क्या विकास दुबे की गिरफ्तारी में मिलीभगत है? रूबी यादव की बात से तय करें

पुलिस की गिरफ्त में विकास दुबे

एनसीआई @ उज्जैन
उत्तर प्रदेश के 8 पुलिसकर्मियों की हत्या, 5 लाख का इनामी दुर्दांत अपराधी विकास दुबे आज सुबह मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकाल मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया। परिस्थितियां तो यह बता रही हैं कि, वह महाकाल मंदिर में दर्शन करने गया था। वहां पहचान लिए जाने से वह पकड़ा गया, हालांकि इस बीच उसने अपनी गलत पहचान बताने के साथ जोर- जबरदस्ती कर पुलिस की पकड़ से भागने की कोशिश भी की, मगर वह सफल नहीं हो सका। वहीं विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ कुछ शहीद पुलिसकर्मियों के परिजन भी इस गिरफ्तारी पर गम्भीर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक-पुलिस गठजोड़ से विकास दुबे ने यहां आकर आत्मसमर्पण किया है, उसे गिरफ्तारी करार दिया जा रहा है। वहीं, यह लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर वह उत्तर प्रदेश पुलिस के हाथ लगता तो एनकाउंटर में मार डाला जाता। इसलिए उसकी जान बचाने के लिए ही यहां उसका राजनीतिक मिलीभगत से आत्मसमर्पण करवाया। ये लोग अपनी इच्छा जता रहे हैं कि उसका तो एनकाउंटर होना चाहिए था।
महाकाल मंदिर की सुरक्षा अधिकारी रूबी यादव ने विकास दुबे की गिरफ्तारी के घटनाक्रम का पूरा विवरण देने के साथ इस सम्बन्ध में उठ रहे गम्भीर सवालों का भी जवाब दिया-

रूबी यादव

रूबी यादव कहती हैं कि ऐसा नहीं लगता कि विकास दुबे की यहां गिरफ्तारी मिलीभगत का परिणाम है। अगर वास्तव में ऐसा होता तो वह यहां फर्जी आईडी क्यों दिखाता, अपना नाम गलत क्यों बताता, फिर दबोचे जाने पर वह पुलिसकर्मियों से हाथापाई कर भागने की कोशिश क्यों करता, गाली-गलौच क्यों करता?
रूबी विकास दुबे की गिरफ्तारी के घटनाक्रम का वर्णन इस प्रकार करती हैं-
उनके अनुसार सुबह सात-सवा सात बजे के करीब उनकी टीम मंदिर के रूटीन राउंड पर थी। इसी बीच एक फूल वाले ने उसे विकास दुबे जैसा संदिग्ध व्यक्ति दिखने की जानकारी दी।‌ टीम के गार्डों ने यह बात उन्हें फोन करके बताई। रूबी का कहना है कि इस पर उन्होंने गार्ड से उस व्यक्ति का फोटो खींचकर उन्हें भेजने को कहा। गार्ड ने वह फोटो दूर से खींचा था, इसलिए स्पष्ट नहीं आया। इस पर उन्होंने उस व्यक्ति को मंदिर के अंदर केम्पस में पहुंचने देने के बाद फोटो खींच कर डालने को कहा। इसी बीच जांच के लिए सुरक्षाकर्मियों ने उसकी आईडी मांगी और उसका नाम पूछा।‌ यहां उसने जो आईडी दिखाई वह नवीन पाल के नाम से थी, वहीं उसने खुद का नाम शुभम बताया।‌ सुरक्षाकर्मी ने इस पर जवाब मांगा तो विकास उससे उलझ पड़ा। इस पर रणनीति के तहत पहले उसे दर्शन करने के लिए अंदर जाने दिया गया। इसी बीच उसके पीछे दो सुरक्षाकर्मी लग चुके थे, जो उसकी प्रत्येक हरकत पर निगाह रख रहे थे। रूबी यादव को विकास का पास से खींचा हुआ दूसरा फोटो भी मिल चुका था। उनका कहना है कि उन्होंने गूगल पर मौजूद व वांटेड के रूप में जारी उसके फोटुओं से उस फोटो का मिलान किया। रूबी ने बताया कि उन फोटुओं में विकास के सिर के एक तरफ चोट का निशान नजर आ रहा था, वैसा ही निशान विकास के दूसरे फोटो में भी नजर आया। इसके बाद उन्होंने एसएसपी को फोन कर जानकारी दी और दावा किया कि यह व्यक्ति विकास दुबे ही है। इस पर एसएसपी भी मंदिर के लिए रवाना हो गए।‌ वहीं, विकास दुबे दर्शन करके जाने लगा तो सुरक्षाकर्मियों ने उसकी पहचान के बाबत सवाल उठाए। इस पर वह निर्गम दरवाजे से बाहर जाने के लिए भागने लगा, मगर पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। तब वह हाथापाई पर उतारू हो गया, गाली-गलौज भी की। मगर उसकी भागने की कोशिश कामयाब नहीं हो सकी। तब वह चीखने लगा कि, हां मैं ही विकास दुबे हूं, कानपुर वाला विकास दुबे हूं।‌ इस बीच एसपी के अलावा जिला कलक्टर भी मौके पर पहुंच गए थे। पुलिसकर्मियों ने जब उसे ले जाने के लिए जीप में बैठाने का प्रयास किया, तब भी वह चिल्ला रहा था कि, हां मैं ही विकास दुबे हूं कानपुर वाला।

अब सवाल 5 लाख रुपए किसे मिलेंगे?

माना जा रहा है कि अगर विकास दुबे उत्तर प्रदेश पुलिस के हत्थे चढ़ता तो उसका एनकाउंटर तय‌ था। खैर, उसकी गिरफ्तारी मध्य प्रदेश पुलिस के हाथों हुई। मगर अब सवाल यह पैदा हो रहा है कि उसकी गिरफ्तारी का इनाम किसे मिलना चाहिए? ‌उस फूल वाले को जिसने सबसे पहले उसके बारे में सूचना दी या उस मध्य प्रदेश पुलिस को जिसने उसे गिरफ्तार किया या उस उत्तर प्रदेश पुलिस को जिसके खौफ से डरकर वह उज्जैन पहुंचा?

कौन है बिट्टू भैया?

गिरफ्तारी के वक्त विकास दुबे अपनी पहचान बताने के साथ बिट्टू भैया भी पुकार रहा था। उज्जैन पुलिस के सामने अब यह सवाल भी है कि यह बिट्टू भैया कौन है? उसकी गिरफ्तारी भी उसके लिए चुनौती है।

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