February 16, 2026

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कोटा के हॉस्टल संचालकों ने ठिठुरती सुबह चम्बल के पानी में उतर किया जल सत्याग्रह, जानें क्यों?

कोटा के हॉस्टल संचालकों ने ठिठुरती सुबह चम्बल के पानी में उतर किया जल सत्याग्रह, जानें क्यों?

एनसीआई@कोटा
कोचिंग सिटी के रूप में देशभर में मशहूर कोटा के हॉस्टल संचालकों ने आज शनिवार सुबह चम्बल नदी के ठंडे पानी में उतर कर जल सत्याग्रह किया। उनकी मांग कोटा के बंद पड़े विभिन्न कोचिंग संस्थानों में शैक्षणिक कार्य तुरंत शुरू कराने की है।
कोटा के कई हॉस्टल संचालक बैराज की अपस्ट्रीम पर स्थित भीतरिया कुंड पहुंचे और वहां चम्बल नदी में खड़े होकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। उन्होंने अपने हाथों में तख्तियां भी ली हुई थीं, जिन पर कोटा की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कोचिंग संस्थानों को तुरंत शुरू करने की राज्य सरकार से मांग को लेकर की स्लोगन लिखे हुए थे। कोचिंग संस्थानों के संचालकों का कहना है कि इस बारे में उन्होंने कल मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी भेजा था। विभिन्न स्तरों पर पहले भी अपनी बात पहुंचाई है। लेकिन कोटा में कोचिंग संस्थान कब शुरू होंगे, इस बारे में अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
हजारों आदमी हो चुके बेरोजगार
कोचिंग हॉस्टल संचालकों का कहना है कि कोटा में उद्योग धंधों के बंद होने के बाद कोचिंग संस्थान ही यहां की अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ की हड्डी हैं। कोविड-19 के प्रकोप से जब से कोटा में कोचिंग संस्थान बंद हुए हैं, तब से इनसे जुड़े अन्य कारोबार जैसे हॉस्टल, मैस, होटल, रेस्टोरेंट, नगरीय परिवहन आदि व्यवसायों पर भी जबरदस्त प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके चलते हजारों लोगोें को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। इससे कोटा की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह गड़बड़ा गई है। लोग वापस अपने घरों को पलायन करने के लिए मजबूर हुए हैं।
करोड़ों रुपए का चढ़ा है कर्ज
कुछ हॉस्टल संचालकों का कहना है कि यदि कोचिंग संस्थान शुरू नहीं किए और बाहर से छात्रों का कोटा आना शुरू नहीं हुआ तो यहां के हॉस्टल संचालक गम्भीर आर्थिक संकट में पड़ जाएंगे, क्योंकि ज्यादातर हॉस्टल संचालकों ने बैंकों सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों से ऋण लेकर हॉस्टल बनाए हैं। कोचिंग छात्रों के अपने राज्यों में लौट जाने से हॉस्टलों पर ताले पड़े हुए हैं। इनके संचालक करोड़ों रुपए के कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे हैं। इससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो गयी है।
हॉस्टल संचालकों ने मुख्यमंत्री से पुन: गुहार लगाई है कि कोटा के कोचिंग संस्थानों को फिर से शुरू किया जाए, क्योंकि यह कोचिंग संस्थान ही कोटा की पहचान बन चुके हैं। समूचे देश में कोटा को कोचिंग सिटी के रूप में भी जाना जाता है।

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