राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने आखिरकार पद से दे दिया इस्तीफा
एनसीआई@नई दिल्ली
मल्लिकार्जुन खड़गे के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के साथ ही राजस्थान के प्रभारी महासचिव अजय माकन ने इस्तीफा दे दिया है। माकन के साथ ही कांग्रेस के सभी सीडब्ल्यूसी सदस्यों, महासचिव, प्रभारियों ने भी इस्तीफे सौंप दिए हैं। अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे नए सिरे से इन पदों पर नियुक्तियां करेंगे। यहां यह भी गौरतलब है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा दिसम्बर माह के प्रथम सप्ताह में हाड़ोती से राजस्थान में प्रवेश करने वाली है। इससे ठीक पूर्व अजय माकन के दिए इस इस्तीफे को दबाव की राजनीति भी माना जा रहा है।
राजस्थान से सीडब्ल्यूसी के सदस्य रघुवीर मीणा, पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी, गुजरात प्रभारी रघु शर्मा, प्रभारी महासचिव भंवर जितेन्द्र सिंह ने भी कांग्रेस अध्यक्ष को अपने इस्तीफे दे दिए हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। राजस्थान के प्रभारी महासचिव अजय माकन का इस्तीफा इसी वजह से हुआ है। इन सभी नेताओं ने अध्यक्ष के प्रोटोकॉल में इस्तीफे दिए हैं। अब नए सिरे से राज्यों के प्रभारियों की नियुक्ति होगी। माकन के इस्तीफे के बाद अब राजस्थान के नए प्रभारी के नामों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राजस्थान के नए प्रभारी को लेकर बढ़ी उत्सुकता
कांग्रेस के राजस्थान के प्रभारी महासचिव अजय माकन के इस्तीफे के बाद अब राजस्थान के प्रभारी महासचिव को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता है। कांग्रेस अध्यक्ष अब किसी न्यूट्रल माने जाने वाले नेता को राजस्थान का प्रभारी बना सकते हैं। नए प्रभारी के लिए कुमारी शैलजा, अम्बिका सोनी, संजय निरुपम और दीपेन्द्र सिंह हुड्डा के नामों की चर्चा है। शैलजा पहले भी राजस्थान की प्रभारी रह चुकी हैं। उन्हें राजस्थान के लिए न्यूट्रल नेता माना जाता है, हालांकि वे अशोक गहलोत की करीबी नेता मानी जाती हैं। संजय निरुपम संगठन चुनाव में राजस्थान के प्रदेश रिटर्निंग ऑफिसर रह चुके हैं। वही दीपेन्द्र हुड्डा युवा हैं। उन्हें प्रियंका गांधी का करीबी माना जाता है। दीपेन्द्र हुड्डा पायलट के भी नजदीकी हैं।
सचिन पायलट से सुलह के बाद बने थे प्रभारी
अजय माकन को अगस्त 2020 में अविनाश पांडे की जगह राजस्थान का प्रभारी नियुक्त किया गया था। अविनाश पांडे को पायलट की शिकायत के बाद राजस्थान से हटाया गया था। पांडे पर गहलोत खेमे का पक्ष लेने के आरोप लगे थे। सचिन पायलट खेमे की बगावत के बाद हुई सुलह में पायलट समर्थकों ने यह मुद्दा उठाया था। पायलट खेमे से सुलह के सप्ताह भर बाद ही अविनाश पांडे को प्रभारी पद से हटाकर अजय माकन को राजस्थान का नया प्रभारी बनाया गया था।
गहलोत समर्थक नेताओं ने माकन पर लगाए थे आरोप
राजस्थान में पिछले दिनों हुए सियासी घटनाक्रम के बाद अजय माकन पर अशोक गहलोत समर्थक नेताओं ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनवाने के लिए विधायकों को तैयार करने के आरोप लगाए थे। नए सीएम का फैसला हाईकमान पर छोड़ने का प्रस्ताव पारित करने के लिए 25 सितम्बर को बुलाई गई विधायक दल की बैठक का गहलोत समर्थक विधायकों ने बहिष्कार कर दिया था। गहलोत समर्थक विधायकों ने मंत्री शांति धारीवाल के घर विधायक दल की बैठक के समानांतर बैठक कर बगावत कर दी थी। इस दौरान अजय माकन पर पक्षपात करने के आरोप लगे थे। धारीवाल ने भी प्रेस कांफ्रेंस करके अजय माकन पर पक्षपात करने के आरोप लगाए थे। धारीवाल ने कहा था कि अजय माकन ने विधायकों को पायलट का नाम सीएम के लिए लेने के लिए कन्वींस किया है। इस बात के उनके पास सबूत हैं। इसके बाद अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे ने राजस्थान के सियासी घटनाक्रम की लिखित रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंपी थी। जिसके बाद गहलोत सरकार के तीन मंत्रियों को अनुशासनहीनता के नोटिस जारी किए गए थे।
राजस्थान के नए प्रभारी के सामने होगी यह चुनौती
राजस्थान में नए प्रभारी के सामने गहलोत और पायलट खेमे के बीच तालमेल बैठाना चुनौती भरा होगा। नए प्रभारी को दोनों नेताओं और उनके समर्थकों के साथ तालमेल बैठाकर काम करना होगा। नए प्रभारी के लिए यह अपने आप पर चुनौतीपूर्ण होगा। इसके साथ ही बूथ से लेकर ब्लॉक जिला लेवल तक के खाली पड़े संगठन के पदों को जल्दी से जल्दी भरना भी नए प्रभारी की जिम्मेदारी होगी।
