जम्मू-कश्मीर : महबूबा के बयान पर भड़के भाजपाई, पीडीपी कार्यालय पर फहराया तिरंगा, लालचौक पर बवाल
एनसीआई@जम्मू-कश्मीर/नई दिल्ली
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के तिरंगे के अपमान के विरोध में सोमवार को भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने पीडीपी कार्यालय पर तिरंगा फहराया और नारेबाजी की। इससे पहले शनिवार को भी कई प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय पर तिरंगा फहरा दिया था। दूसरी ओर, लाल चौक के क्लॉक टावर पर झंडा फहराने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने झड़प की आशंका से गिरफ्तार कर लिया।

14 महीने तक नजरबंद रहने के बाद बाहर आईं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा तिरंगे पर दिए गए बयान को लेकर जम्मू-कश्मीर में बवाल मचा हुआ है। आज सुबह से भी श्रीनगर और पूरे केन्द्र शासित प्रदेश का माहौल गर्म है। एक ओर भाजपा कार्यकर्ता पीडीपी कार्यालय तो दूसरी और लाल चौक पर भी तिरंगा लेकर पहुंचे। इस दौरान कार्यालय में मौजूद पीडीपी नेताओं के साथ प्रदर्शनकारियों के साथ नोंकझोंक भी हुई। पीडीपी प्रवक्ता एवं पूर्व एमएलसी फिरदोस टाक ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि कार्यालय पर हमला हुआ है। उनके साथ और पीडीपी के अन्य नेता परवेज वफा के साथ हाथापाई की गई।
लाल चौक पर झंडा फहराने पहुंचे भाजपाई गिरफ्तार
श्रीनगर के लाल चौक पर सोमवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर तिरंगा फहराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान कई भाजपा कार्यकर्ता गिरफ्तार भी किए गए।
महबूबा के इस बयान पर मचा है बवाल
उल्लेखनीय है कि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रिहा होते ही कश्मीर घाटी में अलगाववाद को हवा देनी शुरू कर दी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला के चीन की मदद से 370 बहाल करवाने के बयान के बाद महबूबा मुफ्ती ने भी शुक्रवार को अपनी अलगाववादी सोच स्पष्ट कर दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि आज के भारत के साथ वह सहज नहीं हैं। महबूबा ने कहा, आज के भारत में अल्पसंख्यक, दलित आदि सुरक्षित नहीं हैं। यह एक सियासी जंग है जो कि डॉ. फारूक, उमर या सज्जाद लोन अकेले नहीं लड़ सकते और एक साथ होकर भी नहीं लड़ सकते। हमें लोगों का साथ चाहिए। महबूबा ने कहा, आज तक यहां के लोगों का खून बहा और अब हम जैसे लीडरों की खून देने की बारी है। हम हिंसा नहीं चाहते लेकिन वे हिंसा चाहते हैं।
पीडीपी अभी खत्म नहीं हुई
महबूबा ने कहा, अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी यहां ऐसे कानून लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई, जिससे जम्मू-कश्मीर में लोग हिंसा पर उतर आएं। चाहे वो उर्दू भाषा की बात हो, डोमिसाइल कानून हो या अन्य कानून। जिस दौरान मैं जेल में बंद थी तो मुझे लगता था कि इन लोगों (केन्द्र सरकार) ने पीडीपी को खत्म कर दिया, लेकिन बाहर आने पर मैंने कार्यकर्ताओं से बात की तो साफ लगा कि हर कार्यकर्ता मुफ्ती साहब के एजेंडे के साथ है।
