September 26, 2021

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भारत में सबको नहीं लगेगी कोरोना वायरस की वैक्सीन? जानें, सरकार ने क्या कहा

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भारत में सबको नहीं लगेगी कोरोना वायरस की वैक्सीन? जानें, सरकार ने क्या कहा


एनसीआई@नई दिल्ली
केन्द्र सरकार ने मंगलवार को कहा है कि यदि खतरे वाले लोगों को टीका लगाकर कोरोना वायरस का ट्रांसमिशन रोकने में सफलता मिली तो शायद देश की पूरी आबादी को वैक्सीन लगाने की जरूरत नहीं पड़े।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि वैक्सीन बनने में 8 से 10 साल लगते हैं। सबसे जल्दी बनने वाली वैक्सीन भी 4 साल में तैयार होती है, लेकिन कोरोना महामारी के असर को देखते हुए हम इसे कम समय में बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत भी उन देशों में शुमार है जो कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को बताया कि कोरोना महामारी के प्रभाव को देखते हुए हम 16 से 18 महीने के भीतर इस वैक्सीन को तैयार कर रहे हैं‌।
पूरे देश के टीकाकरण की बात सरकार ने कभी नहीं कही
वहीं, राजेश भूषण ने ये भी कहा कि पूरे देश के टीकाकरण की बात सरकार ने कभी नहीं कही। उन्होंने कहा कि साइंस से जुड़े विषयों पर जब हम चर्चा करते हैं तो बेहतर होता कि यदि हम तथ्यात्मक जानकारी हासिल करें और उसके बाद विश्लेषण करें।
इन राज्यों में बढ़ रहे कोरोना के मामले
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर कहा गया कि पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में एक बार फिर दोबारा कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क जरूर लगाएं, साथ ही दूरी का ख्याल रखें और बार-बार हाथ धोएं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि नवम्बर में कोविड -19 संक्रमण के बाद ठीक होने की संख्या औसत मामलों से अधिक थी। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा, औसतन 43,152 कोविड -19 मामले थे जो नवम्बर में हर दिन रिपोर्ट किए गए थे। इसकी तुलना में, हर रोज ठीक होने वालों की संख्या 47,159 थी। उन्होंने कहा कि भारत में अब तक 14 करोड़ से अधिक कोविड -19 टेस्ट किए गए हैं और राष्ट्रीय सकारात्मकता दर 6.69 फीसद है। राजेश भूषण ने कहा कि देश में 11 नवम्बर को पॉजिटिविटी रेट 7.15% था और 1 दिसम्बर को ये 6.69% हो गय है। उन्होंने कहा कि आज भी विश्व के बड़े देशों में भारत में प्रति दस लाख लोगों पर मामले सबसे कम हैं। अनेक ऐसे देश हैं जहां पर भारत से प्रति दस लाख लोगों पर आठ गुना तक ज्यादा मामले हैं। हमारी मृत्यु दर प्रति मिलियन दुनिया में सबसे कम है।

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