April 23, 2026

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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा राजस्थान, कोटा ने किया भगवान चित्रगुप्त जी का सामूहिक पूजन, प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप माथुर ने बताया इसका महत्व

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा राजस्थान, कोटा ने किया भगवान चित्रगुप्त जी का सामूहिक पूजन, प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप माथुर ने बताया इसका महत्व

एनसीआई@कोटा

यम द्वितीया के अवसर पर गुरुवार को अखिल भारतीय कायस्थ महासभा राजस्थान, कोटा की ओर से खेड़ली फाटक स्थित भगवान चित्रगुप्त जी के मंदिर में बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव से चित्रगुप्त जी का पूजन किया गया।

महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप माथुर ने बताया कि यम द्वितीया के इस पवित्र पर्व पर चित्रांश बंधुओं ने सामूहिक रूप से भगवान श्री चित्रगुप्त जी का पंचामृत से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर परिसर में भगवान चित्रगुप्त जी के जयकारे गूंजते रहे।

भगवान चित्रगुप्त जी का हुआ था प्राकट्य

कुलदीप माथुर ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ही भगवान चित्रगुप्त जी का प्राकट्य हुआ था। उन्हें ब्रह्मा जी के चित्त (मन) से उत्पन्न माना जाता है, इसी कारण उनका नाम चित्रगुप्त हुआ। कायस्थ जाति के लोग इन्हीं के वंशज हैं। इसीलिए कायस्थ समाज बंधु अपने आदिपुरुष एवं कुल देवता भगवान चित्रगुप्त की श्रद्धा से आराधना करता है।

माथुर ने बताया कि यम द्वितीया के दिन कायस्थ समाज के हर घर में भगवान चित्रगुप्त जी का पूजन होता है। इस दौरान सभी चित्रांश बंधु कलम-दवात की पूजा भी विशेष रूप से करते हैं।

यमराज के सहायक हैं भगवान चित्रगुप्त

भगवान चित्रगुप्त जी को मृत्यु के देवता यमराज के सचिव और सहायक के रूप में जाना जाता है। उनका कार्य पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्रत्येक जीव के शुभ और अशुभ कर्मों का लेखा-जोखा रखना है। मृत्यु के उपरांत व्यक्ति के कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नरक में स्थान तय करने का कार्य चित्रगुप्त जी के द्वारा ही किया जाता है। इसी कारण यम द्वितीया के दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। यह पूजा ज्ञान, बुद्धि और लेखन कार्य में सफलता के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है

कलम-दवात और बही खातों का पूजन भी

चित्रगुप्त भगवान के पूजन में कलम-दवात, नई नोटबुक और बही खातों का विशेष स्थान रहता है। इन्हें भगवान का प्रतीक मानकर श्रद्धापूर्वक पूजन किया जाता है। व्यापारी, विद्यार्थी और लेखन कार्य से जुड़े लोग इस दिन विशेष रूप से आराधना करते हैं, ताकि विद्या और बुद्धि की वृद्धि हो तथा व्यवसाय में उन्नति प्राप्त हो। भगवान चित्रगुप्त की आराधना करने से मन का भय दूर होता है और जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि का वास होता है। यह पूजा छात्रों, विद्वानों, व्यापारियों और लेखकों के लिए अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती है।

ये भी रहे आयोजन में मौजूद

यम द्वितीया के दिन भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा से ज्ञान, बुद्धि और लेखन में सफलता के साथ जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। महासभा के जिला अध्यक्ष विनोद सक्सेना ने बताया कि इस पावन पर्व पर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप माथुर, प्रदेश संगठन सचिव नीरज कुलश्रेष्ठ, सत्यनारायण श्रीवास्तव (अध्यक्ष, नयापुरा कायस्थ सभा भवन), महामंत्री कमल कुलश्रेष्ठ, राहुल कुलश्रेष्ठ, जगदीश भटनागर, मयूर सक्सेना, हिमांशु भटनागर, पुनीत भटनागर, सीपी सक्सेना, सुशील श्रीवास्तव, पीके कुलश्रेष्ठ, विवेक माथुर, ईशान जौहरी, रामचंद्र माथुर आदि चित्रांश बंधु मौजूद रहे।

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