जडेजा की जगह मैदान में उतरे चहल: फैसले से नाराज कोच लैंगर ने रेफरी से की बहस; 3 विकेट लेकर मैन ऑफ द मैच बने युजवेंद्र
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कैनबरा34 मिनट पहले
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चहल ने मैच में 3 विकेट लिए और उन्हें मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। ऑस्ट्रेलियाई कोच लैंगर चहल को बधाई देते हुए।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए टी-20 सीरीज के पहले मैच में भारतीय टीम ने पहली बार ‘कन्कसन सब्सटिट्यूट’ का इस्तेमाल किया। रविंद्र जडेजा की जगह युजवेंद्र चहल को रिप्लेसमेंट के तौर पर मैदान पर भेजा गया। उन्होंने मैच में 3 विकेट लिए। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।
ऑस्ट्रेलियाई कोच हुए गुस्सा, रेफरी से की बहस
भारत के इस फैसले से ऑस्ट्रेलियाई कोच जस्टिन लैंगर गुस्से में नजर आए। पहली पारी के बाद उन्होंने मैच रेफरी डेविड बून से बहस भी की। भारत की पारी के दौरान 19वें ओवर में बल्लेबाज जडेजा को हैम-स्ट्रिंग की शिकायत हुई थी। इसके बाद 20वें ओवर में मिचेल स्टार्क की बॉल जडेजा के हेल्मेट पर जा लगी थी।
20वें ओवर में जडेजा के हेल्मेट में लगी थी बॉल
जडेजा भारतीय पारी के 20वें ओवर में रन लेते वक्त काफी परेशान नजर आए। हालांकि, उन्होंने अंतिम गेंद तक बल्लेबाजी की और 23 बॉल पर 44 रन की पारी खेली। पारी खत्म होने में 4 बॉल रहने के कारण जडेजा का कन्कसन टेस्ट नहीं किया गया।
मैच ब्रेक के दौरान भारत ने लेग स्पिनर चहल को जडेजा के कन्कसन रिप्लेसमेंट के तौर पर खेलाने का निर्णय लिया। कन्कसन सब्सटिट्यूट के नियम के मुताबिक टीम को बॉलर की जगह बॉलर और बैट्समैन की जगह बैट्समैन शामिल करना होता है।
इनिंग्स शुरू होने से 10 मिनट पहले चहल को दी गई जानकारी
जडेजा भारत के फ्रंटलाइन स्पिनर होने के कारण उनकी जगह चहल को सब्सटिट्यूट के तौर पर मैदान पर भेजा गया। मैच के बाद चहल ने कहा कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग से 10-15 मिनट पहले ही पता चला कि वे मैच में खेलने वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘जिस तरह जम्पा ने पहले ओवर में बॉलिंग की, मैं ठीक उसी तरह बॉलिंग करना चाहता था।’
चहल बने मैन ऑफ द मैच
चहल ने मैच में ऑस्ट्रेलिया के 3 मेन विकेट लिए। उन्होंने कप्तान एरॉन फिंच, स्टीव स्मिथ और विकेटकीपर-बल्लेबाज मैथ्यू वेड को आउट किया। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।
क्या है कन्कसन रिप्लेसमेंट ?
ICC ने 2019 में कन्कसन रिप्लेसमेंट के नियम को लागू किया था। इसे लाइक फॉर लाइक के तर्ज पर लाया गया था। यानि बैट्समैन की जगह बैट्समैन और बॉलर की जगह बॉलर। नियम लागू होने के बाद से कई टीमों ने इस नियम को लागू किया।
ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार इस नियम का किया था इस्तेमाल
ऑस्ट्रेलिया के मार्नस लाबुशाने पहले खिलाड़ी हैं, जिन्हें कन्कसन सब्सटिट्यूट के तौर पर टीम में शामिल किया गया था। 2019 में एशेज श्रृंख्ला के दौरान दूसरे टेस्ट में लाबुशाने को चोटिल स्टीव स्मिथ के कन्कसन रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया गया था।
टीम कब ले सकती है कन्कसन रिप्लेसमेंट
ICC के ‘कन्कसन सब्सटिट्यूट लॉ’ 1.2.7 के मुताबिक रिप्लेसमेंट लेने के लिए इन नियमों का पालन करना होता है :
- अगर किसी खिलाड़ी को मैच के दौरान या प्लेइंग एरिया में सिर या गले में चोट लगती है, तो टीम रिप्लेसमेंट के लिए अप्लाई कर सकती है।
- मेडिकल रिप्रजेंटेटिव टीम को लगता है कि खिलाड़ी वाकई इससे चोटिल है। इसके बाद मेडिकल रिप्रजेंटेटिव टीम और टीम मैनेजर ICC के मैच रेफरी को कन्कसन रिप्लेसमेंट फॉर्म जमा करना पड़ता है। उन्हें खिलाड़ी के चोट लगने के कारण को भी बताना होता है।
- मेडिकल रिप्रजेंटेटिव टीम और टीम मैनेजर को घटना के बाद जल्द से जल्द रेफरी को कन्कसन रिप्लेसमेंट फॉर्म जमा करना होता है। एक बार रेफरी ने रिप्लेसमेंट अप्रूव कर दिया। उसके बाद दोनों टीमों में से किसी को भी इस मामले में अपील करने का अधिकार नहीं है।
