पुजारियों ने रैली निकाल दिया मांग पत्र, आमजन के लिए भी ये मांगें जानना जरूरी

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एनसीआई@बून्दी
अखिल राजस्थान पुजारी महासंघ के बैनर तले मंगलवार को शहर में एक बड़ी रैली निकाल कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीधा सम्बोधित करते हुए जिला कलक्टर को मांग पत्र सौंपा गया। इसमें महासंघ ने अपनी समस्या के लिए पूरी तरह से भैरोंसिंह शेखावत सरकार को जिम्मेदार बताते हुए, इससे राहत दिलाने की गहलोत से पुरजोर मांग की। पुजारी महासंघ की मुख्य मांग मंदिर माफी की जमीन पर गृहस्थ किसान पुजारी को खातेदारी अधिकार दिए जाने सहित इससे जुड़ी वो समस्त सुविधाएं भी प्रदान किया जाना है, जो एक आम किसान को अपनी खातेदारी की जमीन से हासिल होती हैं।
जिलेभर के पुजारी दोपहर 12 बजे तक निर्धारित स्थान रेडक्राॅस पर एकत्र हुए। यहां से रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिला कलक्टर को एक प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन दिया। इसमें मुख्यतौर पर कहा गया है कि राजस्थान पुजारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष राजसमंद निवासी एडवोकेट बलवंत वैष्णव के निर्देश पर दिया जा रहा है। 13 दिसम्बर 1991 को भैरोंसिंह शेखावत सरकार की ओर से जारी आदेश को वापस लेकर मंदिर से जुड़ी कषि भूमि पर गृहस्थ किसान पुजारी को अधिकार प्रदान किया जाए। आगे करौली पुजारी हत्याकांड की निंदा करने के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के मांग की गई है। कहा गया है कि राज्य में 12 लाख पुजारी परिवार निवास करते हैं। ये सभी मंदिर व उससे जुड़ी हुई कृषि भूमि की कानून में गलत में गलत व्याख्या करने व गलत नियम बनाने से व्यथित हैं। 12 सितम्बर 2018 को वसुंधरा राजे सरकार ने आदेश पारित कर आंशिक मलहम लगाने का प्रयास किया था।
पुजारी महासंघ का महत्व भी बताया
ज्ञापन के अनुसार, यह साबित हुआ है कि सरकारों के द्वारा पुजारियों को जैसे इस देश का नागरिक ही नहीं माना जाता है। संविधान की मूल भावना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत की पुजारियों के सन्दर्भ में पालना नहीं की जाती है, अपितु अत्याचार पर अत्याचार किए जा रहे हैं। पुजारियों का विशाल, सुदृढ़ व मजबूत संगठन अखिल राजस्थान पुजारी महासंघ केवल राजस्थान तक ही नहीं अपितु जिस भी राज्य में और देश में राजस्थानी पुजारी भाई निवासित हैं, उन सभी तक फैला हुआ है। पुजारी महासंघ जनता के जननायक कहलाने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से विनम्र मांग करता है।
मुख्यमंत्री गहलोत से यह मांगें कीं
1991 से पूर्व की स्थिति बहाल कर मंदिर के साथ जुड़ी कृषि भूमि पर पुजारी को खातेदारी अधिकार प्रदान किए जाएं। साथ फसल खराबे की स्थिति में मुआवजा, प्रधानमंत्री सम्मान निधि में प्राप्त होने वाले 6 हजार रुपए व भूमि अवाप्त किए जाने पर उसका मुआवजा या अवाप्त की गई जमीन के समरूप मूल्यांकन की जमीन उसी गांव में दी जाए। इस खातेदारी की जमीन पर नल व बिजली कनेक्शन मिलें। गांव में पुजारी अल्पसंख्यक जैसी स्थिति में होते हैं, इसलिए कानून में संशोधन कर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था दी जाए। कब्जाई जा चुकी मंदिर माफी की जमीन को मुक्त कराया जाए। इस ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि मंदिर की जमीन पर खातेदारी अधिकार नहीं दिए जाते हैं तो मंदिर जिस दिन से अस्तित्व में आया, तब से लेकर आज तक सैकड़ों वर्षाें के कार्य का निर्धारण कर पुजारियों को मुआवजा दिया जाए। लाॅक डाउन अवधि में मंदिर बंद रहने से पुजारियों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करने के लिए आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए। पुजारियों को सरकार में राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जाए। अंत में इन मांगों पर वार्ता के लिए मुख्यमंत्री से समय दिए जाने की मांग भी की गई है। साथ ही सूचित किया गया है कि मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए समय दिए जाने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर को सभी तहसील मुख्यालयों पर अलग से फिर ज्ञापन दिया जाएगा।
प्रमुख रूप से ये रहे शामिल
इस रैली में राजस्थानी पुजारी महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन बैरागी, जिलाध्यक्ष मुकुट बिहारी बैरागी, शहर अध्यक्ष ओम बैरागी, महामंत्री रमेश बैरागी व डाॅ ओम शर्मा व विधि सलाहकार अमित निम्बार्क सहित घनश्याम वैष्णव, भरत बैरागी, राम कल्याण योगी, मनराज बैरागी, बद्रीलाल शर्मा, शंकर लाल शर्मा, धनराज बैरागी जगदीश बैरागी बड़ा खेड़ा, राजकुमार बैरागी, अजय बैरागी, अंतिम शर्मा, कमलेश गोस्वामी, मूलचंद शर्मा, ओम बैरागी देहित आदि शामिल रहे।

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