कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्र कैद की सजा
एनसीआई@नई दिल्ली
एनआईए की विशेष अदालत के जज प्रवीण सिंह ने आज बुधवार शाम दुर्दांत कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में कठोर सश्रम उम्र कैद की सजा सुनाई है। इसके तहत उसे आखरी सांस तक जेल में रहना होगा। इसके अलावा मलिक पर 10 लाख 65 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। मगर इस फैसले से यासीन मलिक की गोलियों का शिकार हुए चार निहत्थे एयर फोर्स अफसरों के परिवारों सहित अन्य पीड़ितों के परिवारों को भी संतुष्टि नहीं मिली है। सभी की मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इन्हें आशा की कि उसे फांसी दी जाएगी। एनआईए ने भी अदालत से ऐसी गुहार लगाई थी। यहां यह बात साफ करना जरूरी है कि अदालतों में यासीन मलिक पर अन्य मामले अलग से चल रहे हैं।
जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF Chief Yasin Malik) के प्रमुख मलिक ने टेरर फंडिंग केस (Terror Funding Case) के एक मामले में सभी आरोप स्वीकार कर लिए थे, जिनमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आरोप भी शामिल हैं। इस बीच केस की जांच कर रही एनआईए ने यासीन मलिक को सजा-ए-मौत यानी फांसी की मांग की। दिल्ली की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने इस मामले में 19 मई को यासीन को दोषी करार दिया था।
श्रीनगर के कुछ हिस्सों में बंद रहे बाजार
टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराए गए अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सजा पर अदालत का फैसला आने से पहले श्रीनगर के कुछ हिस्से बुधवार को बंद रहे। अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक की कुछ दुकानों सहित मैसूमा और आसपास के इलाकों में ज्यादातर दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। अधिकारियों ने बताया कि पुराने शहर के कुछ इलाकों में भी दुकानें बंद रहीं, लेकिन सार्वजनिक परिवहन सामान्य रहा। उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था की किसी भी प्रकार की समस्या से बचने के लिए शहर में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
श्रीनगर में यासीन मलिक के घर के बाहर उसके समर्थकों में कुछ देर पथराव भी किया। इस पर बाद में प्रशासन ने काबू पा लिया। उसके समर्थकों का कहना था कि यासीन मलिक ने बाद में हथियार छोड़कर गांधीवादी तरीका अपना लिया था, इसलिए उसकी सजा में नरमी की जाए।
जांच एजेंसी ने की थी फांसी की मांग
अदालत में दोपहर को हुई सजा पर बहस के दौरान केस की जांच कर रही एनआईए ने टेरर फंडिंग और यूएपीए से जुड़े इस मामले में यासीन मलिक को फांसी की सजा देने की मांग की। कोर्ट में बचाव और अभियोजन पक्ष की ओर से सजा पर बहस हुई। यासीन के वकील फरहान का कहना है कि, कोर्ट रूम में यासीन ने कहा है कि वह सजा पर कोई बात नहीं करेगा और कोर्ट दिल खोलकर सजा दे सकती है। जब एनआईए की ओर से यासीन को फांसी की सजा देने की मांग की गई तो वह करीब 10 मिनट तक शांत रहा। यासीन ने साथ ही अदालत से कहा कि जब भी उससे सरेंडर के लिए कहा गया उसने आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट को जैसा ठीक लगे उसके लिए वह तैयार है।
यासीन मलिक को दोषी करार देते ही तिलमिलाया पाकिस्तान
टेरर फंडिंग केस में अलगाववादी नेता यासीन मलिक को एनआईए की विशेष अदालत ने 19 मई को दोषी करार दिया गया था। 25 मई को उसकी सज़ा पर बहस होना तय किया गया था। इससे पाकिस्तान इस कदर तिलमिला गया था कि उसने भारतीय दूतावास प्रभारी को विदेश मंत्रालय में तलब कर आपत्ति सम्बन्धी एक दस्तावेज (डिमार्शे) सौंपा था। इसमें कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के खिलाफ ‘मनगढ़ंत आरोप’ लगाए जाने की बात कहते हुए इसकी कड़ी निंदा की गई थी। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि ‘भारतीय दूतावास को पाकिस्तान की गम्भीर चिंता से अवगत कराया गया कि भारत सरकार ने कश्मीरी नेतृत्व की आवाज़ को दबाने के लिए उन्हें (मलिक को) फर्जी मामलों में फंसाया है।’ इसमें कहा गया कि भारतीय पक्ष को 2019 से ‘अमानवीय परिस्थितियों’ में तिहाड़ जेल में मलिक के बंद होने पर पाकिस्तान की चिंता से भी अवगत कराया गया।
वहीं पाकिस्तानी क्रिकेटर रहे व अब ने शाहिद अफरीदी से लेकर पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित तक ने इस पर बेहद आपत्तिजनक बयान दिए।
भारत का यह रहा पक्ष
विदेश मंत्रालय ने कहा पाकिस्तान ने भारत सरकार से मलिक को सभी ‘निराधार’ आरोपों से बरी करने और जेल से तत्काल रिहा करने का मांग की, ताकि वह अपने परिवार से मिल सकें तथा अपने स्वास्थ्य में सुधार कर सामान्य जीवन जी सकें।
मलिक ने स्वीकार कर लिए थे सारे आरोप
यहां उल्लेखनीय है कि यासीन मलिक ने हाल ही में, 2017 में कश्मीर घाटी में अशांति पैदा करने वाले आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों से सम्बन्धित एक मामले में दिल्ली की एक अदालत के समक्ष, कड़े गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और विभिन्न धाराओं के तहत लगाए गए सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया था।
भारत ने पाकिस्तान से बार-बार कहा है कि जम्मू और कश्मीर ‘हमेशा से ही भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा।’ भारत पाकिस्तान को वास्तविकता को स्वीकार करने और भारत विरोधी दुष्प्रचार को रोकने की भी सलाह देता रहा है।
