आनंद गिरि पर ऑस्ट्रेलिया में 2 महिलाओं ने दर्ज कराया था छेड़छाड़ और मारपीट का केस, हुई थी जेल, अन्य विवादों से भी है नाता
महंत नरेन्द्र गिरि से माफी मांगते हुए उनके शिष्य स्वामी आनंद गिरि (फाइल फोटो)
एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में हिरासत में लिए गए उनके शिष्य स्वामी आनंद गिरि लम्बे समय से काफी विवादों में रहे हैं। उनकी हरकतों से उनके चरित्र पर भी सवाल उठे। माना जाता है कि इससे नरेन्द्र गिरि, मंदिर और बाघंबरी मठ की छवि को बहुत नुकसान पहुंचा। महंत नरेन्द्र गिरि इससे काफी परेशान रहे।

पुलिस ने बताया है कि अपने 7 पेज के सुसाइड नोट में महंत ने मानसिक रूप से परेशान होने की बात कही है। दरअसल, महंत और उनके शिष्य स्वामी आनंद गिरि के बीच का विवाद काफी चर्चाओं में रहा था।आनंद गिरि पर गम्भीर आरोप लगे थे। इसके बाद उन्हें निरंजनी अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया था।आनंद गिरी संगम में लेटे हनुमान मंदिर के छोटे महंत हुआ करते थे। उन्हें महंत नरेन्द्र गिरि का प्रिय शिष्य माना जाता था। उन्हें मंदिर से जुड़े कई अधिकार भी हासिल थे, लेकिन संत परम्परा का निर्वहन न करने की वजह से उन्हें इसी साल निष्कासित कर दिया गया था।
इसके बाद आनंद गिरि ने अपने गुरु महंत नरेन्द्र गिरी पर कई आरोप लगाए थे। जिनका उत्तर देते हुए महंत ने भी आनंद पर गम्भीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी।
महिलाओं की शिकायत पर हुई थी जेल
यह मामला साल 2016 और 2018 से जुड़ा है। उस वक्त आनंद गिरि महंत के विश्वासपात्र हुआ करते थे। इस दौरान वे आस्ट्रेलिया गए थे। तब उन पर वहां होटल के कमरे में दो महिलाओं से छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप लगे थे। इन महिलाओं ने आनंद गिरि के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। इस पर पुलिस ने उन्हें वहां गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।इस घटना से आनंद गिरी के चरित्र पर सवाल खड़े हो गए थे।
बाद में उन्हें महंत नरेन्द्र गिरि के दखल और वकीलों की मदद से रिहा करवाया गया था। लेकिन इस घटना की वजह से महंत नरेन्द्र गिरि, मंदिर और बाघंबरी मठ की छवि को बहुत नुकसान हुआ था। महंत नरेन्द्र गिरी इस घटना से काफी आहत थे। इस मामले में छूट जाने के बाद आनंद ने अपने गुरु महंत नरेन्द्र गिरि पर उन्हें छुड़ाने के लिए कई अमीर लोगों से 4 करोड़ रुपए वसूल करने का आरोप लगाया था।
विमान में शराब के ग्लास के साथ फोटो
यह मामला अक्टूबर 2020 का है, जिसका सम्बन्ध एक तस्वीर से था। दरअसल, उस वक्त आनंद गिरि की एक फोटो वायरल हो गई थी, जिसमें वह एक विमान की बिजनेस क्लास में बैठे नजर आ रहे थे। उनके सामने होल्डर पर शराब से भरा एक ग्लास रखा था। इस तस्वीर के वायरल हो जाने पर आमजन और मठ से जुड़े लोगों ने काफी एतराज जताया था। इसके बाद आनंद गिरि धार्मिक लोगों के निशाने पर आ गए थे। हर तरफ लोग उनकी बुराई कर रहे थे। इस बात से परेशान होकर आनंद गिरि ने सफाई देते हुए कहा था कि उस ग्लास में शराब नहीं एप्पल जूस था। तस्वीर को वायरल करना उन्हें बदनाम करने की साजिश थी।
चढ़ावे का पैसा चोरी कर परिवार पर खर्च
इसी साल महंत नरेन्द्र गिरी ने आनंद गिरि पर चोरी का गम्भीर इल्जाम लगाया था। आनंद पर आरोप था कि वो संत परम्परा के खिलाफ अपने परिवार से सम्बंध रखते थे। प्रयागराज में संगम किनारे बने लेटे हनुमान मंदिर में जो चढ़ावे का पैसा आता है, आनंद उसे अपने परिवार पर खर्च करते रहे। इसी आरोप के बाद आनंद को अखाड़े से निकाल दिया गया था। निकाले जाने के बाद आनंद गिरि ने अपने गुरु महंत नरेन्द्र गिरी पर पलटवार करते हुए कई आरोप जड़ दिए थे। उस वक्त महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा था कि आनंद के खिलाफ की गई कार्रवाई एक दिन का नतीजा नहीं है, बल्कि लगातार उनकी निगरानी की जा रही थी।
आनंद ने महंत के पैर पकड़कर मांगी थी माफी
इसी साल मई में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद उस वक्त थम गया था, जब आनंद गिरि ने अपने गुरु महंत नरेन्द्र गिरी के पैर पकड़कर माफी मांग ली थी। इसके साथ ही आनंद गिरी ने निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर से भी माफी मांगी थी। दोनों के बीच सुलह हो जाने के बाद महंत नरेन्द्र गिरि ने आनंद पर मठ और प्रयागराज के हनुमान मंदिर में आने पर लगाई गई पाबंदी हटा दी थी।
इस दौरान अखाड़े की सम्पत्ति, करोड़ों की जमीनों की खरीद-फरोख्त जैसे कई मामलों को लेकर महंत और आनंद के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। यहां तक कि आनंद ने एक बार उनके आचरण पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर महंत नरेन्द्र गिरि परेशान चल रहे थे। इसी बात का जिक्र उन्होंने अपने सुसाइड नोट में किया है।
