जबरदस्त चर्चा में है ‘टूलकिट’…. जानें क्या होता है यह
ग्रेटा थनबर्ग
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
4 फरवरी को दोपहर कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस ने पर्यावरण पर काम करने वालीं विदेशी एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग के एक हालिया ट्वीट पर केस दर्ज कर लिया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस के स्पेशल पुलिस कमिश्नर प्रवीर रंजन ने साफ किया है कि एफआईआर में किसी के नाम का जिक्र नहीं किया है। साथ ही उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन को लेकर जो टूलकिट जारी की गई थी, उसे बनाने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने विभिन्न संगीन धाराओं में केस दर्ज किया है।
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि साइबर सेल सोशल मीडिया पर नजरें बनाए हुए है। इसी दौरान सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया हुआ एक डॉक्यूमेंट हाथ लगा। इस डॉक्यूमेंट का नाम टूलकिट है। बताया गया कि टूलकिट को खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन ने लिखा है।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर प्रवीर रंजन ने बताया कि “टूलकिट में एक एक्शन प्लान बताया गया था कि 26 जनवरी के आसपास डिजिटल स्ट्राइक करना है और ट्विटर स्टॉर्म करना है। 26 जनवरी को एक फिजिकल एक्शन करना है। 26 जनवरी के आसपास जो भी हुआ वो इसी प्लान के तहत हुआ ऐसा प्रतीत होता है।” दिल्ली पुलिस ने इस टूलकिट के लेखकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह केस आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 124A, 153A, 153 व 120B के तहत दर्ज किया गया है। इस एफआईआर में अभी किसी का भी नाम शामिल नहीं किया गया है।
इसे कहा जाता है टूल किट
हाल में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जो आंदोलन होते हैं, चाहे वो ब्लेक लाइव्स मेटर हो या फिर कोई दूसरा आंदोलन, इनमें आंदोलन में किए जाने वाले एक्शन की लिस्ट बनाई जाती है और यह लिस्ट आंदोलनकारियों में बांटी जाती है। इसमें सोशल मीडिया पर रणनीति से लेकर भौतिक रूप से सामुहिक प्रदर्शन की जानकारी दी जाती है। इसका असर यह होता है कि एक ही वक्त पर आंदोलनकारियों के एक्शन से आंदोलन की मौजूदगी दर्ज होती है।
3 फ़रवरी को स्वीडन की निवासी ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों के समर्थन में एक ट्वीट किया था। उसी दिन एक अन्य ट्वीट में ग्रेटा ने एक टूलकिट भी शेयर की थी और लोगों से किसानों की मदद करने की अपील की थी, मगर बाद में उन्होंने वो ट्वीट डिलीट कर दिया और उसका कारण बताया कि ‘जो टूलकिट उन्होंने शेयर की थी, वो पुरानी थी।’
4 फ़रवरी को ग्रेटा ने एक बार फिर किसानों के समर्थन में ट्वीट किया। साथ ही उन्होंने एक और टूलकिट शेयर की, जिसके साथ उन्होंने लिखा, “ये नई टूलकिट है, जिसे उन लोगों ने बनाया है जो इस समय भारत में ज़मीन पर काम कर रहे हैं। इसके ज़रिये आप चाहें तो उनकी मदद कर सकते हैं।”
बता दें कि पॉप सिंगर रिहाना के बाद क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन वाले आर्टिकल को शेयर किया था। साथ ही लिखा था कि, “हम भारत में किसान आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़े हैं।” उनके इस ट्वीट के बाद भारत में कई सेलिब्रिटीज और अन्य लोगों ने इसके खिलाफ ट्वीट किए, इसे एक प्रोपेगेंडा बताया गया।
आसान शब्दों में ऐसे समझें
जिस दस्तावेज़ में इन ‘एक्शन पॉइंट्स’ को दर्ज किया जाता है, उसे टूलकिट कहते हैं।
‘टूलकिट’ शब्द इस दस्तावेज़ के लिए सोशल मीडिया के संदर्भ में ज़्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें सोशल मीडिया की रणनीति के अलावा भौतिक रूप से सामूहिक प्रदर्शन करने की जानकारी भी दे दी जाती है।टूलकिट को अक्सर उन लोगों के बीच शेयर किया जाता है, जिनकी मौजूदगी आंदोलन के प्रभाव को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। ऐसे में टूल किट को किसी आंदोलन की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा सकता है।
टूलकिट को आप दीवारों पर लगाए जाने वाले उन पोस्टरों का परिष्कृत और आधुनिक रूप कह सकते हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से आंदोलन करने वाले लोग अपील या आह्वान करने के लिए करते रहे हैं।
सोशल मीडिया और मार्केटिंग के विशेषज्ञों के अनुसार, इस दस्तावेज़ का मुख्य मक़सद लोगों (आंदोलन के समर्थकों) में समन्वय स्थापित करना होता है। टूलकिट में आमतौर पर यह बताया जाता है कि लोग क्या लिख सकते हैं, कौन से हेशटेग का इस्तेमाल कर सकते हैं, किस वक़्त से किस वक़्त के बीच ट्वीट या पोस्ट करने से फ़ायदा होगा और किन्हें ट्वीट्स या फ़ेसबुक पोस्ट्स में शामिल करने से फ़ायदा होगा।
जानकारों के अनुसार, इसका असर यह होता है कि एक ही वक्त पर लोगों के एक्शन से किसी आंदोलन या अभियान की मौजूदगी दर्ज होती है, यानी सोशल मीडिया के ट्रेंड्स में और फिर उनके ज़रिये लोगों की नज़र में आने के लिए इस तरह की रणनीति बनाई जाती है।
आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि तमाम राजनीतिक पार्टियां, बड़ी कम्पनियां और अन्य सामाजिक समूह भी कई अवसरों पर ऐसी ‘टूलकिट’ इस्तेमाल करते हैं।
