April 12, 2026

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कोटा: बिना सहमति कैरी बैग के 14 रुपए कैसे काट लिए? मॉल के मैनेजर को कंज्यूमर कोर्ट ने नोटिस जारी किया

कोटा: बिना सहमति कैरी बैग के 14 रुपए कैसे काट लिए?  मॉल के  मैनेजर को कंज्यूमर कोर्ट ने नोटिस जारी किया

एनसीआई@कोटा

कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने झालावाड़ रोड के सिटी मॉल में स्थित रिलायंस स्मार्ट बाज़ार (रिलायंस जियो मार्ट) को मैनेजर के जरिए नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सामान खरीद के साथ बिना सहमति के कैरी बैग के 14 रुपए काट लेने के मामले में यह कार्यवाही की है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, कोटा में अनुराग गौतम एवं सरनाम सिंह की बेंच ने 12 मई तक जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

यह नोटिस एडवोकेट सुजीत स्वामी द्वारा दायर वाद पर विचार करते हुए जारी किया गया है, जिसमें प्रतिष्ठान पर उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार करने के गम्भीर आरोप लगाए गए हैं। स्वामी ने शिकायत में कहा है कि 9 फरवरी 2026 को उन्होंने सिटी मॉल स्थित रिलायंस स्मार्ट बाजार, कोटा से सूप के तीन पाउच, सिरका (कांच की बोतल) व मूंग दाल पापड़ के एक पैकेट की खरीद की। इनकी कुल कीमत 173 रुपए थी। जब वह इस सामान का बिल बनवाने काउंटर पर गए तो कुल कीमत के साथ बिना पूर्व सूचना और बिना उनकी सहमति के कैरी बैग के 14 रुपए भी बिल में जोड़ दिए। वहीं, बिलिंग के बाद काउंटर के नीचे से बैग निकाल कर उन्हें थमा दिया, जबकि थमाए गए कैरी बेग का कोई टैग, मूल्य या मानक विवरण उपलब्ध नहीं था। इसके अतिरिक्त, कैरी बैग की गुणवत्ता, कीमत, स्पेसिफिकेशन्स अथवा निर्माता की जानकारी भी कहीं प्रदर्शित नहीं की गई थी।

शिकायत में यह आरोप भी लगाया कि एंट्री गेट पर उनका निजी बैग, जिसमें उनके बहुमूल्य सामान थे, को जबरन बिना सुरक्षित लॉकर या टोकन सुविधा के जमा करवा लिया गया। इन्हें वापस लेने के लिए उन्हें अनावश्यक रूप से लम्बा चक्कर लगाना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया को सुजीत स्वामी ने ‘उपभोक्ता अधिकारों का हनन’ और ‘अनुचित व्यापारिक प्रथा (Unfair Trade Practice)’ बताया है।

सुजीत स्वामी ने 14 फरवरी को रिलायंस स्मार्ट बाजार को लीगल नोटिस दिया, लेकिन मार्ट ने विधिक नोटिस के जवाब में सभी आरोपों को नकारते हुए कैरी बैग के मूल्य एवं प्रक्रिया को उचित ठहराया। उसके बाद सुजीत स्वामी ने 11 मार्च 2026 को जिला उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया था। सुजीत स्वामी ने बताया कि, “आधुनिक रिटेल स्टोर्स में पारदर्शिता, उपभोक्ता अधिकारों और निष्पक्ष व्यापारिक प्रथाओं की कमी होती है। ग्राहक यह नहीं समझ पाते हैं, इसलिए उनसे इस तरह की वसूली की जाती है, जो गलत है।”

सुजीत ने उपभोक्ता आयोग से 14 रुपए की अवैध वसूली की वापसी के साथ वाद स्थापित करने में हुए व्यय, मानसिक संताप के लिए 1 लाख रुपए मुआवजा दिलवाने की मांग की है।

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