December 5, 2025

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एसआई भर्ती में नकल के लिए 20 लाख की डील: हाई प्रोफाइल गिरोह के 8 शातिर पकड़े, स्कूल लेक्चरर और टीचर ने आधार कार्ड व फोटो में काट-छांट कर बनाए फर्जी डॉक्युमेंट

एनसीआई@जयपुर

राजस्थान पुलिस की एसआई भर्ती परीक्षा में जयपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हाई प्रोफाइल नकल गिरोह का खुलासा किया है। इस गिरोह के 3 फर्जी परीक्षार्थी, 4 दलाल व एक असली अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है। इन्होंने परीक्षार्थियों के आधार कार्ड, फोटो को काट-छांट कर फर्जी डॉक्युमेंट बना लिए थे। डमी केंडिडेट बैठाकर नकल करा रहे थे। पकड़े गए दो दलालों में से एक लेक्चरर है और दूसरा गवर्नमेंट टीचर है। परीक्षा के लिए 18 से 20 लाख रुपए में डील हुई थी।

ये हुए गिरफ्तार

डीसीपी नॉर्थ परिस देशमुख ने बताया कि नेतराम मीणा (32) पुत्र लक्ष्मण मीणा निवासी भोजापुर सपोटरा करौली, केदार मीणा (40) पुत्र रंगलाल निवासी राजगढ़ अलवर, भभूता राम उर्फ रणजीत (28) पुत्र विरूधाराम निवासी सेड़वा बाड़मेर, भंवरलाल (38) पुत्र विजय सिंह निवासी धोरीमन्ना बाड़मेर, महादेव (26) पुत्र मोहनलाल निवासी जम्बेश्वर कॉलोनी, धोरीमन्ना बाड़मेर, पुष्पेंद्र मीणा (26) पुत्र हुकमचंद निवासी नादौती करौली, हनुमानराम बिश्नोई पुत्र मूलाराम निवासी सेड़वा, बाड़मेर और चनणाराम पुत्र खेताराम निवासी खरड़ धोरीमन्ना, बाड़मेर को गिरफ्तार किया है।

पहले फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया था

आरपीएससी की एसआई भर्ती परीक्षा का सेंटर जयपुर में ध्रुव बाल निकेतन सीनयर सेकेंडरी स्कूल में आया था। स्कूल में फर्जी अभ्यर्थी बनकर युवक आया तो पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उससे पूछताछ के बाद 7 आरोपियों को पकड़ा गया था। गिरोह का सरगना नेतराम मीणा है। वह सवाई माधोपुर में स्कूल लेक्चरर है और उसका सहयोगी भंवरलाल भी बाड़मेर में सरकारी टीचर है। दोनों ने परीक्षा में नकल कराने की योजना बनाई। तैयारी करने वाले स्टूडेंटस को शामिल किया। नेतराम ने दौसा, करौली, सवाई माधोपुर व धौलपुर के छात्रों से सम्पर्क किया।

बाद में मिलती थी पूरी रकम

परीक्षा में बैठने वाले परीक्षार्थियों से आधार कार्ड और फोटो ले लिए। कांट-छांट कर डमी केंडिडेट के फोटो लेकर फर्जी एडमिट कार्ड बना लिए। परीक्षा के लिए 18 से 20 लाख रुपए में डील की गई थी। 5 लाख रुपए डमी केंडिडेट, 5 लाख रुपए दलाल व 10 लाख रुपए खुद रखते थे। पेपर होने के बाद डमी केंडिडेट पेपर बुक व ओएमआर शीट दलाल के जरिए नेतराम को देता था। इसके बाद उन्हें नेतराम मूल परीक्षार्थी को दे देता था। आंसर की आने पर मूल परीक्षार्थी पेपर का मिलान कर पूरे रुपए देता था।

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