गगनचुम्बी ट्विन टावर चंद सेकंड में हो गए धराशायी
एनसीआई@नई दिल्ली/नोएडा
नोएडा के सेक्टर 93 ए में स्थित ट्विन टावर्स अब इतिहास बन गए हैं। धमाके के साथ दोनों इमारतों को गिरा दिया गया है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ करीब 12 साल तक चले लम्बे संघर्ष में जीत का वह पल आ गया, जिसका सैकड़ों फ्लेट खरीदार लम्बे समय से इंतजार कर रहे थे। बटन दबाते ही इमारत में लगाए गए विस्फोटकों में धमाका हुआ और ये टावर ‘पानी के झरने’ की तरह नीचे गिरे तो धूल का गुबार आसमान तक छा गया।

टावर्स को 15 सेकंड से भी कम समय में ‘वाटरफॉल इम्प्लोजन’ तकनीक से ढहा दिया गया। फिलहाल कहीं से किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। धूल का गुबार हटने के बाद ही आसपास की इमारतों की जांच होगी और यह देखा जाएगा कि क्या कहीं नुकसान भी हुआ है। इन इमारतों को पहले ही खाली करा लिया गया था। आसपास की सड़कें भी पूरी तरह बंद थीं। लॉकडाउन के बाद पहली बार इस तरह का सन्नाटा इलाके में देखा गया। नोएडा एक्सप्रेस-वे पर भी यातायात रोक दिया गया था।
बड़ी चुनौती बाकी
ट्विन टावर को गिराए जाने के बाद एक चरण का ही काम पूरा हुआ है। इमारतों को गिराए जाने से करीब 80 हजार टन मलबा निकलेगा, जिन्हें साफ करने में कम से कम 3 महीने का समय लगेगा। पूरे इलाके में धूल की एक मोटी परत जम गई है, जिसे युद्धस्तर पर साफ किया जाना है।

इन नियमों की अनदेखी की वजह से गिराए गए टावर
1. नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों की अनदेखी कर टावर को मंजूरी मिली थी।
2. दोनों टावर के बीच की दूरी 16 की बजाय सिर्फ 9 मीटर रखी गई।
3. टावर वहां बनें जहां ग्रीन पार्क, चिल्ड्रन पार्क और कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स बनने थे। इससे घरों में धूप आनी बंद हो गई थी।
ये हैं खास बातें
ये ट्विन टावर सुपर टेक बिल्डर के द्वारा बनाए गए थे। ये क्रमशः 30 और 32 मंजिला थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें गिराने का आदेश दिया था। ये बटन दबाते ही 9-12 सेकंड के अंदर मलबे में तब्दील हो गए।
भ्रष्टाचार की ये इमारतें नोएडा के सेक्टर 93ए में बनाई गईं थीं। इन्हें गिराने के लिए 3700 किलोग्राम बारूद का इस्तेमाल किया गया। सुपरटेक ट्विन टावर्स को गिराने में करीब 17.55 करोड रुपए खर्च आने का अनुमान है। टावर्स को गिराने का यह खर्च भी बिल्डर कम्पनी सुपरटेक ही वहन करेगी। इन दोनों टावरों में 950 फ्लेट्स बने थे। इन्हें बनाने में सुपरटेक ने करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए थे।
