August 2, 2021

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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आईं एक साथ 4 अच्छी खबरें

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एनसीआई@सेन्ट्रल डेस्क
कोरोना ने मार्च से भारत में पांव पसारना शुरू किया था। इस स्थिति को काबू में करने के लिए मार्च के आखिरी हफ्ते में लॉक डाउन लागू किया गया। इससे देशभर में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। कई उद्योग तो अभी तक पूरी तरह से बंद हैं, लेकिन इस बीच मोदी सरकार के लिए कई अच्छी खबरें आई हैं।
दरअसल, कोरोना संकट की वजह से भारत में सबसे ज्यादा अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन आजतक चैनल के अनुसार अक्टूबर महीने के पहले दिन ही इकोनॉमी से जुड़ी हुई एक के बाद एक राहत देने वाली चार खबरें आई हैं।
बिजली खपत में बढ़ोतरी
बिजली की खपत में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिलते हैं। सितम्बर महीने में बिजली की खपत में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश की कुल बिजली खपत सितम्बर में 5.6 फीसदी बढ़कर 113.54 अरब यूनिट्स रही। इसके पहले लगातार 6 महीने तक बिजली की कुल खपत में गिरावट दर्ज की गई थी।
औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी
बिजली की खपत में बढ़ोतरी होने का मतलब यह है कि कोरोना महामारी के बीच अब औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी लौट आई है। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल सितम्बर में 107.51 अरब यूनिट बिजली की खपत हुई थी। बिजली खपत में अप्रेल में 23.2 फीसदी, मई में 14.9 फीसदी, जून में 10.9 फीसदी, जुलाई में 3.7 फीसदी और अगस्त में 1.7 फीसदी गिरी थी।
जीएसटी कलेक्शन में तेज उछाल
जीएसटी कलेक्शन में तेज उछाल का मतलब है कि सरकार का खजाना धीरे-धीरे फिर से भरने लगा है। सितम्बर माह में जीएसटी कलेक्शन में शानदार इजाफा हुआ है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सितम्बर में माल और सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन 95,480 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल सितम्बर के मुकाबले 4 फीसदी अधिक है। सितम्बर-2019 में कुल जीएसटी कलेक्शन 91,916 करोड़ रुपए रहा था।
मौजूदा वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा जीएसटी कलेक्शन
इसके अलावा पिछले महीने यानी अगस्त के मुकाबले भी जीएसटी कलेक्शन बढ़ा है। अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 86,449 करोड़ रुपए रहा था। जुलाई में यह कलेक्शन 87,422 करोड़ रुपए दर्ज किया गया था। सितम्बर 2020 में नियमित निपटान के बाद केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा अर्जित कुल राजस्व, सीजीएसटी के लिए 39,001 करोड़ रुपए और एसजीएसटी के लिए 40,128 करोड़ रुपए है।
सितम्बर का मैन्युफेक्चरिंग PMI करीब 9 साल के उच्च स्तर पर
इसके अलावा कोरोना संकट के बीच सितम्बर में मैन्युफेक्चरिंग के मोर्चे से भी अच्छी खबर आई है। PMI के आंकड़ों के मुताबिक सितम्बर में मैन्युफेक्चरिंग गतिविधियां साढ़े आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। देश में मैन्युफेक्चरिंग (विनिर्माण क्षेत्र) की गतिविधियों में सितम्बर में लगातार दूसरे महीने सुधार हुआ है।
मैन्युफेक्चरिंग गतिविधियों में सुधार
आईएचएस मार्किट इंडिया का मैन्युफेक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) सितम्बर में बढ़कर 56.8 पर पहुंच गया। अगस्त में यह 52 पर था। पीएमआई 50 से ऊपर होने का मतलब यह है कि मैन्युफेक्चरिंग गतिविधियां बढ़ रही हैं और 50 से कम होने का मतलब यह है कि इसमें गिरावट है। जनवरी, 2012 के बाद यह पीएमआई का सबसे ऊंचा स्तर है।
बेरोजगारी दर में भी सुधार
रोजगार के मोर्चे पर भी सितम्बर में थोड़ी स्थिति सुधरी है, जिससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। सितम्बर के आखिरी हफ्ते तक राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर घटकर 6.7 फीसदी पर आ गई है। यह अगस्त महीने में 8.3 फीसदी दर्ज की गई थी, जबकि जुलाई में बेरोजगारी दर 7.4 फीसदी थी। इस लिहाज से सितंबर महीने के अंत में बेरोजगारी दर के 6.7 फीसदी पर आने को अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के मुताबिक 29 सितम्बर देश के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 8.5 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 5.8 फीसदी दर्ज की गई। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की स्थिति में सुधार हुआ है,  लेकिन अभी भी यह संकटपूर्ण स्थिति में है।

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