December 9, 2023

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बूंदी जिला अस्पताल : इलाज कराने आना भी सजा के समान

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बूंदी। जिला अस्पताल के हड्डी ओपीडी में जमा मरीज डॉक्टर के इंतजार में परेशान।

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. धनराज मधुर डेढ़ घंटे बाद भी बुलाने पर पहुंचे, तब तब ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज होते रहे परेशान, चार डॉक्टर में से एक का भी पता नहीं था, कई और खामियों की भरमार

एनसीआई@बूंदी

जिला अस्पताल के हड्डी ओपीडी में आज सुबह साढ़े नौ बजे तक कोई डॉक्टर नहीं होने से वहां मरीजों की भारी भीड़ लगी हुई थी। एक ओर भीषण गर्मी, उस पर शारीरिक परेशानी, उस पर भी डॉक्टर के ड्यूटी ऑवर्स में भी गायब रहने से मरीजों की हालत खराब थी। भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष माधव प्रसाद विजयवर्गीय ने जिला चिकित्सालय के यह हालात बताए। वह खुद वहां अपनी बेटी के पैर में दर्द होने से उसका इलाज करवाने गए थे। अस्पताल खुलने का समय सुबह 8 बजे है।

विजयवर्गीय के अनुसार इस पर उन्होंने वहां एक नर्सिंगकर्मी से डॉक्टर के इतनी देर बाद भी नहीं आने का कारण पूछा तो उसका कहना था कि, होने को तो 4 डॉक्टर हैं, मगर पता नहीं अभी कौन ड्यूटी पर है। बड़ी बात यह भी है कि सूचना बोर्ड पर भी ड्यूटी डॉक्टर के नाम की जानकारी चस्पा नहीं थी। ना ही यह सूचना थी कि कौनसे डॉक्टर छुट्टी पर हैं।
इस पर परेशान मरीज डिप्टी कंट्रोलर डॉ. खेमराज बसेठा के पास गए, परेशानी सुनकर उन्होंने तुरंत डॉक्टर को फोन किया। तब जाकर डॉ. धनराज मधुर वहां आए। यह अलग बात‌ है कि डॉ. धनराज के इतनी देर ड्यूटी से गायब रहने का कारण और इसके चलते उनके खिलाफ क्या कार्यवाही होगी, इसका पता नहीं चला। माधव प्रसाद विजयवर्गीय‌ का कहना है कि कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार समय पर चिकित्सक को अपने ड्यूटी रूम में रहना चाहिए था। इस अव्यवस्था की जानकारी से आरएमआरएस की आगामी बैठक में बूंदी विधायक व जिला कलक्टर को अवगत कराया जाएगा। उनका कहना था कि इसके पहले सम्पूर्ण व्यवस्था जिला अस्पताल प्रशासन को रोज सवेरे निरीक्षण करके करनी चाहिए। भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ जिला अस्पताल की यह अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं करेगा। सूचना पट्ट पर रोज चिकित्सकों की ड्यूटी व छुट्टी से सम्बन्धित आवश्यक जानकारिया चप्पा होनी चाहिएं। डॉक्टर के ड्यूटी रूम पर भी यह सूचना चिपकी होनी चाहिए। इसके अभाव में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इनमें दूरदराज से आने वाले मरीजों को तो खासी परेशानी होती है। विजयवर्गीय ने चेतावनी दी कि अगर 3 दिन में यह व्यवस्था नहीं सुधरी तो मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री को इसकी शिकायत की जाएगी।

ये मरीज कर रहे थे एक-डेढ़ घंटे से इंतजार

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व जिलाध्यक्ष विजयवर्गीय के अनुसार हड्डी ओपीडी आउटडोर में ये मरीज एक-डेढ़ घंटे से डॉक्टर का इंतजार करते हुए परेशान हो रहे थे-

-अंकुश सैनी ( 27), निवासी बालचंद पाड़ा 8.30 बजे वहां आ गए थे। उनके पैर में दर्द था।

