सचिन पायलट, विश्वेंद्र सिंह व रमेश मीणा मंत्रिपरिषद से बर्खास्त, सचिन अब पीसीसी चीफ भी नहीं

एनसीआई @ जयपुर
राजस्थान कांग्रेस में जारी सत्ता संघर्ष के बीच आज मंगलवार को आखिरकार सचिन पायलट सहित उनके समर्थक दोनों मंत्रियों पर भी पार्टी की गाज गिर गई। सचिन पायलट को मंत्री परिषद से निष्कासित करने के साथ उन्हें पीसीसी चीफ पद से भी हटा दिया गया है। इसी के साथ उनके समर्थक मंत्री विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी पद से हटा दिया गया। अब नया पीसीसी चीफ शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को बना दिया गया है। एक अन्य नियुक्ति के तहत गणेश घोघरा को यूथ कांग्रेस का नया अध्यक्ष घोषित किया। राकेश पारीक की जगह हेम सिंह शेखावत को सेवादल अध्यक्ष बना दिया।
आज हुई विधायक दल की दूसरी बैठक में बगावतियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए गए प्रस्ताव के बाद कांग्रेस ने अपना यह फैसला सुनाया। बाद में इस फैसले की जानकारी देने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजभवन गए। वहां राज्यपाल को इसकी कॉपी दी।
अशोक गहलोत ने यह कहा-
पार्टी के फैसले की जानकारी देते हुए मीडिया से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बोले,भाजपा के इशारों पर कुछ हमारे साथी ही खेल खेल रहे हैं। अगर कोई नाराजगी थी तो दो बार विधायक दल की बैठक बुलाई, उसमें आ कर अपनी बात रखनी चाहिए थी। देश में ऐसा पहली बार हो रहा है जब करोड़ों में विधायक खरीदे जा रहे हैं। 6 महीने से बीजेपी लगातार षड्यंत्र कर रही थी, उसका परिणाम सामने है। गहलोत ने कहा कि मजबूरन आलाकमान को उन्हें बर्खास्त करने का निर्णय लेना पड़ा। हम इससे खुश नहीं हैं, बड़े दुख की बात है। हमको मजबूर होकर निर्णय लेना पड़ा। हमने एक बार ही नहीं दो-दो बार विधायक दल की बैठक बुलाई। आज विशेषकर विधायक दल की बैठक उनके लिए बुलाई गई थी, लेकिन वह नहीं आए। गहलोत आगे बोले, हमें जानकारी मिली थी कि 8 से 10 विधायक आने के लिए तैयार थे, लेकिन उनको नहीं आने दिया। यह कोई मेरी शिकायत पर निर्णय नहीं हुआ है। पार्टी आलाकमान ने फैसला लिया है।फ्लोर टेस्ट की मांग करना यह साफ दर्शाता है कि वह बीजेपी के इशारों पर चल रहे हैं। पार्टी फोरम में इस तरह की डिमांड नहीं होती है। नाराजगी होती है तो पार्टी में बैठ कर चर्चा की जाती है। अगर उन्हें मुख्यमंत्री से ऐतराज था तो वह अपनी बात विधायक दल की बैठक में आकर बोलते।

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