सरकार का एक बड़ा फैसला, जिसकी नहीं हुई ज्यादा चर्चा, सबकी सेहत के साथ किसानों का हित भी है जुड़ा
सरकार के इस फैसले से सरसों की मांग बढ़ेगी तो उत्पादन के साथ किसानों का लाभ बढ़ना भी तय, लोगों को मिलावटी तेल से होने वाले नुकसान से भी मिलेगा छुटकारा
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
अब सरसों तेल (Mustard oil) को दूसरे स्रोत के खाद्य तेलों के साथ नहीं मिलाया जा सकेगा। खाद्य तेलों में सरसों तेल के मिलावट पर 8 जून से पूरी तरह रोक लग गई है। सरकार ने इस सम्बन्ध में आदेश जारी कर दिए हैं। अभी तक पैसे के लालच में सेहत के दुश्मन सरसों तेल के नाम पर सस्ता पाम ऑयल बेच रहे थे।
इस आदेश के अनुसार खाद्य तेलों के उत्पादन के सम्बन्ध में सरसों के तेल में मिलावट करने की पैकर्स को जो अनुमति दी गई थी, उसे वापस ले लिया गया है। अब सरसों तेल को दूसरे स्रोत के खाद्य तेलों के साथ नहीं मिलाया जा सकेगा। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग के तहत आने वाले विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय ने मिश्रित खाद्य वनस्पति तेल के सभी पैकिंग करने वालों के नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालयों के नाम आदेश जारी कर दिया।
80 प्रतिशत तक मिलावटी था सरसों का तेल
बाजार सूत्रों का कहना है कि सरकार ने सरसों तेल के सम्मिश्रण को रोककर सराहनीय काम किया है। इससे शुद्ध सरसों तेल की मांग बढ़ेगी और देश में तिलहन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उनका कहना है कि पुराने नियमों की आड़ में अब तक आम जनता को मिश्रित सरसों तेल ही उपलब्ध होता रहा है। कई खाद्य तेलों में तो केवल 20 प्रतिशत ही सरसों तेल होता था, जबकि 80 प्रतिशत दूसरे तेलों का मिश्रण होता था। चावल की भूसी के तेल का इसमें सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया जाता रहा है।
इतना खतरनाक था यह मुनाफे का खेल
पैसों के लालच में सेहत के दुश्मन सरसों तेल के नाम पर सस्ता पाम ऑयल बेच रहे थे। येलो बटर नाम का प्रतिबंधित सिंथेटिक कलर मिलाकर इसे सरसों तेल का रंग दिया जाता रहा है। वहीं, गंध के लिए एसेंस मिला देते थे। येलो बटर सेहत के लिए खतरनाक है। पाम ऑयल सरसों तेल के मुकाबले काफी सस्ता है। यही कारण है कि मिलावटखोर लोगों की सेहत से खेलते रहे। इसलिए सरसों तेल में मिलावट की कई शिकायतें आ रही थीं।
अब मांग बढ़ने से उत्पादन के साथ लाभ भी बढ़ेगा
सरसों के तेल में मिलावट पर रोक की वजह से घरेलू उपभोक्ताओं को गैर-मिलावटी शुद्ध सरसों तेल खाने को मिलेगा तथा भविष्य में इसकी पैदावार में भारी इजाफा हो सकता है। देश में खाद्य तेलों का सालाना उत्पादन लगभग 75 लाख टन का होता है, जिसके आधे हिस्से की पूर्ति सरसों तेल से होती है। सरकार ने लगभग 20 प्रतिशत सरसों तेल के साथ 80 प्रतिशत चावल भूसी, सोयाबीन डीगम जैसे सस्ते आयातित तेलों की ब्लेंडिंग करने की छूट दे रखी थी। इससे देश में सरसों तेल, तिलहन का उत्पादन नहीं बढ़ पाया। अब किसानों को सरसों के अच्छे दाम मिलने लगे हैं और मिलावट पर रोक से सरसों की बम्पर पैदावार होने की सम्भावना है।
ऐसे करें असली की पहचान
