पेंशन दो, वरना निकाय चुनावों का राज्य भर में करेंगे बहिष्कार

सीपीएफ विद्युत कर्मचारी कल्याण समिति की गहलोत सरकार को चेतावनी
एनसीआई@कोटा
सीपीएफ विद्युत कर्मचारी कल्याण समिति ने अशोक गहलोत सरकार से वंचित कर्मचारियों को पेंशन दिए जाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो आगामी निकाय चुनावों का परेशान कर्मचारी पूरे राजस्थान में बहिष्कार करेंगे।


संगठन के अध्यक्ष रमेश चंद मीणा व महामंत्री अशोक कुमार जैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि तत्कालीन विद्युत मंडल ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से पेंशन योजना 1988, गैजेट नोटिफिकेशन, सरकार की स्वीकृति और सीपीएफ कमिश्नर से छूट प्राप्त जैसी औपचारिकताओं के बिना ही लागू कर 5000 कर्मचारियों के लिए टेरिफ के माध्यम से पेंशन फंड बना दिया। योजना के विकल्प पत्र भरने का समय सीमा पहली बार सेवानिवृत्ति से 6 माह पूर्व, दूसरी बार 8 माह पूर्व और तीसरी बार 19 फरवरी 2000 तक तय की। इसके बावजूद कर्मचारियों से अचानक 30 जून 1997 को ही पेंशन विकल्प लेना बंद कर दिए गए। जब कि सीपीएफ कमिश्नर से 30 सितम्बर तक छूट प्राप्त थी। इस कारण 4000 कर्मचारी विकल्प भरने से वंचित रह गए।
वहीं, समिति के मुख्य सलाहकार इकबाल हुसैन पठान ने बताया कि 4000 वंचितों को पेंशन देने के लिए चरण गुप्ता से 5 लाख रुपए फीस देकर प्रक्रिया शुरू कराई गई, जिसके अनुसार 478.36 करोड़ रुपए का 20 वर्षों के लिए वित्तीय भार बताया गया, परंतु खेत का विषय है कि आरवीपीएन के वित्त निदेशक पत्र 3811/ 13- 01-20 के माध्यम से 5000 करोड़ का वित्तीय भार बताकर विभाग और सरकार को गुमराह कर रहे हैं, यह तथ्यात्मक नहीं है। मुख्य बात यह है कि 5 कम्पनियों में से 4 कम्पनियों (जयपुर, जोधपुर व अजमेर वितरण निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर और उत्पादन निगम के सीएमडी) ने कर्मचारियों को पेंशन देने की लिखित सिफारिश की है। लिहाजा नियमानुसार को-ऑर्डिनेशन कमेटी में मुद्दे पर विचार होना चाहिए, परंतु इसे को-ऑर्डिनेशन में नहीं रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। पिछले 1 साल के अंदर केन्द्र सरकार ने बीमा कम्पनी, रिजर्व बैंक तथा छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा व दिल्ली सरकारों ने अपने ही कर्मचारियों को पेंशन विकल्प भरने का एक अंतिम मौका देकर पेंशन लाभ दिया है।
इन कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार वंचित कर्मचारियों को निकाय चुनाव से पूर्व पेंशन देने का फैसला नहीं लेती है तो परेशान कर्मचारी पूरे राजस्थान में चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

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