March 5, 2021

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एंटी टैंक मिसाइल नाग अंतिम परीक्षण में भी खरी उतरी, अब शुरू होगा उत्पादन, शीघ्र ही सेना को मिलेगी

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अपने लक्ष्य टेंक की ओर दागी गई मिसाइल नाग।

एनसीआई@पोकरण/जैसलमेर
थार के रेगिस्तान में पोकरण स्थित देश की सबसे बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज गुरुवार सुबह एंटी टैंक मिसाइल नाग के धमाकों से गूंज उठी। इस प्रकार अपने इस अंतिम परीक्षण में भी यह मिसाइल एकदम खरी उतरी। इसके साथ ही कुछ वर्ष से जारी नाग के परीक्षणों का दौर खत्म हो गया। अब इसका निर्माण शुरू किया जाएगा ताकि, शीघ्र ही इसे सेना को सौंपा जा सके।
यह हैं खासियतें
जमीन से जमीन पर हमला करने में सक्षम यह मिसाइल 825 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दुश्मन के टैंक पर हमला कर उसे ध्वस्त करने में सक्षम है। चीन के साथ चल रहे तनाव के बीच इस मिसाइल का परीक्षण बहुत अहम माना जा रहा है। आज सुबह सेना व डीआरडीओ के उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में इसका अंतिम परीक्षण किया गया। इसमें यह मिसाइल अपने सभी मानकों पर खरी उतरी। नैमिका कैरियर से दागी गई नाग मिसाइल ने फायरिंग रेंज में रखे एक वास्तविक टैंक को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। परीक्षण के पश्चात विशेषज्ञों ने टैंक की जांच की। उन्होंने पाया कि नाग के प्रहार से टैंक पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो चुका था।
अब सेना को मिलेगी नाग मिसाइल
गत कुछ वर्ष से जारी परीक्षणों का दौर गुरुवार को पूरा हो गया। सभी मानकों पर खरी उतरने के बाद अब इसके उत्पादन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। नाग मिसाइल का निर्माण पब्लिक सेक्टर की कम्पनी ज भारत डॉयनामिक्स लिमिटेड करेगी। इसके लॉचर नैमिका का डिजाइन भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड ने किया है, लेकिन इसका निर्माण मेढक स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में किया जाएगा। कुछ माह के भीतर ही नाग मिसाइल की पहली खेप सेना को सौंप दी जाएगी।

अपने लक्ष्य टेंक की ओर बढ़ती मिसाइल नाग।

नाग मिसाइल सभी मौसम में दुश्मनों के टैंकों को न्यूनतम 500 मीटर और अधिकतम चार किलोमीटर की दूरी से भेदने की क्षमता के साथ विकसित की गई है। नाग प्रक्षेपास्त्र एक तीसरी पीढ़ी का भारत द्वारा स्वदेशीय निर्मित, टैंक भेदी प्रक्षेपास्त्र है। यह उन पांच (प्रक्षेपास्त्र) मिसाइल प्रणालियों में से एक है, जो भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत विकसित की गई है। इस प्रक्षेपास्त्र का विकास 300 करोड़ की लागत से किया गया है। इसे दागो और भूल जाओ टैंक रोधी प्रक्षेपास्त्र भी कहा जाता है, क्योंकि एक बार इसे दागे जाने के बाद निर्देशित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके हवा से जमीन पर मार करने वाला हैलीना वर्जन भी है। जिसे हेलिकॉप्टर से दागा जाता है।

मिसाइल नाग के अटेक से तबाह हुआ टेंक।


रफ्तार है इसकी खासियत
नाग मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 825 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज रफ्तार के साथ अपने लक्ष्य पर प्रहार करती है। 1.85 मीटर लम्बी 43 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल आठ किलोग्राम वार हैड(विस्फोटक) ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल जोधपुर में डीआरडीओ की तरफ से विकसित थर्मल टारगेट सिस्टम पर कार्य करती है। इसे कोई सैनिक भी दाग सकता है वहीं इसे दागने के लिए विशेष रूप से बनाए गए लॉचिंग सिस्टम नेमिका से भी दागा जा सकता है। दिन-रात व किसी भी प्रकार के मौसम में एकदम अचूक प्रहार करने में सक्षम है। पोकरण में इसका सभी तरह के मौसम में परीक्षण सफल रहे है।

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