December 5, 2025

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जुलाई में मानसून के लिए आई यह बड़ी खबर

जुलाई में मानसून के लिए आई यह बड़ी खबर

करोड़ों किसानों के लिए मौसम विभाग ने दी अच्छी खबर

एनसीआई@नई दिल्ली

जुलाई का पूर्वानुमान बताते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में अच्छी बारिश होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन महीने के दूसरे हफ्ते के दूसरे हिस्से से मानसून के जोर पकड़ने की सम्भावना है

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की तरफ से किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। मौसम विभाग ने 1 जुलाई को कहा कि देश में दक्षिण पश्चिम मानसून के जुलाई में सामान्य रहने की सम्भावना है। जुलाई का पूर्वानुमान बताते हुए विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि प्रथम सप्ताह में अच्छी बारिश होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन महीने के दूसरे हफ्ते के दूसरे हिस्से से इसके जोर पकड़ने की सम्भावना है।

देश के किसान खरीफ फसलों की खेती में लगे हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 20 करोड़ के आसपास किसान खरीफ सीजन में धान, सोयाबीन, कपास, मक्का, मूंग, मूंगफली, गन्ना, उड़द और तुअर आदि फसलों की खेती करते हैं। इन फसलों की अच्छी पैदावार के लिए किसान मानसून की बारिश पर निर्भर रहते हैं। मानसून सामान्य रहने से किसानों की लागत कम हो जाती है और सिंचाई पर खर्च नहीं करना पड़ता।

भारतीय मौसम विभाग ने कहा, ‘देश में जुलाई 2021 में मासिक बारिश कुल मिलाकर सामान्य (लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) का 94 से 106 प्रतिशत) रहने की संभावना है।’ विभाग मौसम के दूसरे हिस्से के लिए बारिश का पूर्वानुमान जुलाई के अंत में या अगस्त की शुरुआत में जारी करेगा।

दक्षिण पश्चिम मानसून देश के पूरे हिस्से में पहुंच गया है, लेकिन हरियाणा, दिल्ली, पंजाब के कुछ हिस्से, पश्चिम राजस्थान और पश्चिम उत्तर प्रदेश अब भी इससे अछूते हैं। विभाग ने इससे पहले कहा था कि इन क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होने की फिलहाल कम सम्भावना है।

8 जुलाई से गति पकड़ेगा मानसून

सामान्य तौर पर एक जून को दस्तक देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार दो दिन की देरी से 03 जून को केरल तट पर पहुंचा था, लेकिन इसके बाद मानसून में गजब की तेजी देखी गई और यह देश के ज्यादातर हिस्सों में 7 से 10 दिन पहले पहुंच गया। ज्यादातर इलाकों में जोरदार बारिश हुई, लेकिन धीरे-धीरे मानसून कमजोर पड़ने लगा। आंकड़ों के मुताबिक, 20 जून तक 42 प्रतिशत सरप्लस मानसून था, जो 30 जून को घटकर मात्र 13 प्रतिशत रह गया।

इसके अलावा देश के एक हिस्से यानी उत्तर पश्चिम भारत में मानसून ने अभी तक दस्तक नहीं दी है। इन इलाकों में किसान सिंचाई के लिए ट्यूबवेल पर निर्भर हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, 8 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी से चलने वाली पूर्वी हवाएं सक्रिय हो जाएंगी। इससे मानसून की प्रगति को गति मिलेगी और जिन हिस्सों में अभी तक मानसूनी बारिश नहीं हुई है, वहां पर बादल बरसेंगे।

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