September 28, 2021

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मास्टर भंवरलाल को बेटे ने दी मुखाग्नि, सुजानगढ़ में हुआ अंतिम संस्कार

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मास्टर भंवरलाल मेघवाल (फाइल फोटो)

एनसीआई@चूरू/सुजानगढ़
राजस्थान सरकार में केबिनेट मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल की पार्थिव देह मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गई। बेटे मनोज ने उन्हें मुखाग्नि दी। गृहनगर चूरू के सुजानगढ़ में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास पर रखा गया। जहां मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, रघु शर्मा व गोविंद सिंह डोटासरा सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने पहुंच उन्हें अंतिम नमन किया। इनके अलावा, विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, युनुस खान आदि भाजपा नेता भी मास्टर भंवरलाल को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
अंतिम यात्रा में उमड़े समर्थक
मास्टर भंवरलाल के निवास से श्मशान तक उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इसमें उनके हजारों समर्थक शामिल हुए। शहर की गली-चौराहों जहां से भी शव यात्रा निकली लोगों ने उस पर पुष्प वर्षा की। मंत्री के निधन पर सुजानगढ़ बंद रहा। प्रदेश में एक दिन का राजकीय अवकाश घोषित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि 72 साल के मेघवाल का सोमवार को गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था। 13 मई को हुए ब्रेन हेमरेज के बाद 15 मई को उन्हें वहां भर्ती कराया गया था। तभी से वे वहां पर वेंटिलेटर पर थे।
ऐसा रहा राजनीतिक सफर
मेघवाल राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज दलित नेताओं में शामिल थे। वे करीब 41 साल से राजनीति में सक्रिय थे। सुजानगढ़ विधानसभा सीट से निर्दलीय समेत कांग्रेस की टिकट पर वह 5 बार (1980, 90, 98, 2008 और 2018) विधायक चुने गए। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी है। एक अन्य पुत्री चूरू की पूर्व जिला प्रमुख बनारसी मेघवाल का 29 अक्टूबर को कोरोना से निधन हुआ था।
जीवन परिचय
सुजानगढ़ के शोभासर ग्राम पंचायत के गांव बाघसर पूर्वी में चुनाराम मेघवाल के यहां 2 जुलाई 1948 को मास्टर भंवरलाल मेघवाल का जन्म हुआ। वर्तमान में परिवार सुजानगढ़ उपखंड मुख्यालय के पीछे स्थित जयनिवास में रहता है। भंवरलाल मेघवाल की शादी 15 मई 1965 को केसर देवी से हुई। इनके एक बेटा व दो बेटी हैं। एक बेटी बनारसी देवी भी राजनीति में सक्रिय थीं। चूरू की जिला प्रमुख भी रही थीं। उनका 29 अक्टूबर को निधन हो गया था। जबकि भंवरलाल के इकलौते बेटे मनोज व्यवसाय करते हैं।
सरकारी स्कूल में पीटीआई थे, नौकरी छोड़ पहला चुनाव लड़ा
भंवरलाल मेघवाल ने सुजानगढ़ के राजकीय झंवर स्कूल में शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) नौकरी की शुरुआत की। कई सालों तक नौकरी में रहे। इसीलिए इनकी पहचान मास्टर भंवरलाल के नाम से रही। वर्ष 1977 में नौकरी से इस्तीफा देकर भंवरलाल मेघवाल ने उसी साल विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाया, मगर पहली बार वे हार गए। फिर 1980 के चुनाव में बतौर निर्दलीय जीत दर्ज की। उसके बाद से हर बार राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। गौरतलब है कि मास्टर भंवरलाल मेघवाल के साथ राजनीति में एक अजब संयोग जुड़ा हुआ था। वो यह है कि वे एक विधानसभा चुनाव हारते थे और इसके बाद अगला जीतते थे।
बयानों के कारण चर्चित रहे, शिक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा
भंवरलाल मेघवाल ने 10 बार चुनाव लड़ा। इनमें वे पांच चुनाव जीते और पांच बार हारे। पिछली बार अशोक गहलोत की सरकार में कर्मचारियों व तबादलों पर राजनीतिक बयानों की वजह से चर्चित रहे भंवरलाल मेघवाल शिक्षा मंत्री पद का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।

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