योगी ने रखा राम मंदिर के गर्भ गृह का पहला पत्थर, बोले- यह राष्ट्र मंदिर होगा
एनसीआई@अयोध्या
अयोध्या में चल रहे राम मंदिर निर्माण के लिए आज बुधवार का दिन ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गर्भ गृह की आधारशिला रखी। इसके साथ ही राम मंदिर के लिए कई सालों से तराशे जा रहे पत्थरों का इस्तेमाल शुरू हो गया।
गर्भ गृह की आधारशिला रखने का ऐसे चला घटनाक्रम-
10:19 AM: अयोध्या राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा, अधिरचना पर काम आज से शुरू हो रहा है। हमारे पास कार्यों को पूरा करने के लिए 3-चरण की समय सीमा है। 2023 तक गर्भगृह, 2024 तक मंदिर निर्माण और 2025 तक मंदिर परिसर में मुख्य निर्माण होगा।
10:16 AM: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, पिछले 500 साल से देश के साधु-संत राम मंदिर आंदोलन को चला रहे थे, आज उन सभी लोगों के दिल को खुशी मिली होगी। गर्भगृह का पहला पत्थर रख दिया है, गोरक्षनाथ पीठ की तीन पीढ़ी इस मंदिर आंदोलन से जुड़ी हुई थी।
10:12 AM: गर्भगृह का पहला पत्थर रखने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज से शिलाओं के रखने का काम तेजी से शुरू हो जाएगा। अब वो दिन दूर नहीं है जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या धाम में बनकर तैयार हो जाएगा, यह मंदिर भारत का राष्ट्र मंदिर होगा।
10:05 AM: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गर्भगृह का पहला पत्थर रखा। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर के आर्किटेक्ट के अलावा कारीगरों को सम्मानित किया।
9:40 AM: हनुमानगढ़ी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मंदिर निर्माण स्थल पहुंचे। मंत्रोच्चार के बीच गर्भगृह की आधारशिला रखी।
9:32 AM: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हनुमानगढ़ी पहुंचे। वह हनुमानजी के दर्शन पूजन किए। इसके बाद वह श्रीराम जन्मभूमि के लिए रवाना हुए।
9:30 AM: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे। वह यहां से सीधे हनुमानगढ़ी के लिए रवाना हुए।
द्रविड़ शैली में बन रहा है राम मंदिर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शुभ मूहर्त में मंदिर के गर्भगृह की आधारशिला रखने के बाद लम्बे समय से तराशे जा रहे पत्थरों का उपयोग शुरू हो गया। इसके लिए राजस्थान और अयोध्या में कई नयी वर्कशाप में पत्थरों पर नक्काशी का कार्य तेजी से चल रहा है। राजस्थान के साथ पहली बार इसके लिए यूपी के कारीगरों को भी इस कार्य में लगाया गया है।
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि कार्यशाला में पत्थर तराशने का कार्य 1992 से चल रहा है। अभी तक मंदिर निर्माण के लिए पिलर्स पर नक्काशी का कार्य लगभग पूरा हो गया है। छत के पत्थरों को तराशने का कार्य भी काफी हद तक हो चुका है। अब पिलर्स को आपस में जोड़ने के लिए बीम के पत्थरों पर नक्काशी का कार्य राम कारसेवक पुरम में शुरू हो गया है।
इस स्थान पर पहली बार पत्थर तराशने के लिए अस्थाई कार्यशाला का निर्माण किया गया है। इसमें अभी 15 कारीगर काम कर रहे हैं, लेकिन शीघ्र ही इनकी संख्या 50 होने वाली है। ऐसी ही 3 कार्यशाला राजस्थान में भी स्थापित की गई हैं, जहां से पत्थरों को तराशने के बाद अयोध्या लाया जा रहा है।
इससे पहले राम मंदिर के लिए जितने पत्थरों की आवश्यकता थी, उसका 70 फीसदी पत्थर तराश लिए गए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर के पुराने मॉडल में विस्तार किया गया। इसके बाद तराशे गए पत्थरों की आवश्यकता बढ़ गई, जिनकी पूर्ति के लिए तेजी से कार्य चल रहा है। राम मंदिर निर्माण में सीमेंट और सरिया आदि का प्रयोग नहीं होगा।
