बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण अस्पताल में भर्ती तो रहे, मगर कब और क्यों? जानिए
वर्ष 2011 में देहरादून के अस्पताल में भर्ती बाबा रामदेव। यहीं पर श्रीश्री रविशंकर ने उनका अनशन खत्म करवाया था।
एलोपैथी को स्टुपिड और दिवालिया साइंस कहने वाले बाबा रामदेव के अलावा एक बार उनके प्रमुख सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को भी गम्भीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, मगर इनके कारणों से ज्यादातर लोग अनजान हैं और कई प्रकार की अफवाहें फैली हुई हैं
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
वॉट्सएप पर आए एक मैसेज को पढ़ते हुए एलोपैथी को स्टूपिड और दिवालिया साइंस कहने वाले पतंजलि संस्थान के संस्थापक-संचालक और प्रसिद्ध योग गुरू बाबा रामदेव को अपनी इस टिप्पणी पर हर तरफ से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इनमें केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी आपत्ति जताई। इसके बाद हालांकि बाबा रामदेव अपनी टिप्पणी पर अफसोस जताते हुए उसे वापस ले चुके हैं, मगर देश में डॉक्टरों की सबसे बड़ी संस्था आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) इससे संतुष्ट नहीं है और उनके खिलाफ कार्यवाही की मांग पर अड़ी हुई है।
दूसरी ओर अब यह मामला भी चर्चा में है कि खुद बाबा रामदेव और उनके करीबी आचार्य बालकृष्ण भी एक बार एलोपैथी इलाज के लिए अस्पताल में में भर्ती रह चुके हैं। मगर ऐसा कब और क्यों हुआ इस पर कई प्रकार की बातें कही जा रही हैं। मगर जनसत्ता की एक रिपोर्ट के अनुसार सारा मसला यह है।
इस रिपोर्ट में बाबा रामदेव के अस्पताल में भर्ती होने के बारे में बताया गया है कि, बात अन्ना आंदोलन के समय की है। देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाजें बुलंद थीं। रामदेव भी तब मुखर होकर मोर्चा खोल रहे थे। वे दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठ गए थे। 4 जून, 2011 की शाम तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने दावा किया कि उन्हें अनशन खत्म करने से जुड़ी रामदेव की चिट्ठी मिली है। हालांकि, योगगुरू ने उनके दावे को झूठ करार दिया। धरना स्थल पर रात को बाबा रामदेव सोए हुए थे, तभी वहां पुलिस पहुंची। इसके बाद वहां हंगामा खड़ा हो गया। बाबा कुछ ही देर में मंच पर आए और स्टेज से अचानक कूद पड़े।
इस बीच वहां पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। इस बीच बाबा रामदेव वहां से बचकर सलवार-कमीज में नई दिल्ली की ओर निकले, मगर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें वहां से देहरादून भेज दिया गया। हालांकि, वहां भी उनका अनशन जारी रहा। इससे उनका स्वास्थ्य बुरी तरह गड़बड़ा गया। तब उन्हें जोलीग्रांट अस्पताल में शिफ्ट किया गया। रामदेव को इस दौरान बीपी की समस्या भी हो गई। साथ ही उनका करीब पांच किलो वजन भी घट गया था। यह बात 10 जून के आसपास की है। रामदेव का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने मीडिया के सामने बताया था कि रामदेव के कई पैरामीटर्स में गिरावट आ गई थी। डॉक्टरों ने तब उनका इलाज किया था। आईसीयू के बराबर में एक रूम था, जहां उन्हें रखा गया था। सेलाइन के साथ विटामिन्स दिए गए थे।
गौरतलब है कि सेलाइन सॉल्यूशन एक सरल लेकिन बहुत शानदार चीज है। जिन मामलों में डिहाइड्रेशन के जोखिम से जान जाने का खतरा हो, उनमें यह जिंदगी बचाने की क्षमता रखता है। नमकीन घोल को ही ‘सेलाइन सॉल्यूशन’ कहा जाता है। हालांकि, बाद में
‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के श्रीश्री रविशंकर ने अस्पताल पहुंच बाबा रामदेव का अनशन तुड़वा दिया था। बालकृष्ण भी तब उनके साथ अस्पताल में ही मौजूद थे।
आचार्य बालकृष्ण का यह है मामला
वहीं, 23 अगस्त 2019 को बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बताया गया था कि वह बेहोश हो गए थे। आनन-फानन उन्हें पतंजलि योगपीठ के एक नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया। वहां उनकी जांच करने वाले डॉक्टरों ने बताया था कि, उन्हें जब यहां लाया गया, तो वह सही से बोल नहीं पा रहे थे। हालांकि उनके सभी टेस्ट नार्मल हैं, मगर न्यूरो को ध्यान में रखते हुए उन्हें एम्स रेफर किया गया।
इस पर आचार्य बालकृष्ण को ऋषिकेश स्थित एम्स ले जाया गया था, जहां उनका इलाज हुआ। इस दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें दिल का दौरा पड़ने की बात कही गई थी। वैसे, रामदेव के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने पत्रकारों से तब कहा था कि चिंता की बात नहीं है। आचार्य बालकृष्ण की हालत स्थिर है।
