निजी स्कूलों की फीस के सम्बन्ध में गहलोत सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल किया शपथ पत्र, मंगलवार को सुनवाई
एनसीआई@जयपुर
निजी स्कूलों की ओर से फीस वसूली के मामले में राजस्थान सरकार की ओर से सोमवार को हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश किया गया। शपथ पत्र में अदालती आदेश की पालना में सत्र 2020-21 की फीस वसूलने का ब्यौरा पेश किया गया। मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ राज्य सरकार व अन्य की अपील पर मंगलवार को सुनवाई करेगी।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र पेश कर कहा गया कि गत 28 अक्टूबर को शिक्षा विभाग की ओर से आदेश जारी कर स्कूल फीस निर्धारित की गई है। इसके तहत सीबीएसई (CBSE) की कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों की ट्यूशन फीस में तीस फीसदी की छूट दी गई है।
वहीं, राजस्थान बोर्ड की इन कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए ट्यूशन फीस में चालीस फीसदी की कटौती की गई है। इसके अलावा कक्षा एक से आठ के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने का निर्णय लेते समय पाठ्यक्रम में कटौती के आधार पर फीस निर्धारित की जाएगी।
इधर, निजी स्कूलों को यूनिफार्म में बदलाव नहीं करने सहित अन्य निर्देश दिए गए हैं। स्कूल फीस को लेकर हाईकोर्ट की खंडपीठ में मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने गत 7 सितम्बर को ट्यूशन फीस का सत्तर फीसदी वसूलने की छूट दी थी। इस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करत हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को फीस निर्धारित करने को कहा था।
राजस्थान में नहीं सुलझ रहा फीस विवाद, अभिभावकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
जयपुर। राजस्थान में फीस को लेकर पिछले 7 महीनों से चले आ रहे फसाद के बीच निजी स्कूलों ने 5 नवम्बर से ऑनलाइन पढ़ाई को बंद करने का फैसला लिया है, तो वहीं दूसरी ओर अभिभावकों ने भी फीस को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे डाली है।
पिछले दिनों शिक्षा विभाग की ओर से जारी फीस निर्धारण के आदेश को अभिभावकों ने मानने से इनकार कर दिया है और नए सिरे से फीस तय करने के साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर 20 से 25 फीसदी से ज्यादा फीस नहीं होने की मांग रखी है।
फीस के मामले पर संयुक्त अभिभावक समिति को अंतरराष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा और करणी सेना राजस्थान का भी समर्थन दिया गया है। संयुक्त अभिभावक समिति की ओर से प्रेसवार्ता आयोजित कर अभिभावकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि ‘निदेशालय की ओर से जारी की गई फीस भी अभिभावकों के लिए बहुत ज्यादा है। ऐसे में बंद स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर 20 से 25 फीसदी से ज्यादा की फीस नहीं होनी चाहिए।’
अभिभावकों ने कहा,’ साथ ही कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अभी स्कूलों को खोलने का फैसला नहीं लेना चाहिए। सरकार की ओर से 15 नवम्बर तक अगर अभिभावकों के हित में फीस निर्धारण नहीं किया गया तो 15 नवम्बर को जयपुर में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।’