सरसों तेल को थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रख दें। अगर वह असली नहीं होगा, मतलब पाम ऑयल से बना होगा, तो थोड़ा सा जम जाएगा। वहीं, असली तेल होगा तो नहीं जमेगा। वैसे भी पाम ऑयल से बना तेल थोड़ा भारी होता है। रबिंग टेस्ट सरसों के तेल की शुद्धता की पहचान करने का दूसरा बढ़िया तरीका है। अपनी हथेली में थोड़ा तेल डालें और रगड़ें। यदि इसके बाद आपको कोई गंध या रासायनिक रंग के कोई निशान मिलें, तो इसका मतलब है तेल में कुछ चिकना पदार्थ मिला हुआ है।
गत वर्ष 1 अक्टूबर से लगनी थी रोक
यहां उल्लेखनीय है कि सरकार ने सरसों तेल में किसी अन्य तेल की मिलावट पर रोक का फैसला तो गत वर्ष सितम्बर माह के अंत में ले लिया था। इसके बाद 1 अक्टूबर 2020 से ही सरसों के तेल में अन्य खाद्य तेलों की मिलावट पर रोक लग जानी थी, मगर किसी कारण इसे लागू होने में 8 माह की देरी हो गई।
सरसों के तेल में चावल की भूसी यानी राइस ब्रान तेल, पाम ऑयल या अन्य किसी सस्ते खाने के तेल की मिलावट की जाती रही है।
जानकार बताते हैं कि सरसों के तेल में मिलावट दो तरह से होती रही है-एक सम्मिश्रण (ब्लेंडिंग-Blending) जिसमें एक तय अनुपात में मिलावट की जाती है, जबकि दूसरा अपमिश्रण (अडल्टरेशन-Adulteration), जिसमें मिलावट के लिए कोई अनुपात तय नहीं होता है।
खाने तेल में अडल्टरेशन (Adulteration) पर पहले से ही रोक थी, जबकि तय अनुपात में ब्लेंडिग (Blending) की इजाजत थी, लेकिन अब एफएसएसएआई ने इस पर भी रोक लगा दी है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला आम आदमी के साथ-साथ किसानों के भी हित में है। उनके अनुसार सरकार के इस फैसले से लोगों को जहां शुद्ध सरसों का तेल (Pure Mustard Oil) खाने को मिलेगा वहीं, सरसों की खपत बढ़ने से किसानों को उनकी फसल का अच्छा दाम मिलेगा। इससे किसान सरसों की खेती में दिलचस्पी लेंगे। सरसों की बुवाई 15 अक्टूबर से शुरू होने वाली है।
बहुत अधिक मिली थी मिलावट
सरकार ने जब गत वर्ष सितम्बर में सरसों के तेल में मिलावट रोकने का फैसला लिया था, उस समय खाद्य तेल उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्स्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता ने कहा था कि सरसों तेल में जो अल्डटरेशन हो रहा है उस पर रोक लगाने की जरूरत है, जबकि ब्लेंडिंग पर रोक नहीं होनी चाहिए। मगर उन्होंने यह भी माना था कि एफएसएसएआई ने जो सेम्पल लिए हैं, उनमें बहुत ज्यादा मिलावट थी, इसलिए यह फैसला लिया गया है।
गत वर्ष जब फैसला लिया, यह था भाव में अंतर
सरसों तेल (Mustard Oil) का थोक भाव उस समय जहां 1100 रुपए प्रति 10 किलो, वहीं सोया तेल का भाव 920 रुपए प्रति 10 किलो, पाम तेल का थोक भाव करीब 830 रुपए प्रति 10 किलो था। वहीं, राइस ब्रान तेल का दाम इनसे भी कम था। जानकार बताते हैं कि सरसों तेल में सस्ते खाद्य तेल की मिलावट करके कारोबारी ज्यादा मुनाफा कमाते हैं। उनके अनुसार सरसों तेल में सस्ते खाद्य तेल की मिलावट 80 फीसदी तक होने लगी थी। इससे उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ता था, क्योंकि उन्हें सरसों का ठीक भाव नहीं मिल पाता था।
