December 5, 2025

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राजस्थान में बिजली संकट टला: कोयले के 1740 करोड़ रुपए भुगतान के बाद कम्पनियां सप्लाई करने को राजी, 5 यूनिट में उत्पादन शुरू, 12 घंटे तक की हो रही थी कटौती

एनसीआई@जयपुर

राजस्थान में दो दिन से गहराया हुआ बिजली संकट फिलहाल टल गया है। कोयला कम्पनियों के बकाया भुगतान के बाद सप्लाई मिलते ही प्रदेश की 5 अलग-अलग यूनिट में उत्पादन शुरू हो गया। हालांकि कम्पनियों का 1060 करोड़ रुपए अभी भी बकाया है। सरकार ने अभी 1740 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। बिजली संकट के कारण कई यूनिट बंद हो गईं थीं। इससे कुछ इलाकों में 10 से 12 घंटे तक की कटौती करनी पड़ रही थी।

कोयले की सप्लाई के बाद झालावाड़ में कालीसिन्ध की 600 मेगावॉट की एक यूनिट, छबड़ा की 250 मेगावॉट की एक यूनिट, छबड़ा में 5 नम्बर की 660 मेगावॉट की सुपर क्रिटिकल यूनिट और सूरतगढ़ के थर्मल पावर प्लांट की 660-660 मेगावॉट की दो यूनिट शुरू हो गई है। सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन की एक यूनिट पर 500 और दूसरी पर 600 मेगावाट लोड चल रहा है। फिलहाल कोयले की कमी से सूरतगढ़ थर्मल प्लांट की 250-250 मेगावाट की पुरानी 6 यूनिट बंद हैं। ये कोयले की अच्छी सप्लाई और स्टॉक होने के बाद ही शुरू हो पाएंगी।

फिलहाल सुपर क्रिटिकल यूनिट चलाने की प्राथमिकता

फिलहाल कोयला संकट को देखते हुए विद्युत उत्पादन निगम की यहां केवल सुपर क्रिटिकल यूनिट चलाने की प्राथमिकता है। कोयले का स्टॉक अभी करीब 40 हजार टन मौजूद है। सूरतगढ़ में ये 660 मेगावाट की यूनिट नई टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इनमें कोयला कम खर्च होता है। 660 मेगावाट क्षमता पर एक यूनिट को चलाने के लिए रोज़ाना दो रैक कोयले की जरूरत है। यहां 2 यूनिट चलाने के लिए चार रैक यानी चार ट्रेन कोयला हर रोज चाहिए।

डिस्कॉम की बड़ी लापरवाही से पैदा हुआ बिजली संकट

कोयला संकट पैदा होने का मुख्य कारण डिस्कॉम की बड़ी लापरवाही रही है। सूत्रों ने बताया कि उत्पादन निगम का डिस्कॉम्स के ऊपर 27 हजार करोड़ बकाया है, जो कि पूर्व में तो 30 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। डिस्कॉम्स ने उत्पादन निगम को इतनी बड़ी राशि का भुगतान नहीं किया है। इसलिए निगम की हालत खराब हो गई और वह कोयला कम्पनियों- कोल इंडिया और पीकेसीएल को समय पर बकाया भुगतान नहीं कर सकी। इस कारण उन कम्पनियों ने कोयला देना बंद कर दिया। उत्पादन निगम डिस्कॉम्स को बिजली बेचती है। इसके बदले में डिस्कॉम्स से भुगतान नियमित रूप से उत्पादन निगम को मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। दूसरा अंतिम समय तक सरकार को भी हालात नहीं बताए गए ऐसे में स्टॉक का भी संकट खड़ा हो गया।

सरकार की मदद से बकाया भुगतान का बड़ा हिस्सा चुकाया

कोयला सप्लाई करने वाली पीकेसीएल कम्पनी का पहले 3 हजार करोड़ रुपए का बकाया था। इसमें से 1100 करोड़ के करीब भुगतान किया गया। 1900 करोड़ रुपए बाकी बचा था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद करीब 1375 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है। इसी तरह, कोल इंडिया का 900 करोड़ बकाया था, जिसमें करीब 365 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया है।

यहां से मिलता है राजस्थान को कोयला

राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के पास कोयले की माइन अलॉट कर रखी है। यहां से एक साल में 15 मिलियन टन यानी करीब 1.5 करोड़ टन कोयला निकलता है। इस कच्चे कोयले को वहीं पर वॉश करवाकर राजस्थान के लिए सप्लाई होती है। यह काम राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की जॉइंट वेंचर कम्पनी पीकेसीएल- पार्से केंटे कोलरीज लिमिटेड के पास है। कम्पनी में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की 74 फीसदी और राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की 26 फीसदी हिस्सेदारी है। पार्से केंटे कोल ब्लॉक से राजस्थान में सप्लाई लोकेशन तक कोयला लाने में माइनिंग फीस, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और जो टैक्स लगता है, उसका भुगतान उत्पादन निगम करता है।

कोयला माइनिंग इलाकों में बारिश बनी है परेशानी

पीएसीएल की अम्बिकापुर के पास कोल ब्लॉक से तो कोयला माइनिंग के बाद राजस्थान आ रहा है। बिलासपुर कोल इंडिया के ब्लॉक्स के इलाकों में बरसात की वजह से पूरी कैपेसिटी में कोयला नहीं निकल पा रहा है। फिलहाल कोयले की 6 रैक ही शुरू हो सकी है। कालीसिंध की दोनों यूनिट चलाने के लिए प्रतिदिन 15 हजार टन यानी 4 रैक कोयला चाहिए। एक रैक अगले 2 से 3 दिन में आएगी और 5 रैक पाइप लाइन में है। एक रैक यानी 60 डिब्बों की ट्रेन होती है। एक रैक में 3900 से 4000 टन कोयला आता है।

दिल्ली में कोयला मंत्रालय में हुई वार्ता रही पॉजिटिव

शनिवार को नई दिल्ली में राज्य के ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला और सचिव दिनेश कुमार की कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया के अधिकारियों से हुई वार्ता पॉजिटिव रही। इसमें राज्य सरकार के वित्त विभाग और ऊर्जा विभाग की मदद से राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आर्थिक मदद देकर बकाया भुगतान करने और राजस्थान को कोयले की सप्लाई तुरंत शुरू करने पर सहमति बनी। इसके बाद बकाया भुगतान कराया गया है।

अब रैक बढ़ाने की तैयारी

बिलासपुर में एसईसीएल- साउदर्न इंडिया कोल लिमिटेड के ऑफिस में एक टीम राजस्थान से भेजी गई है। कोल इंडिया से सप्लाई रुकने से पहले तक करीब 4 रैक की रोज आपूर्ति हो रही थी। अब बढ़ाकर 6 रैक करने की कोशिशें की जा रही हैं। जानकारी के मुताबिक़ राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सीएमडी राजेश कुमार शर्मा जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता के लिए दिल्ली जा सकते हैं।

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