May 11, 2021

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जयपुर: ज्वेलरी शोरूम में हुई एक करोड़ की लूट का खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार, जेलों में बंद बदमाशों ने रची थी साजिश

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जयपुर। पुलिस की गिरफ्त में लूट के चारों आरोपी।

एनसीआई@जयपुर
शहर के मुरलीपुरा इलाके में बैनाड़ रोड पर 17 अक्टूबर को नाड़ी का फाटक के पास श्री बालाजी ज्वेलर्स में पिस्तोल दिखाकर हुई करीब एक करोड़ रुपए की ज्वेलरी लूट की वारदात का आज खुलासा हो गया। पुलिस ने गैंग के सरगना सहित चार बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। इस वारदात की साजिश उदयपुर और हरियाणा की जेलों में बंद कैदियों ने रची थी।
डीसीपी (पश्चिम) प्रदीप मोहन शर्मा ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने दिलीप शर्मा उर्फ माही उर्फ किट्‌टू (28) मूल निवासी सुजानगढ़, चूरू, हाल निवासी काशी नगर बैनाड़ रोड जयपुर, सुमित कुमार उर्फ संदीप यदुवंशी (23) निवासी रेवाड़ी हरियाणा, दीपक कुमार शर्मा उर्फ मोनू (28) निवासी झज्जर हरियाणा व नदबई, भरतपुर निवासी विनोद कुमावत (25) हाल निवासी रिद्धी सिद्धी नगर गोपालपुरा बाईपास जयपुर को गिरफ्तार किया गया है। इनमें पुलिस ने दिलीप उर्फ माही को शिमला (हिमाचल प्रदेश) में पकड़ा। वहीं अन्य बदमाश दिल्ली व हरियाणा से दबोचे गए। लूट की वारदात में शामिल नकाबपोश लुटेरे एक स्कूटी से ज्वेलरी शोरूम तक आए थे। यह पूरी घटना शोरूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी।
डीसीपी प्रदीप मोहन शर्मा के अनुसार पुलिस की गिरफ्त में आए दिलीप स्वामी उर्फ माही की मुलाकात कुछ साल पहले यूपी के रहने वाले कुख्यात बदमाश मुकिम उर्फ काला और सादर खान से हुई थी। तब दिलीप स्वामी एक लड़की से दुष्कर्म के मामले में जेल में था। दिलीप स्वामी मानसरोवर में ही डांस क्लास चलाता है। साथ ही,डांडिया इवेंट भी करवाता है। पड़ताल में सामने आया कि जेल में इन तीनों की दोस्ती हुई थी। लेकिन दिलीप उर्फ माही जमानत पर बाहर आ गया। वहीं, मुकीम उर्फ काला को उदयपुर जेल में भेज दिया गया था, जबकि सादर खान फिलहाल हरियाणा में जेल में बंद है।
जांच में सामने आया कि उदयपुर जेल में बंद मुकिम उर्फ काला ने दिलीप उर्फ माही को जेल से फोन कर कहा कि कोई बड़ा काम करें, ताकि मोटी रकम मिल सके। इसके लिए उसने मदद के लिए हथियार और गुर्गे भेज देने की बात कही।। इसके बाद दिलीप उर्फ माही ने दो- तीन महीने पहले से रैकी करना शुरू कर दिया था। वह बैनाड़ रोड़ पर रह चुका था। ऐसे में मुकिम ने अपनी गैंग के दो बदमाश रमन और पंकज को दिलीप उर्फ माही के पास भेजा। उन्हें वारदात के लिए हथियार हरियाणा की जेल में बंद यूपी के हार्डकोर बदमाश सादर खान (28) की मदद से उपलब्ध करवा दिए गए थे।
वारदात के लिए दोस्त से स्कूटी मंगवाई
एडिशनल डीसीपी बजरंग सिंह शेखावत ने बताया कि दिलीप उर्फ माही की गोपालपुरा बाईपास पर रहने वाले विनोद प्रजापत से स्कूल के समय से दोस्ती थी। उसने विनोद से बहाना कर स्कूटी मांगी। तब विनोद प्रजापत ने अपनी गर्लफ्रेंड को जरूरत बताकर उसकी स्कूटी ले ली। इसके बाद दिलीप उर्फ माही के साथ मुकीम खान के गुर्गे रमन और पंकज स्कूटी लेकर वारदात करने 17 अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे श्री बालाजी ज्वेलर्स पहुंचे। वहां शोरूम मालिक, उसके पुत्र व नौकर को रिवॉल्वर दिखाकर करीब एक करोड़ रुपए की ज्वेलरी लूटी। फिर शोरूम संचालक दिनेश सोनी की ही स्कॉर्पियो लेकर भाग निकले। वारदात के बाद स्कूटी, लूटे गए मोबाइल फोन व स्कॉर्पियो को वीकेआई इलाके में फेंक गए।
लूट के गहने लेकर हरियाणा पहुंचे
वारदात के बाद दिलीप उर्फ माही, रमन और पंकज दूसरी गाड़ी का इंतेजाम कर लूटे गए गहनों को लेकर हरियाणा पहुंचे। वहां जेल में बंद सादर खान की मदद से फरारी काटी। वहीं दिलीप उर्फ माही शिमला भाग गया। उधर, एसीपी झोटवाड़ा हरिशंकर शर्मा के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने पड़ताल शुरू की। तब लूट की वारदात में प्रयुक्त स्कूटी के नम्बरों के आधार पर पुलिस युवती तक पहुंच गई। उसने बताया कि उसने स्कूटी अपने दोस्त विनोद प्रजापत को दी थी। तब पुलिस ने सबसे पहले विनोद प्रजापत को जयपुर से पकड़ा। उसने अपने साथी दिलीप उर्फ माही को स्कूटी उपलब्ध करवाने की बात कही। तब पुलिस ने तकनीकी आधार पर पीछा कर दिलीप उर्फ माही को शिमला में धर-दबोचा। उससे पूछताछ में सामने आया कि लूटे गए गहने उन्होंने हरियाणा में संदीप उर्फ सुमित यदुवंशी और उसके साले दीपक शर्मा उर्फ मोनू को दे दिए थे। उन्होंने इनमें से अधिकतर गहनों को गला दिया था। इस पर पुलिस ने दोनों आरोपी जीजा साले को भी धरदबोचा। उन्हें हरियाणा से पकड़कर जयपुर ले आई।
इस टीम ने खोली वारदात
इस वारदात का खुलासा एडिशनल डीसीपी बजरंग सिंह शेखावत के सुपरविजन में गठित झोटवाड़ा एसीपी हरिशंकर शर्मा, मुरलीपुरा थाना प्रभारी रामावतार ताखर, डीएसटी प्रभारी इंस्पेक्टर देवेन्द्र जाखड़ आदि पुलिसकर्मियों की टीम ने किया। इसमें सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार, हेडकांस्टेबल देवीलाल गरवा, कांस्टेबल प्रकाश, कांस्टेबल अजेन्द्र सिंह, तकनीकी शाखा के प्रभारी हेड कांस्टेबल लक्ष्मीकांत व मुकेश कुमार की अहम भूमिका रही।

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