गहलोत सरकार को आई समझ, अपना यह विवादित बिल वापस लेने का किया फैसला
एनसीआई@जयपुर
अशोक गहलोत सरकार ने अपने विवादास्पद विवाह संशोधन बिल 2021 को वापस ले लिया है। अगर यह विधेयक लागू हो जाता तो राज्य में बाल विवाह को मान्यता मिलने के साथ ही इसे बढ़ावा मिलना भी तय था। सभी सामाजिक संगठनों के साथ विपक्षी दल भी गहलोत सरकार की इस मुद्दे पर तगड़ी आलोचना कर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान विधानसभा में गत माह सितम्बर में यह बिल पारित कराया गया था तो भारी हंगामा हुआ था। विपक्षी दल बीजेपी ने इसे बाल विवाह को मान्यता देने का प्रयास बताया था। इन आलोचनाओं के बीच राजस्थान सरकार ने मैरिज बिल ( Rajasthan Marriages Amendment Bill 2021) को राज्यपाल के पास से वापस लेने का फैसला किया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद ये कानून का रूप ले लेता।
बिल में हैं ये प्रावधान
बिल में कहा गया है कि राजस्थान में सभी तरह के विवाह को पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। बाल विवाह के मामले में लड़का-लड़की के माता-पिता या अभिभावक को इसे रजिस्टर कराना पड़ेगा। बाल और महिला अधिकारों से जुड़े तमाम संगठनों ने इस विधेयक की आलोचना की थी। उनका कहना था कि इससे तो बाल विवाह को प्रोत्साहन मिलेगा। एक एनजीओ ने इस विधेयक को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती भी दे दी थी। दरअसल, राजस्थान का रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज एमेंडमेंट बिल 2021 सभी तरह की शादियों को रजिस्टर कराना अनिवार्य बना रहा है। फिर चाहे लड़के की उम्र 21 और लड़की की उम्र 18 साल से कम ही क्यों न हो। सामाजिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी बिल के औचित्य को लेकर गम्भीर सवाल खड़े किए थे।
इन तमाम आलोचनाओं के बीच इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे (International Girl Child day) के मौके पर राजस्थान सरकार ने यह विवादास्पद विधेयक वापस लेने का ऐलान किया। राजस्थान के सभी जिलों में बाल विवाह अभी भी बड़ी सामाजिक चुनौती बना हुआ है। हालांकि साक्षरता बढ़ने और सरकारी प्रयासों की वजह से इस पर काफी हद तक रोक लग चुकी है।
मंत्री ने यह दिया था तर्क
इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद सभी तरह की शादियों को 30 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया था। हालांकि विधानसभा में राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 का बचाव करते हुए मंत्री शांति धारीवाल ने कहा था कि कानून विवाह के पंजीकरण की अनुमति देता है, लेकिन ऐसी शादियां अंततः वैध हो जाएंगी, ऐसा कहीं नहीं लिखा है। अगर बाल विवाह हुआ है तो डीएम और अन्य अफसर ऐसे परिवारों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे।
