‘हिन्दू धर्म पर स्पष्ट हमला…’, उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया बताने वाले बयान को मद्रास हाईकोर्ट ने बताया हेट स्पीच
तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि स्टालिन के द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द जनसंहार और सांस्कृतिक विनाश का संकेत देते हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टालिन के इस बयान पर सवाल उठाना हेट स्पीच नहीं है। इससे साफ है कि स्टालिन के बयान की आलोचना की जा सकती है।
एनसीआई@नई दिल्ली
तमिलनाडु के युवा कल्याण और खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयान पर चल रही सियासी और कानूनी बहस के बीच मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा का अर्थ जनसंहार की ओर इशारा करता है और यह हेट स्पीच की श्रेणी में आती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी स्टालिन के तीन साल पुराने बयान को लेकर की है।
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उदयनिधि स्टालिन के बयान पर सवाल उठाए गए थे। आलोचकों ने मंत्री की टिप्पणी को सनातन धर्म का पालन करने वालों के खिलाफ ‘जनसंहार’ का आह्वान बताया था। हालांकि उदयनिधि स्टालिन ने इस व्याख्या को खारिज करते हुए कहा था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, “यदि यह कहा जाए कि सनातन धर्म का पालन करने वाले लोगों का अस्तित्व नहीं होना चाहिए, तो इसके लिए सही शब्द ‘जनसंहार’ है। यदि सनातन धर्म को एक धर्म माना जाए तो यह ‘रिलिजिसाइड’ यानी धर्म के विनाश की श्रेणी में आएगा।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा लोगों के उन्मूलन की ओर इशारा करती है, चाहे वह किसी भी तरीके से हो, जिसमें इकोसाइड, फेक्टोसाइड और कल्चरसाइड जैसे रूप शामिल हैं। कोर्ट ने तमिल भाषा में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘सनातन ओझिप्पु’ की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका स्पष्ट अर्थ सांस्कृतिक जनसंहार या संस्कृति के उन्मूलन से जुड़ा है। कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि, ऐसे में मंत्री के बयान पर सवाल उठाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट को हेट स्पीच नहीं माना जा सकता है।
इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गर्मा-गर्मी और बढ़ गई है, राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है। तमिलनाडु के विपक्षी दलों, विशेषकर बीजेपी ने कोर्ट की टिप्पणी को अपने आरोपों की पुष्टि बताया है, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) पार्टी की सरकार है, जिसके नेता एमके स्टालिन मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद यह सरकार बनाई थी। फिलहाल यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का केन्द्र बना हुआ है।
यह है पूरा मामला
साल 2023 में उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया से करते हुए कहा था कि इसे मिटा देना चाहिए। इस बयान का काफी विरोध हुआ। भाजपा आईटी विभाग के हेड अमित मालवीय ने स्टालिन के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह बयान देश के 80% सनातन धर्म मानने वालों के खिलाफ है। हालांकि स्टालिन की डीएमके पार्टी के एक नेता ने उल्टा मालवीय के खिलाफ केस कर दिया। आरोप लगाया कि मालवीय ने स्टालिन के बयान को तोड़-मरोड़ के पेश किया।
मालवीय ने एफआईआर के खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई। तीन साल बाद मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने अब एफआईआर को रद्द कर दिया है। जस्टिस एस. श्रीमथी ने कहा कि मालवीय ने स्टालिन के बयान पर केवल प्रतिक्रिया दी थी। ऐसी प्रतिक्रिया पर केस चलाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
