December 14, 2025

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अब बेखौफ पाकिस्तान: तालिबान से सम्बंधों पर यह कबूलनामा वैश्विक मानवता के लिए चुनौती

इमरान खान सरकार के मंत्री शेख राशिद ने कहा: हम हैं तालिबान के संरक्षक, हमने ही दी शरण और शिक्षा

-राजीव सक्सेना

विश्व की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका का मुंह काला करने के बाद अफगानिस्तान पर तकरीबन पूरी तरह काबिज हो चुके तालिबान के आगे आज पूरा विश्व समुदाय असहाय और नतमस्तक है। चीन से लेकर रूस जैसे प्रभावशाली देशों के अलावा टर्की आदि में भी उससे अधिक से अधिक प्रगाढ़ता बढ़ाने की होड़ मची हुई है। पूरी मानवता के लिए यह परिदृश्य बहुत ही शर्मनाक और खतरनाक है।

इन देशों के ऐसे रवैये से ही क्या विश्व का भविष्य तय होने वाला है? इस सवाल का जवाब वर्तमान परिदृश्य में तो कहीं से भी धुंधला या अस्पष्ट नहीं है, जो बेहद चिंताजनक है। रूस जैसा बड़ा ताकतवर देश भी हृदयहीन नरभक्षियों से समानता रखने वाले खौफनाक, अमानवीय, क्रूर आतंकी संगठन के आगे इस तरह बिछ जाएगा, सोचा भी नहीं जा सकता था। इन सबकी ऐसी दयनीय दशा देख पाकिस्तान के ‘पर’ (पंख) और ताकतवर हो गए हैं, जोश में होश खो देने की तर्ज पर अधिक फड़फड़ाने लगे हैं। ‌इसी का नतीजा है उसका यह ताजा कबूलनामा, हालांकि यह कोई छुपी हुई बात तो है नहीं। भारत तो यह विश्व समुदाय को पहले ही बता चुका है और लगातार दोहराता आ रहा है।

यह है पूरा मामला

एक ओर जहां तालिबान अफगानिस्तान में अपनी सरकार के गठन की मशक्कत कर रहा है तो पाकिस्तान जैसे खुशी से बावरा हुआ जा रहा है। पूरा विश्व यह बात तो पहले से ही जानता है कि आतंकियों के सबसे बड़े पनाहगाह पाकिस्तान का ही तालिबान को भी संरक्षण है, मगर इसे खुल कर कबूल लेना, यह अलग बात है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पहले ही तालिबान के अफगानिस्तान पर हुए कब्जे को उसकी (अफगानिस्तान) ‘गुलामी की जंजीरें’ टूटना बताकर भरपूर प्रशंसा कर चुके हैं। ऐसे में पाकिस्तान के गृहमंत्री शेख राशिद, जो पहले से ही अपने बड़बोलेपन के लिए प्रसिद्ध हैं, ने कह दिया है कि,  ‘हम (पाकिस्तान) तालिबानी नेताओं के संरक्षक हैं। हमने ही तालिबान के नेताओं की लम्बे वक्त तक हिफाज़त की। उन्होंने हमारे यहां शरण ली, शिक्षा ली और यहां घर बनाया। ‘ शेख राशिद ने इससे भी आगे जाकर यह बात कबूल की कि, “हमने तालिबान के लिए सब कुछ किया है।”

एक से बढ़कर एक बयान

उल्लेखनीय कि पाकिस्तान की ओर से लगातार तालिबान के समर्थन में और उसकी तारीफ करने वाले बयान दिए जा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ही कुछ दिन पूर्व यह जानकारी देकर कि, तालिबान अगले कुछ दिन में सरकार बनाने वाला है, उससे अपने सम्बंधों की एक बार फिर पुष्टि कर दी थी। इसके कुछ वक्त बाद ही तालिबान ने भी इस बात पर मोहर लगा दी थी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी तालिबान के समर्थन में कई बार अपना दिल खोल चुके हैं। तालिबान के काबुल पर कब्जा करने को भी इमरान ने तुरंत प्रतिक्रिया दे इसे बड़ी जीत बताया था। पाकिस्तानी राजनेताओं के अलावा वहां के क्रिकेटर भी इसमें पीछे नहीं रहे हैं। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने कहा था कि, तालिबान इस बार पॉजिटिव माइंडसेट के साथ आया है। वह महिलाओं को काम करने दे रहा है और क्रिकेट का बड़ा समर्थक है।

गौरतलब है कि तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिका ने खुद के द्वारा तय की गई तारीख 31 अगस्त से 24 घंटे पहले ही अफगानिस्तान छोड़ दिया था। अगले दिन 31 अगस्त को तो उसने आधिकारिक रूप से तालिबान के साथ चली आ रही अपनी दो दशक लम्बी लड़ाई के अंत की घोषणा कर दी थी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, newschakraindia.com के Editor in Chief,  सामाजिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के  जानकार और मनोविश्लेषक भी हैं)

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