-अशोक राठौर (30), निवासी तेलीपाड़ा, सवा आठ बजे ही अस्पताल आ गए थे। इनकी कमर और हाथ में दर्द था। साढ़े नौ बजे तक भी डॉक्टर के नहीं आने से हताश अशोक का कहना था कि अब तो डॉक्टर के घर जाकर ही दिखाना पड़ेगा। इसकी एक परेशानी यह भी थी कि वह अपने काम से छुट्टी लेकर आया था, यह नुकसान अलग हुआ।

-लाडबाई, निवासी नगर पालिका की गली, 9 बजे से डॉक्टर का इंतजार कर रही थी।

– मोहित कुमार, (32), निवासी नागदी बाजार भी अपने काम की छुट्टी कर के साढ़े आठ बजे से डॉक्टर की राय देख रहा था। उसने भी निराश होकर कहा कि, अब तो डॉक्टर के घर ही जाना पड़ेगा।
इनकी अलावा और भी कई मरीज यहां जिला चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं पर आंसू बहा रहे थे।

सोनोग्राफी सेंटर पर भी बुरा हाल

जिला अस्पताल के सोनोग्राफी सेंटर पर करीब 200 मरीजों की भीड़ थी। लाइन में खड़े हुए भी ये लोग इतने नजदीक सटे हुए, बेतरतीब से खड़े हुए थे कि कोरोना गाइड लाइन की पूरी तरह धज्जियां उड़ती नजर आ रही थी। वेटिंग इतनी अधिक है कि आम मरीजों का 5-7 दिन में, वहीं गर्भवती महिलाएं जिनकी हाथों-हाथ सोनोग्राफी होनी चाहिए, उनका भी दो-तीन दिन में नम्बर आ रहा है। यहां रोज केवल मात्र 50-60 सोनोग्राफी होती हैं। इनमें अस्पताल में भर्ती मरीज, गम्भीर मरीज व गर्भवती महिलाएं शामिल होती हैं। ऐसे में अधिकतर मरीजों को 500 से 800 रुपए देकर निजी सोनोग्राफी सेंटर्स से सोनोग्राफी करवानी पड़ती है, जबकि अस्पताल में यह पूरी तरह नि:शुल्क है।

महिला गार्ड व्यवस्था संभालने की बजाय दे रही थी तारीख

इस सोनोग्राफी सेंटर पर ऐसे बुरे हालातों के बीच एक और बड़ी बदइंतजामी देखने को मिली। महिला गार्ड मरीजों की भीड़ को लाइन में व्यवस्थित खड़े करने की जिम्मेदारी निभाने की बजाए कमरे के बाहर कुर्सी पर बैठ कर खुद सोनोग्राफी के कागज लेकर, मरीजों को उनके नम्बर की तारीख दे रही थी। जबकि यह जिम्मेदारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी या नर्सिंग स्टाफ की होती है। महिला गार्ड के अन्य काम में व्यस्त होने के कारण ही यहां से कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं।

भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व जिलाध्यक्ष माधव प्रसाद विजयवर्गीय का आरोप है कि सोनोग्राफी में 2 डॉक्टर होने के बावजूद 50-60 सोनोग्राफी ही होती हैं, जबकि सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक पूरे समय लगातार सोनोग्राफी हो तो इनकी संख्या 100 तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार मगर वहां एक-डेढ़ घंटे पहले ही सोनोग्राफी का काम रोक‌ दिया जाता है।

विजयवर्गीय का कहना है कि इन सब खामियों की जानकारी देने के लिए प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभाकर विजय से फोन पर सम्पर्क करने की कोशिश की, मगर‌ वह जिला‌ प्रभारी मंत्री परसादी लाल मीणा की बैठक में मौजूद थे। इस पर डिप्टी कंट्रोलर डॉ. खेमराज बसेठा को अवगत कराने के साथ उनसे शीघ्र व्यवस्थाएं सुधारने की मांग भी की।

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