बेटी को बहन बताकर लड़ा शिक्षक सहकारी समिति का चुनाव, फर्जीवाड़ा कर अध्यक्ष बनीं संध्या राठौड़
सभा संचालक प्रकाश जायसवाल ने लगाए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गम्भीर आरोप
एनसीआई@कोटा
शिक्षक नेता और कर्मचारी सहकारी सभा 696 आर के संचालक प्रकाश जायसवाल, कमल कुमार शर्मा, शिवराज गोचर व अनंत गंगवाल ने आज बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभा की अध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री पर अनियमितताओं के गम्भीर आरोप लगाए।
सभा संचालक प्रकाश जायसवाल के अनुसार अध्यक्ष संध्या राठौड़ और पूर्व मंत्री ईश्वर सिंह का संवैधानिक रूप से निर्वाचन ही अवैध है। उन्होंने कहा कि सहकारिता कानून के तहत 1995 के बाद तीसरी संतान होने पर चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, लेकिन अध्यक्ष संध्या राठौड़ ने संतानों सम्बन्धी तथ्य छुपाकर चुनाव लड़ा। पहली संतान प्राची सिंह है, जिसका जन्म 15 जुलाई 1995 को हुआ। दूसरी सन्तान पूर्वा सिंह है, जिसका जन्म 13 सितम्बर 1996 को हुआ। वहीं तीसरी संतान अभिनव सिंह है, जिसका जन्म 21 फरवरी 2001 को हुआ। जायसवाल ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष संध्या राठौड़ और उनके पति पूर्व मंत्री ईश्वर सिंह ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी बेटी को साली बना लिया। संध्या राठौड़ ने बेटी पूर्वा सिंह को अपनी संतान की जगह अपनी बहिन के रूप में उल्लेखित किया है।
प्रकाश जायसवाल, कमल कुमार शर्मा, शिवराज गोचर, अनंत गंगवाल ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष के द्वारा सदस्यों को दिए गए लाभांश में 7 प्रतिशत का नुकसान पहुंचाया है। प्रति सदस्य की गणना करें तो औसतन 4200 रुपए का नुकसान हुआ है। ऐसे में 10 हजार सदस्यों को 4 करोड़ 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ है।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि 2018-19 में केवल
86,917 रुपए का लाभ दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में लाभ तो 3 करोड़ 9 लाख 76 हजार 917 रुपए का हुआ है। यह आंकड़ों की हेराफेरी से सम्भव हुआ। प्रकाश जायसवाल ने बताया कि 70वीं आम सभा 30 सितम्बर 2018 को नागदा में सम्पन्न हुई थी। इसके बाद कोई आमसभा ही नहीं हुई। इसके बावजूद भी अध्यक्ष संद्यआ राठौड़ ने तथ्य छिपाकर तथाकथित रूप से 31 अक्टूबर 2021 को वर्चुअल 76वीं आमसभा होना बता दिया, जबकि वास्तव में वर्चुअल आमसभा सम्पन्न ही नहीं हुई। इन्होंने अपने पति ईश्वर सिंह के सहयोग से 1 दिन पूर्व एक कमरे में रिकॉर्डिंग कर उसे दूसरे दिन आमसभा के रूप में लाइव टेलीकास्ट साबित कर दिया।
सहकारिता शिक्षक नेताओं ने आगे आरोप लगाया कि सपा में नियमानुसार अधिकतम 4 संचालकों का मनोनयन किया जा सकता है। इसमें भी यह शर्त है कि वे बैंकिंग, सहकारिता या वित्त क्षेत्र की विशेषज्ञता रखते हों। लेकिन, अध्यक्ष संध्या रआटऔडं ने चुनाव हारे हुए 6 लोगों को फर्जीवाड़ा कर संचालक मनोनीत कर दिया।
54 लाख भवन मरम्मत पर खर्च दिखाया
प्रकाश जायसवाल ने आरोप लगाया कि विगत 5 वर्षों में 54 लाख 2 हजार 553 रुपए का व्यय बिना किसी उचित स्वीकृति के भवन मरम्मत एवं रखरखाव के नाम पर कर दिया गया, जबकि भवन संस्था का नहीं है। इतनी राशि में तो संस्था का स्वयं का भवन निर्मित हो जाता। उन्होंने कहा कि सहकारी सभा की सदस्यता के पात्रताधारी लगभग 2000 अधिकारी-कर्मचारी पौने 4 वर्षों से सदस्यता से वंचित हैं। यह अध्यक्ष की तानाशाही प्रवृत्ति के कारण ही संस्था से नहीं जुड़ पा रहे हैं। वित्तीय नियमों की अनदेखी कर वेलफेयर के नाम पर विगत 5 वर्षों में 57 लाख 82 हज़ार 527 रुपए का भुगतान किया गया है, यह संस्था नियम के विरुद्ध है।
क्या है सहकारी सभा 696?
सहकारी सभा 696 शिक्षा विभाग में कार्यरत अधिकारी- कर्मचारियों की संस्था है। जिसकी क्रियाशील पूंजी लगभग 90 करोड़ है। कोटा एवं बारां जिले में इनकी सदस्य संख्या लगभग 10 हजार है।
