चुप्पी पर उठे गम्भीर सवाल, तब सामने आईं वसुंधरा राजे, मगर सवाल अब भी कायम

एनसीआई @ जयपुर

राजस्थान में जारी भारी सियासी संकट के बीच राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता वसुंधरा राजे ने शनिवार को जाकर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य के लोग इस कलह की कीमत चुका रहे हैं।’ कांग्रेस द्वारा बीजेपी नेताओं पर विधायकों की खरीद फरोख्त के लगाए जा रहे आरोपों पर वसुंधरा राजे ने कहा कि कांग्रेस अपने घर की लड़ाई में बीजेपी और बीजेपी नेतृत्व पर दोष लगाने की कोशिश कर रही है।
वसुंधरा राजे ने ट्वीट करते हुए कहा कि, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के आंतरिक कलह का नुकसान आज राजस्थान की जनता हो उठाना पड़ रहा है। ऐसे समय में जब हमारे प्रदेश में कोरोना से 500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और करीब 28 हजार लोग कोरोना पॉजिटिव हैं। वसुंधरा राजे ने अपने ट्वीट में आगे कहा है कि, ऐसे समय में जब टिड्डी हमारे किसानों के खेतों पर लगातार हमले कर रही हैं, ऐसे समय में जब हमारी महिलाओं के खिलाफ अपराध ने सीमाएं लांघ दी हैं। ऐसे समय में जब प्रदेशभर में बिजली समस्या चरम पर है और ये तो केवल मैं कुछ ही समस्याएं बता रही हूं। ऐसे समय में कांग्रेस, बीजेपी और बीजेपी नेतृत्व पर दोष लगाने का प्रयास कर रही है। वसुंधरा ने आगे कहा कि सरकार के लिए सिर्फ और सिर्फ जनता हित सर्वोपरि होना चाहिए, कभी तो जनता के बारे में सोचिए।

चुप्पी तोड़ी, मगर सवाल बाकी हैं

राजस्थान के इस सियासी संकट पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अभी तक की चुप्पी पर गम्भीर सवाल उठ रहे थे। हालांकि उन्होंने अब अपनी प्रतिक्रिया दी है, मगर वे सवाल अभी भी कायम हैं। प्रमुख सवाल ये हैं कि, कांग्रेस के बड़े नेता अभी तक मोदी-शाह से लेकर पूरी बीजेपी की बुरी तरह लानत-मलामत करते आ रहे थे, तब वह खामोश क्यों रहीं? इसके अलावा हनुमान बेनीवाल ने उन पर अशोक गहलोत की सरकार बचाने के लिए परिचित कांग्रेस विधायकों को फोन करने का आरोप लगाया, उसकी सच्चाई क्या है?
यह अलग बात है कि बीजेपी की नाराजगी के बाद बेनीवाल ने अपने उस आरोप को स्टाफ की गलती बता दिया, मगर यह बात जनता के गले नहीं उतर रही है। वसुंधरा के बीजेपी की बैठकों में नहीं आने से भी उनकी संगठन से नाराजगी के कयास लगाए जा रहे हैं।

वसुंधरा का एक और ट्वीट

उपरोक्त उठते सवालों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि, राजनीतिक घटनाक्रम पर कुछ लोग बिना किसी तथ्यों के भ्रम फैलाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। मैं पिछले तीन दशक से पार्टी की एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में जनता की सेवा करती आई हूं और पार्टी एवं उसकी विचारधारा के साथ खड़ी हूं।

कैलाश मेघवाल क्यों बोले?

वसुंधरा के सामने आने से पहले विधायक, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने अपनी पार्टी बीजेपी की लाइन से अलग जाकर एक पत्र जारी किया। इसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अपनी ही पार्टी पर राजस्थान की सरकार गिराए जाने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए इसे पूरी तरह गलत बताया है। मेघवाल को वसुंधरा राजे का निकटतम माना जाता है। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पात्रा ने पूछा सवाल-फोन टेपिंग हो रही है क्या?

इससे पहले दिल्ली में शनिवार को ऑडियो टेप के मामले में बीजेपी नेता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर कई सवाल दागे। पात्रा ने कहा, राजस्थान सरकार सीना तान कर कह रही है कि ये ऑडियो टेप पूरी तरह सही है। ऐसे में उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या राजस्थान में राजनैतिक पार्टियों के लोगों के ऑडियो टेप किए जा रहे हैं? पात्रा ने ऑडियो टेपिंग पर घेरते हुए उसके स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी ) को फॉलो करने पर भी मुख्यमंत्री गहलोत से सवाल किए।

पवन खेड़ा ने भी पूछे सवाल

संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पलटवार करते हुए पवन खेड़ा ने भी वर्चुअल पीसी के जरिए पत्रकारों को सम्बोधित किया। पवन खेड़ा ने फोन टेपिंग के सवाल पर कहा कि बीजेपी की ओर से गुजरात में फोन टेप करने की बात पहले ही आ चुकी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो बीजेपी को हेबिच्युअल टेपर्स भी करार कर चुके हैं। वहीं राजस्थान के पूर्व कांग्रेस विधायक विश्वेन्द्र सिंह खुद बीजेपी पर फोन टेप का आरोप लगा चुके हैं। ऐसे में बीजेपी को पहले इन सवालों के जवाब देने चाहिए।

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