‘मुफ्त की रेवड़ियों’ से कर्ज में डूबा राजस्थान, RBI की रिपोर्ट ने खोली पोल, जानेंं सबकुछ
एनसीआई@नई दिल्ली
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट ने राजस्थान के आर्थिक प्रबंधन को पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में आमदनी और खर्च का प्रबंधन ठीक नहीं है। राज्य कर्ज के भारी बोझ से दबा हुआ है।
देश के अन्य राज्यों की तरह राजस्थान भी कर्ज से डूबा हुआ है। प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा सरकार चुनावी जीत पक्की करने के लिए लोकलुभान घोषणाएं करने में पीछे नहीं रहीं। रिजर्व बैंक की हाल की वार्षिक रिपोर्ट में राजस्थान सरकार के आर्थिक प्रबंधन की पोल खुल कर रह गई है। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार, केरल, पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य कर्ज के भारी बोझ से दबे हैं। कर्ज के अलावा इन राज्यों का आमदनी और खर्च का प्रबंधन भी ठीक नहीं है। यानी ये राज्य ऐसी जगहों पर खर्च नहीं कर रहे हैं। जहां से आमदनी के स्रोत पैदा हों। यही वजह है कि इन राज्यों में भविष्य में कर्ज की स्थिति और भयावह हो सकती है। यही नहीं इन राज्यों का वित्तीय घाटा भी चिंताएं बढ़ा रहा है। आरबीआई ने इन राज्यों को जरूरत से ज्यादा सब्सिडी का बोझ घटाने की सलाह दी है।
कांग्रेस-भाजपा ने अपनाया रेवड़ी कल्चर
राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा की बारी-बारी सरकारें बनती रही हैं। दोनों ही दलों की सरकारे चुनावों से पहले लोकलुभावन घोषणाएं करती रही हैं। गहलोत सरकार ने सत्ता में आते ही सहकारी बैंकों के किसानों का किसान कर्जमाफी के नाम पर 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए। सीएम अशोक गहलोत ने बजट में 50 यूनिट तक फ्री बिजली का ऐलान किया। इससे राज्य के सरकारी खजाने पर करीब 6 हजार करोड़ का भार पड़ा है। गहलोत सरकार अब 1.33 करोड़ महिलाओं को फ्री मोबाइल बांटने जा रही है। बजट ढाई हजार करोड़ से बढ़ाकर 12,500 करोड़ रुपए करने की खबर है।
लोकलुभावन घोषणा करने में पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार भी पीछे नहीं रही है। वसुंधरा सरकार ने चुनावी साल में स्टेट टोल फ्री कर दिए थे। इससे 300 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व का नुकसान हुआ। वसुंधरा सरकार ने सहकारी बैंकों के कर्जदार किसानों के लिए 50 हजार रुपए तक की कर्जमाफी का ऐलान किया था। राज्य में बिजली कम्पनियों के घाटे से वित्तीय स्थिति चरमरा गई है। लेकिन बिजली महंगी करने से दोनों ही दलों की सरकारें बचती रही हैं, क्योंकि बिजली सीधे वोटर जुड़ी है।
राजस्थान की हालत कर्ज के मामले में सबसे ज्यादा खस्ता
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की हालत कर्ज के मामले में सबसे ज्यादा खस्ता है। क्योंकि यहां चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के मुकाबले कुल कर्ज बढ़कर 40 फीसदी के पार पहुंचने का अनुमान है। महामारी के समय राज्य का कुल कर्ज 16 फीसदी बढ़ गया, जबकि विकास दर महज 1 फीसदी रही। इस तरह से 200 फीसदी तक लोन में इजाफा हो गया, जबकि आमदनी महज छह फीसदी तक ही बढ़ सकी है।
आरबीआई ने इस राज्य के कर्ज में 2026-27 तक कोई सुधार नहीं आने की बात कही है। इस साल राज्य की विकास दर 11.6 फीसदी और कुल जीडीपी 13.3 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। अशोक गहलोत सरकार के अब तक के कार्यकाल में रिकॉर्ड एक लाख 91 हजार करोड़ का कर्ज लिया है, जिसमें गारंटी वाला लोन शामिल नहीं है। अब तक की सरकारों ने जितना कर्ज लिया, उसका 30 प्रतिशत से ज्यादा कर्ज गहलोत सरकार ने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में लिया है। राज्य पर कुल कर्ज 4 लाख 77 हजार करोड़ से ज्यादा हो चुका है। राज्य के प्रत्येक नागरिक पर साल 2019 में ₹38,782 का कर्ज था, जो आज करीब 71 हजार रुपए का कर्ज हो चुका है, क्योंकि इसमें 82 हज़ार करोड़ रुपए का गारंटेड लोन भी शामिल है।
