May 9, 2021

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200 आतंकियों से भिड़ने वाले शौर्य चक्र विजेता को घर में घुस गोली मारी, मौत

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एनसीआई@चंडीगढ़
पंजाब के तरनतारन में सिख आतंकवाद से डटकर लोहा लेने वाले और बहादुरी के लिए शौर्य पुरस्कार से सम्मानित बलविंदर सिंह भिखीविंड की अज्ञात हमलावारों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना राज्य के तरण तारण जिले की है। बलविंदर को उनके होम टाइम भिखीविंड में सुबह 7 बजे प्वांइट ब्लेक रेंज से गोली मारी गई। उन्हें पांच गोली मारी गई। यह स्थान तरण तारण शहर से 35 किलोमीटर दूर है, जहां 80 और 90 के दशक में आतंकवाद चरम पर था। उन्हें 1993 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। जब राज्य में सिख आतंकवाद चरम पर था, बलविंदर कई हमलों में बाल-बाल बच गए थे।
बलविंदर का घर भिखीविंड कस्बे में है। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे बाइक पर 2 लोगों ने बलविंदर का दरवाजा खटखटाया। बलविंदर ने गेट खोला तो एक हमलावर घर में ही बने ऑफिस में आ गया और बलविंदर पर फायर कर भाग गया। घटना के बाद उन्हें नजदीक के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधीक्षक जगजीत वालिया ने कहा कि हमलावर एक चार-पहिया वाहन में आए थे। बलविंदर रिवोल्यूशनरी मार्किस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (आरएमपीआई) के जिला समिति सदस्य थे। वह अपनी बहादुरी के लिए पूरी दुनिया में विख्यात थे और एक बार उन्हें नेशनल जियोग्राफिक डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाया गया था।
आधा घंटा देरी से पहुंची पुलिस
घटनास्थल से पुलिस थाना भिखीविंड 600 गज की दूरी पर है। इसके बावजूद पुलिस सूचना मिलने के करीब आधे घंटे बाद मौके पर पहुंची। मौके पर पहुंची थाना भीखीविंड की पुलिस और एसएसपी ध्रुमन एच निंबाले ने बलविंदर सिंह के शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच आरंभ कर दी है। जब एसएसपी घटनास्थल पर पहुंचे तो मृतक के पारिवारिक सदस्यों और साथियों ने पंजाब पुलिस के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते हुए मुर्दाबाद के नारे लगाए। बाद में मौके पर डीएसपी राजबीर सिंह भी पहुंचे।
पंजाब पुलिस ने वापस ले ली थी सुरक्षा
गांव के सरपंच राजेंद्र सिंह ने बताया कि बलविंदर सिंह पर पहले भी कई बार हमला हो चुका है। उनको पंजाब पुलिस की तरफ से जो सुरक्षा दी गई थी, वह वापस ले ली गई थी। आईजी सुरेंद्र सिंह परमार और पंजाब पुलिस के अधिकारियों को चिट्ठी भेजकर और व्यक्तिगत मुलाकात कर फिर से सुरक्षा देने की गुजारिश भी की गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कुछ समय पहले दो दिन के लिए बलविंदर को एक पुलिस कर्मचारी दिया गया था, जिसे बाद में वापस बुला लिया गया। सरपंच ने बलविंदर सिंह की मौत के लिए पंजाब पुलिस को जिम्मेदार बताया।
भाई ने कहा- इस हमले के पीछे आतंकी हो सकते हैं
बलविंदर के भाई रणजीत सिंह ने संदेह जताया है कि इस हमले के पीछे आतंकी हो सकते हैं। पुलिस अधिकारी अभी इस बारे में कुछ भी नहीं बता रहे हैं। पुलिस पर ढिलाई बरतने का भी आरोप है। परिवार के मुताबिक, हमले की जानकारी दिए जाने के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची, जबकि थाना घर के पास ही है।
सरकार ने एसआईटी को जांच सौंपी
वहीं मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस हत्या की सभी कोणों से जांच के लिए डीआइजी फिरोजपुर की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम (SIT) का गठन करने का आदेश दिया है। एसआईटी ने केस को सुलझाने और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार स्पेशल टीम गठित कर दी है। एसएसपी ध्रुमन एच निंबाले ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। घटना वाले क्षेत्र से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि दो हमलावारों में से एक घर में घुसता है और बलविंदर सिंह पर गोली चलाता है।
2017 में भी बलविंदर पर हमला हुआ था
बलविंदर के गांव के सरपंच राजेंद्र सिंह ने बताया कि बलविंदर को पंजाब पुलिस की तरफ से सिक्योरिटी दी गई थी, लेकिन बाद में हटा ली गई। इसके बाद आईजी सुरेंद्र सिंह परमार और पंजाब पुलिस के अधिकारियों को चिट्ठियां भेजकर और मुलाकात कर फिर से सिक्योरिटी देने की गुजारिश भी की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बलजिंदर ने सरकार के फैसले का विरोध किया था, क्योंकि उन पर पहले भी हमला हो चुका था। 2017 में अज्ञात हमलावरों ने उनके घर पर कई राउंड गोलियां चलाई थीं।
बलविंदर पर 42 बार हमले हुए थे
