बूंदी, तालेड़ा और कापरेन के डाटा एंट्री ऑपरेटर्स, डाटा मैनेजर्स व एलएचवी का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
एनसीआई@बूंदी
निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार आज बुधवार को जिला स्तर पर पीसीटीएस एवं HMIS सॉफ्टवेयर के बारे में ब्लॉक तालेड़ा, ब्लॉक कापरेन व ब्लॉक बूंदी के समस्त डाटा एंट्री ऑपरेटर, एलएचवी और डाटा मैनेजर्स का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सत्यवान शर्मा, जिला सांख्यिकी अधिकारी,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वर्तमान में सूचनाओं का प्रवाह तीव्र गति से हो रहा है। सूचनाओं का प्रवाह सिस्टमेटिक हो, फॉर्मेट के अकॉर्डिंग हो तथा जिस रूप में सूचना राज्य सरकार, जिला स्तरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधियों /सूचना के अधिकार के तहत अथवा किसी भी विभागीय दायित्व के तहत मांगी जाती है, उसी रूप में वह सूचना प्रस्तुत की जानी चाहिए।

शर्मा ने आगे बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में जो सेवाएं आम व्यक्तियों को दी जा रही हैं, उन सबकी रिपोर्टिंग ऑनलाइन किया जाना तय किया गया है। अतः समस्त सूचनाएं निर्धारित प्रपत्र में भरकर डाटा एंट्री ऑपरेटर के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जानी चाहिएं, ताकि उच्च स्तरीय अधिकारी राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रकार की योजनाओं की मॉनिटरिंग कर निर्णय ले सकें। जहां सूचनाओं की गम्भीरता को नहीं समझा जाता, वहां निर्णय लेने में बड़ी दुविधा होती है। इसलिए गुणवत्ता पूर्वक सूचना संकलन, वर्गीकरण तथा रिपोर्टिंग के साथ मॉनिटरिंग और मूल्यांकन भी आवश्यक है। ऑनलाइन सूचनाएं फीडिंग करते समय समस्त बिंदुओं का पूर्ण रूप से अक्षरश पालना की जाए, क्योंकि एक बार यदि डाटा सिस्टम में अपलोड कर दिया गया तो वह पूरी दुनिया में नजर आएगा। ऐसे में यदि वह डाटा गलत होता है तो इससे विभाग की छवि पर असर पड़ता है।
इस अवसर पर जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीसी मीणा व ब्लॉक सीएमओ कापरेन जितेन्द्र सेहरा ने बताया कि समस्त कार्यक्रम आजकल ऑनलाइन पोर्टल बेस्ड हो गए हैं। डाटा फीडिंग रिपोर्टिंग दिए गए समय कार्यक्रम के अनुसार होनी चाहिए, पहले और ना बाद में। जिस समय विशेष पर उसकी जरूरत है, उसी समय पर वह रिपोर्ट दी जानी चाहिए, ताकि सरकार नीतिगत निर्णय ले सके और आमजन के कल्याण की योजनाएं बना सकें।
जिला डाटा अधिकारी देवेन्द्र सिंह ने बताया कि पीसीटीएस पोर्टल पर हो रही रिपोर्टिंग को जिले सहित राज्य के समस्त अधिकारी पूरी निगरानी रख रहे हैं। डाटा को गुणवत्ता पूर्वक 15 से 16 साल से चल रहा PCTS पोर्टल तथा इसमें काफी सारे रिपोर्टिंग फॉर्मेट जुड़ते जा रही हैं और आगे भी जुड़ते रहेंगे। सभी रिपोर्टिंग करने वाले व्यक्तियों को अद्यतन तथा डाटा का वर्गीकरण और मूल्यांकन करके ही फीड करना सर्वोत्तम विधि है।
