इस्तीफे से पहले सीएम उद्धव ठाकरे ने छोड़ा सरकारी आवास ‘वर्षा’, निजी आवास ‘मातोश्री’ में हुए शिफ्ट
एनसीआई@मुम्बई
महाराष्ट्र में मचे राजनीतिक घमासान के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ को खाली कर अपने निजी आवास मातोश्री में शिफ्ट कर लिया। इस दौरान रास्ते में खड़े हुए हजारों समर्थकों ने उनका भावभीना अभिनंदन किया। समर्थक उद्धव के समर्थन में नारेबाजी करते दिखाई दिए। साथ ही ये बड़े भावुक भी नजर आ रहे थे। अब उनके आवास मातोश्री के बाहर देर रात तक भी उनके समर्थक बड़ी संख्या में जमा थे।
#WATCH महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुंबई में वर्षा बंगला छोड़ा। pic.twitter.com/Wi9FkXNNTm
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 22, 2022
खुद उद्धव ने बुधवार को फेसबुक लाइव में इस बात की घोषणा की थी कि अगर उनकी पार्टी का एक भी विधायक उनके खिलाफ है तो वे सीएम पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि वे मुख्यमंत्री का सरकारी आवास ‘वर्षा’ भी खाली करने को तैयार हैं। जानकारी है कि अब उद्धव मातोश्री से ही सीएम का कामकामज करेंगे। पहले यह काम वे वर्षा से करते थे। हालांकि उन्होंने अभी सीएम पद से इस्तीफा नहीं दिया है।
इससे पहले ठाकरे ने बुधवार को एक वर्चुअल सम्बोधन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विद्रोह करने वाले बागी विधायकों को सुलह का प्रस्ताव दिया था। राज्य के राजनीतिक संकट को नया मोड़ देते हुए उन्होंने कहा था कि यदि कोई शिव सैनिक उनकी जगह लेता है तो उन्हें खुशी होगी।
शिवसेना के बागी नेता मंत्री एकनाथ शिंदे के विद्रोह के कारण सरकार पर आए संकट पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि अगर बागी विधायक यह घोषणा करते हैं कि वह उन्हें (ठाकरे) मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते तो वह अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।
ठाकरे ने कहा, “सूरत और अन्य जगहों से बयान क्यों दे रहे हैं? मेरे सामने आकर मुझसे कह दें कि मैं मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष के पदों को सम्भालने में सक्षम नहीं हूं। मैं तत्काल इस्तीफा दे दूंगा। मैं अपना इस्तीफा तैयार रखूंगा और आप आकर उसे राजभवन ले जा सकते हैं।” उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर किसी शिवसैनिक को अपना उत्तराधिकारी देखकर उन्हें खुशी होगी।
ठाकरे ने नवंबर 2019 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के सुझाव पर अपनी अनुभवहीनता के बावजूद मुख्यमंत्री का पद संभाला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राकांपा के कई दशकों तक शिवसेना के राजनीतिक विरोधी होने के बावजूद महा गठबंधन अस्तित्व में आया।
