December 14, 2025

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68 साल बाद एयर इंडिया की ‘घर वापसी’, टाटा ने जीती बोली

एनसीआई@नई दिल्ली

एयर इंडिया अब टाटा ग्रुप की हो गई है। टाटा ग्रुप ने स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह से ज्यादा की बोली लगाई थी। यानी करीब 68 साल बाद एयर इंडिया की घर वापसी हो गई है।

टाटा संस ने घाटे में चल रही सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया के लिए बोली जीत ली है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अब टाटा ग्रुप एयर इंडिया का नया मालिक होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रियों के एक पैनल ने एयरलाइन के अधिग्रहण के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। आने वाले दिनों में इसकी आधिकारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से हुई थी शुरुआत

टाटा के साथ सरकार का सौदा पक्का होने से विमानन कम्पनी की 67 साल बाद ‘घर वापसी’ होगी। टाटा समूह ने ही अक्तूबर 1932 में टाटा एयर लाइंस के नाम से एयर इंडिया की शुरुआत की थी। वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद एक राष्ट्रीय एयर लाइंस की जरूरत महसूस हुई। ऐसे में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद 1953 में भारत सरकार ने एयर कॉर्पोरेशन एक्ट पास किया और फिर टाटा समूह से इस कम्पनी में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली।

कम्पनी पर 60074 करोड़ रुपए काम कर्ज

31 मार्च 2019 तक कपनी पर 60074 करोड़ रुपए का कर्ज था। मार्च 2021 को समाप्त तिमाही में कम्पनी के 9500 से 10000 करोड़ रुपए के घाटे में रहने की आशंका है। एयर इंडिया खरीदने वाली कम्पनी को 23,286.5 करोड़ रुपए ही चुकाने होंगे। शेष कर्ज को विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए एयर इंडिया एसेट होल्डिंग्स लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि बाकी का कर्ज खुद सरकार उठाएगी।

मौजूदा समय में एयर इंडिया 4400 घरेलू उड़ानें
डील के तहत एयर इंडिया का मुम्बई में स्थित हेड ऑफिस और दिल्ली का एयरलाइंस हाउस भी शामिल है। मुम्बई के ऑफिस का बाजार मूल्य 1,500 करोड़ रुपए से ज्यादा है। मौजूदा समय में एयर इंडिया 4400 घरेलू उड़ानें और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है।

रिजर्व प्राइस से करीब 3,000 करोड़ रुपए ज्यादा है टाटा की बोली

इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप की बोली सरकार द्वारा तय किए गए रिजर्व प्राइस से करीब 3,000 करोड़ रुपए ज्यादा है। टाटा की बोली स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह द्वारा लगाई गई बोली से लगभग 5,000 करोड़ रुपए अधिक है। आगे रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारी सूत्रों ने उन रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है, जिसमें रिजर्व प्राइस को 15,000-20,000 करोड़ रुपए बताया गया है।

2020 में शुरू हुई थी एयर इंडिया को बेचने की प्रक्रिया

एयर इंडिया को बेचने की प्रक्रिया जनवरी 2020 में ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसमें लगातार देरी हुई। अप्रेल 2021 में सरकार ने एक बार फिर योग्य कम्पनियों से बोली लगाने को कहा। 15 सितम्बर बोली लगाने का आखिरी दिन था। साल 2020 में भी टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के अधिग्रहण को लेकर रुचि पत्र दिया था। सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओएल) के नियमों में ढील दी थी, जिसके बाद कर्ज में डूबे एयर इंडिया को खरीदने में कुछ कम्पनियों ने रुचि दिखाई। नए नियमों के तहत ही कर्ज के प्रावधानों में नरमी बरती गई, ताकि स्वामित्व वाली कम्पनी को पूरा कर्ज न वहन करना पड़े।

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