February 28, 2026

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का केस दर्ज होगा, प्रयागराज कोर्ट का आदेश, रामभद्राचार्य के शिष्य ने 2 पीड़ित बच्चे पेश किए थे

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का केस दर्ज होगा, प्रयागराज कोर्ट का आदेश, रामभद्राचार्य के शिष्य ने 2 पीड़ित बच्चे पेश किए थे

एनसीआई@प्रयागराज

प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष पांडे) ने कोर्ट में 2 बच्चों को पेश कर यह आरोप लगाए थे। इसके बाद केमरे के सामने कोर्ट में बच्चों के बयान दर्ज हुए थे।

स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के बाद अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। अदालत ने इस मामले में 13 फरवरी को आदेश रिजर्व रख लिया था।

मुकुंदानंद
मुकुंदानंद

इस मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है- हम दर-दर भटक रहे थे। पुलिस के पास जा रहे थे, मगर हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इसलिए न्याय के मंदिर में आए। आज लगा कि न्याय अभी जिंदा है। न्यायालय ने हमें आज न्याय दिया है। मैं अब साफ-साफ कहना चाहता हूं कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किया गया। इसकी पुष्टि न्यायालय ने कर दी है।

डिप्टी सीएम और अखिलेश यादव को चैलेंज

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा- अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम से कहना चाहता हूं कि मेरे साथ पैदल यात्रा में चलिए। विद्यामठ बनारस जा रहा हूं। जहां पर रंग रैलिया मनाते हैं। पंचम तल पर दिखाना चाहता हूं। जहां पर इनका शीश महल है। वहां पर इनकी सखियां रहती हैं। जिसका नाम भी पता है। आज से पैदल यात्रा मेरी चलेगी। हम न्याय के लिए दर-दर लोगों के बीच में जाएंगे। लोगों को ऐसे पद पर नहीं बैठना चाहिए। ये लोग जेल के अंदर होने चाहिए। इसलिए हम लोग आज से यात्रा शुरू कर रहे हैं।

13 फरवरी को कोर्ट में यह हुआ था-

आशुतोष महाराज बोले- मुझे धमकी दी जा रही, कोर्ट से रोते हुए बाहर निकले

13 फरवरी को जज विनोद कुमार चौरसिया ने मामले की सुनवाई की थी। शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामले की वकालत खुद की थी। उन्होंने जज से कहा- 2 शिष्यों ने मेरे पास आकर अपने साथ हुए यौन शोषण की कहानी सुनाई। शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके जांच करनी चाहिए। मुझे न्यायपालिका से ही इंसाफ की उम्मीद है।

इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने विरोध किया। उन्होंने कहा- ये सिर्फ आरोप हैं, हमें केस की तैयारी के लिए थोड़ा वक्त चाहिए।

जवाब में आशुतोष महाराज ने जज से कहा-मेरी कार को बम से उड़ा कर मुझे मारने की धमकी दी जा रही है। मेरी हत्या हो सकती है। आपको यौन शोषण का शिकार हुए बच्चों के बयान सुनने चाहिएं।

कोर्ट रूम खाली कराया गया, बच्चों के बयान सुने 

आशुतोष महाराज के जवाब के बाद जज ने पॉक्सो कोर्ट रूम को खाली कराने का आदेश दिया। कमरे में सिर्फ दोनों पक्षों के वकील ही बचे। इसके बाद बच्चों को कोर्ट रूम में लाया गया। बच्चों ने जज के सामने अपने साथ हुए शोषण की कहानी सुनाई। ये सारे बयान बंद कोर्ट रूम के अंदर हुए। इन बयानों को केमरे में रिकॉर्ड किया गया।

जज ने पूछा था- आप बच्चों के कौन हैं? 

स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष महाराज से कुछ सवाल भी पूछे। पूछा- आप इन पीड़ितों के क्या हैं? अभिभावक किन आधार पर बने? आशुतोष महाराज ने कहा था कि गुरु परम्परा के मुताबिक, मैं न्याय के लिए आया हूं। पीड़ितों को कहीं न्याय नहीं मिला, तो इन बच्चों ने मुझसे सम्पर्क किया।

इसके बाद जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शंकराचार्य के खिलाफ एफआईआर होगी या केस डिसमिस होगा, इसके लिए 21 फरवरी यानी आज की तारीख तय की थी।

कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया था। अविमुक्तेश्वरानंद ने इसके बाद कहा- हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। जबसे हमने गौ माता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा था।

माघ मेले में हुए विवाद के बाद आमने-सामने

चित्रकूट की श्री तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्यवादी और पक्षकार भी हैं। माघ मेले में हुए विवाद के बाद रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद आमने-सामने आ गए थे।
पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, फिर कोर्ट गए 24 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के 6 दिन बाद आशुतोष महाराज ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से अविमुक्तेश्वरानंद की दो शिकायतें की थीं।

• पहली शिकायत: आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी उठवाने जैसे काम कराए जाते हैं। बच्चों का यौन शोषण होने की भी आशंका है।

माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया। यह बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन है। शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। आय से अधिक सम्पत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए। मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कराई जाए।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह के मुख्य वादी, पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने पुलिस प्रशासन को भी लेटर लिखकर कार्रवाई की मांग की थी।

• दूसरी शिकायत: आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपेड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बता रहे है। वह ‘ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर’ के नाम से लेटरपेड और दस्तावेज बनवा कर अफसरों को पत्र भेज रहे।

ये लेटरपेड-पत्र फर्जी और भ्रामक हैं। इनसे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा। इन लेटरपेड पर 24 जनवरी, 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर ‘श्री शंकराचार्य शिविर’ के नाम से पत्र जारी किए गए, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए।

फर्जी केस है, फर्जी ही सिद्ध होगा

इस मामले पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा-‘फर्जी मुकदमा जो दायर किया गया है उसकी सच्चाई सामने आएगी। हम यही कहना चाहते हैं कि न्यायालय त्वरित गति से काम करे और जल्दी से जल्दी इसपर कार्रवाई करे। जो फर्जी केस बनाया है,वह तो फर्जी ही सिद्ध होना है।’

जो आरोप लगा रहा है वह खुद हिस्ट्रीशीटर

अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा-‘सनातन के ऊपर आरोप लगा कौन रहा है, जिस व्यक्ति ने आरोप लगाया है वह खुद हिस्ट्रीशीटर है… पता नहीं कितने लोगों पर फर्जी मुकदमे लगाकर उगाही करना ही उसका काम है। फिर वह रामभद्राचार्य का शिष्य बन जाता है और फिर हम पर आरोप लगाता है। आप देखिए यह आरोप कहां से आ रहा है, रामभद्रचार्य से और उनका बल कहां हैं, वह भी सबको पता है। गौ माता की जो हम आवाज़ उठा रहे हैं, उसे बंद करने के लिए सारे प्रयत्न हो रहे हैं, उसी में यह एक प्रयत्न है।

सनातन को अपने लोगों से ही खतरा

अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं- ‘बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो खुद भुक्तभोगी हैं और कहते हैं कि उन्होंने (आशुतोष महाराज ने) उनके ऊपर भी झूठा केस दर्ज किया गया। हमारे द्वारा जो आक्षेप लगाया गया है वो अपने आप को जगतगुरू कहने वाले व्यक्ति के चेले के द्वारा लगाया गया है। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है कि सनातन धर्म को किसी बाहरी व्यक्ति से खतरा नहीं है, बल्कि ये अंदर के ही लोग हैं जो हिन्दू धर्म को नष्ट करना चाहते हैं, शंकराचार्य नाम की संस्था को नष्ट करना चाहते हैं।’

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