February 27, 2021

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राजस्थान: रावण दहन और मेले निरस्त, लाखों लोगों पर ऐसे हुआ असर

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एनसीआई@जयपुर/कोटा
कोरोना की मार इस बार विजयदशमी पर होने वाले रावण दहन व दशहरे के मेलों पर भी पड़ी है। राज्यभर में ऐसे सभी बड़े आयोजन इस बार नहीं होंगे। इससे आमजन में जहां भारी निराशा है तो पुतले बनाने वाले कारीगरों के अलावा इस अवसर पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार पाने वाले राज्य के हजारों-लाखों लोग भी हताश हैं।
राज्य की राजधानी जयपुर सहित जोधपुर, कोटा, बून्दी, बारां, झालावाड़, बीकानेर व अन्य शहरों में भी विजयादशमी पर बड़े स्तर पर होने वाले परम्परागत आयोजन नहीं होंगे। इनमें रावण व उसके कुनबे के पुतलों का दहन के अलावा इस मौके पर भरने वाले छोटे-बड़े मेले भी शामिल हैं। इनमें कोटा का दशहरा मेला तो अपनी भव्यता के अलावा 15-20 दिन (दीपावली तक) चलने के कारण देशभर में अपनी अलग पहचान रखता है। इसमें देशभर के विभिन्न व्यापारी, खेल-तमाशे वाले, झूले वाले, खाने-पीने की सामग्री के व्यवसायीे आदि दुकान पाने को तरसते हैं।
हर दिन होते हैं रंगारंग कार्यक्रम
कोटा दशहरा मेला ग्राउंड के भव्य रंगमंचों पर रोज विभिन्न रंगारंग कार्यक्रम भी होते हैं। इनमें स्थानीय, हाड़ोती व राजस्थानी कलाकारों के अलावा राष्ट्रीय स्तर तक के कार्यक्रम शामिल रहते हैं। नामी फिल्मी कलाकार व गायक-गायिकाओं से लेकर कवियों, शायरों, कव्वालों आदि को मंच मिलता है। इस मेले के कारण ऑटो रिक्शा, मिनी बस जैसे लोकल परिवहन के साधनों के संचालकों की भी भारी आमदनी होती है। मेले के अंदर व इसके आसपास फुटपाथ पर बैठकर भी बड़ी संख्या में फुटकर व्यापारी अपने सामान बेचते हैं।
व्यापारियों को साल भर रहता है कोटा मेले का इंतजार
कुल मिलाकर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से इस मेले से ही तकरीबन एक लाख लोगों को हर साल रोजगार मिलता है। कई लोग तो अपनी सालभर की पूरी कमाई का बड़ा हिस्सा ही इस मेले से निकाल लेते हैं। ऐसे व्यापारियों को पूरे साल कोटा के राष्ट्रीय दशहरा मेले का इंतजार रहता है। मगर इस बार दशहरे का आयोजन नहीं होने से राजस्थान में ही लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर ग्रहण लग गया है। इनमें आतिशबाजी निर्माता, कारीगर व विक्रेता भी शामिल हैं।
रावण के पुतलों का कद घटा तो कमाई भी मारी गई
जयपुर। राजधानी में भी इस बार विजयदशमी पर रामलीला मंचों और दशहरा विकास समितियों की ओर से मेले और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे। इस प्रकार जयपुर में इस बार सात दशक बाद रावण दहन कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे। कोरोना संक्रमण के चलते बड़े आयोजन नहीं होने से रावण के पुतलों का कद भी छोटा हो गया है। सामान्य समय में रामलीला समितियों के आयोजन में सबसे बड़ा रावण का पुतला दहन करने की होड़ रहती है, वह इस बार नहीं है।
पुतलों के आकार में भी यह हुआ बदलाव
पुतला बनाने वाले कारीगरों ने भी रावण के छोटे पुतले अधिक बनाए हैं। अबकी बार एक फीट से लेकर दस फीट तक के पुतले ही निर्मित किए गए हैं। इनकी कीमत भी 100 रुपए से लेकर 2500 रुपए तक ही है। पिछले सीजन में 70 हजार रुपए तक के पुतले जयपुर में बिके थे, हालांकि तब भी नवरात्र पर आई बारिश से कारीगरों को खासा नुकसान हुआ था।
रावण के पुतलों के विक्रेता जगदीश कुमार का कहना है कि इस बार कॉलोनियों में ही रावण दहन होगा, ऐसे में जो उम्मीद है वह सिर्फ बच्चों के उत्साह से ही है। मुनाफा इस बार कम रहेगा, क्योंकि निर्माण सामग्री इस बार अधिक महंगी है। ग्राहक कम होने से मोल-भाव भी ज्यादा हो रहा है।
इसके अलावा कोटा में भी 127 वां राष्ट्रीय दशहरा मेला निरस्त हो गया है। इसी तरह जोधपुर के रावण का चबूतरा मैदान पर अयोजित होने वाला रावण दहन का कार्यक्रम भी नहीं होगा।

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