पंजाब में जब आतंकवाद चरम सीमा पर था, तो बलविंदर सिंह पर 42 बार हैंड ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर से हमले हुए थे। हर बार बलविंदर ने आतंकियों से लोहा लिया था। उन्होंने कई आतंकियों को तब मार गिराया था। इसके बाद बलविंदर को 1993 में राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। उनके साथ पत्नी जगदीप कौर, भाई रणजीत सिंह और भूपिंदर सिंह को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। बलविंदर के जीवन पर दूरदर्शन पर प्रसारित ‘पंजाब एक यात्रा’ व अन्य कई टेलीफिल्म भी बनी थी। वे अपने घर के पास ही एक स्कूल चलाते थे।
आतंकवाद के खिलाफ गांव को किया था प्रेरित
पंजाब में जब आतंकवाद अपने चरम पर था, तब उन्होंने पूरे राज्य में लोगों को इस संकट से बचाव के लिए प्रेरित किया था। संधू का गांव भिखीविंड पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का एक उदाहरण बना था और इसी गांव में शुक्रवार को उन्हें दो हमलावरों ने गोली मार दी। पुलिस ने फिलहाल ये नहीं बताया है कि मोटरसाइकिल पर आए ये हथियारबंद आरोपी कौन हो सकते हैं, क्या हमलावर खालिस्तानी आतंकवादियों से सम्बन्धित भी हो सकते हैं। इस मामले में हालांकि जांच जारी है।
बहादुरी के लिए शौर्य चक्र से हुए थे सम्मानित
बलविंदर सिंह की बहादुरी के चलते उनके चर्चे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी हुए और वो एक बार नेशनल जियोग्राफिक की डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाई दिए। उनके साहस के लिए उन्हें शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया गया था। शौर्य चक्र ऐसा भारतीय सैन्य सम्मान है, जो वीरता, साहसी कार्रवाई या आत्म-बलिदान के दिया जाता है। ये सम्मान नागरिकों को भी दिया जा सकता है।
बलविंदर सिंह भिखीविंड सिख युवाओं के धार्मिक कट्टरपंथीकरण के खिलाफ थे। उन्होंने खालिस्तानी आंदोलन और उसके साथ आए आतंकवाद का खुलकर विरोध किया था। जब पंजाब आतंकवाद के साये में था, तो बलविंदर और उनके परिवार ने अपने गांव को एक प्रकार का किला बना दिया था। उन्होंने पत्नी और बच्चों सहित परिवार के अन्य लोगों को हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया और आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने कई हमलों का सामना किया और हर बार आतंकवादियों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया।
11 महीनों में परिवार पर हुए 16 हमले
उनके इस साहस के लिए रक्षा मंत्रालय ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। एक आम नागरिक को शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाना आम घटना नहीं है। उन्हें मिले शौर्य चक्र के साइटेशन के मुताबिक, “बलविंदर सिंह संधू और उनके भाई रंजीत सिंह संधू आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ थे। वो आतंकियों की हिट लिस्ट में थे। 11 महीनों की अवधि में आतंकियों ने संधू के परिवार को खत्म करने के 16 प्रयास किए थे। आतंकियों ने 10 से 200 लोगों के समूह में जाकर संधू के परिवार पर हमले किए, लेकिन हर बार संधू बंधुओं ने उनकी बहादुर पत्नियों जगदीश कौर संधू और बलराज कौर संधू के साथ मिलकर आतंकियों को मार गिराया और उनके प्रयास नाकाम कर दिए।”
200 आतंकियों का किया था सामना
“संधू परिवार पर पहला हमला 31 जनवरी 1990 और आखिरी हमला 28 दिसम्बर 1991 को हुआ, लेकिन सबसे गम्भीर हमला 30 सितंबर 1990 के दिन हुआ। उस दिन करीब 200 आतंकियों ने संधू के घर को चारों तरफ से घेर लिया और लगातार पांच घंटे तक खतरनाक हथियारों, जिनमें रॉकेट लॉन्चर भी शामिल थे, से हमला किया‌। ये हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था और उनके घर तक पहुंचने वाले रास्ते में अंडरग्राउंड गन माइंस बिछा दी गई थीं, ताकि पुलिस बल भी मदद के लिए न पहुंच सके।”
“निडर संधू बंधुओं और उनकी पत्नियों ने सरकार द्वारा दी गई पिस्टल और स्टेन गन से उन आतंकियों का सामना किया। संधू परिवार की जवाबी फायरिंग के कारण आतंकवादियों को अपने पैर पीछे खींचने पड़े। इन सभी लोगों ने आतंकवादियों के हमले का सामना करने और उनके बार-बार किए गए जानलेवा प्रयासों को विफल करने के लिए एक उच्च क्रम के साहस और बहादुरी का प्रदर्शन किया है।”
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी केबीएस सिद्धू ने बलविंदर सिंह की मौत के बाद ट्वीट कर कहा, “वो एक बहादुर शख्स था। 1992 से 1994 के बीच अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर के तौर पर तैनाती के समय मैंने भिखिविंड गांव के उस अकेले शख्स को आतंकवाद के खिलाफ हथियार उठाते देथा था. वो बहुत निडर और बहादुर थे।”

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