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ होने से भाजपा शासित राज्यों में कोरोना की स्थिति नियंत्रण के बाहर नहीं गई है।
उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने लॉक डाउन 4.0 के ऐलान के साथ ही राज्य सरकारों को कोरोना की स्थिति नियंत्रित करने के लिए ज्यादा ताकत दी थी। ऐसे में जल्द ही कोरोना को देश से खत्म करने में इन मुख्यमंत्रियों की भूमिका अहम साबित होने वाली है।
कोरोना पर किस सीएम का कैसा एक्शन
देश में कोरोना से पहली मौत कर्नाटक में हुई थी। इससे पहले राज्य में काफी समय तक भाजपा नेताओं के बीच विवाद की खबरें सामने आ रही थीं। हालांकि, संकट की घड़ी में येदियुरप्पा ने अनुभव की बदौलत स्थिति नियंत्रित की। एक स्टेट्समैन के तौर पर भी उन्हें महामारी के बीच अपनी छवि सुधारने का मौका मिला। तब्लीगी जमात मामले के बाद मुस्लिमों को टारगेट करने वालों को कड़ी चेतावनी देने से लेकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में चर्चों के योगदान पर शुक्रिया जताने तक येदियुरप्पा को कई धड़ों से तारीफ मिली है।
दूसरा नाम है यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का, जिन्होंने महामारी के खिलाफ लड़ाई में अफसरशाही के साथ काफी तालमेल से काम किया और सभी को चौंका दिया। योगी निजी तौर पर राज्य में कोरोना के हालात पर नजर रख रहे हैं और रोज ही जिलाधिकारियों और मंत्रियों के साथ बैठक में शामिल हो रहे हैं। प्रवासी मजदूरों की समस्या को सुलझाने में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई है, फिर चाहे वो श्रमिकों को स्पेशल ट्रेन-बस मुहैया कराना हो या उन्हें नौकरियों का आश्वासन देना। फिलहाल स्थिति योगी के नियंत्रण में है।
इसके अलावा कोरोना से निपटने में हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर की तारीफ तो खुद प्रधानमंत्री मोदी कर चुके हैं। ठाकुर ने कोरोना के शुरुआती समय में ही इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वालों की जांच का आदेश दे दिया था। इसके अलावा रेड जोन में आने के बावजूद हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन का उत्पादन कर राज्य को फार्मा हब बनाने में भी सीएम ठाकुर ने अहम भूमिका निभाई, जिससे दूसरे देशों को इस दवा का एक्स्पोर्ट मुमकिन हुआ।
दूसरी तरफ अन्य राज्यों की बात करें तो असम में सर्बानंद सोनोवाल और हिमंत बिस्व शर्मा की जोड़ी ने NRC-CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बावजूद कोरोना को रोकने के लिए कई कदम उठाए। त्रिपुरा में बिप्लब देब की सरकार को उनके बयानों की वजह से काफी गैरजिम्मेदाराना माना जाने लगा था। मगर, उन्होंने भी तेजी से अपनी छवि सुधारी है। पिछले महीने ही राज्य कोरोना मुक्त घोषित हुआ था। लेकिन बीएसएफ की एक यूनिट में संक्रमण के केस आने के बाद यहां भी कोरोना का प्रकोप फिर बढ़ा है।

साभार: जनसत्ता

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