September 26, 2021

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कृषि कानून के खिलाफ राजस्थान सरकार के 3 विधेयकों को राज्यपाल ने रोका

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एनसीआई@जयपुर
राजस्थान में कांग्रेस ने तीनों केन्द्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। राज्य में भी पार्टी ने धरने प्रदर्शन किए थे। 2 नवम्बर को विधानसभा में केन्द्रीय कृषि कानूनों के प्रावधान बदलने के लिए तीन कृषि विधेयक पारित किए थे। एक महीने से इन विधेयकों में कोई प्रगति नहीं हुई है। इन विधयेकों के साथ पारित हुए महामारी विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इन तीन कृषि से जुड़े विधेयकों को राज्यपाल ने रोक लिया है।
पहला विधयेक कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) राजस्थान संशोधन विधेयक 2020 है। इसमें किसान के उत्पीड़न पर सात साल तक की सजा और 5 लाख जुर्माने का प्रावधान है। दूसरा विधेयक कृषक( सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार राजस्थान संशोधन विधेयक है। इस विधेयक में संविदा खेती को लेकर कड़े प्रावधान हैं। किसान से एमएसपी से कम पर संविदा खेती का करार मान्य नहीं होने और एमएसपी से कम पर करार करने को बाध्य करने पर 7 साल तक की सजा और 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया है। तीसरा विधेयक आवश्यक वस्तु (विशेष उपबन्ध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 है, जिसमें सरकार कृषि जिंसों पर स्टॉक लिमिट लगा सकेगी इसका प्रावधान है। केन्द्र ने यह प्रावधान हटा दिया था।
राज्य सरकार ने पारित कर दिए तीनों विधेयक
राज्य सरकार ने तीनों कृषि विधेयक पारित तो कर दिए, लेकिन अब ये तीनों विधेयक राज्यपाल के पास ही अटक गए हैं। केन्द्रीय कानूनों में संशोधन होने के कारण इन विधेयकों के प्रावधान तब तक कानून नहीं बन सकते जब तक राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल जाती। मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इन तीनों विधयेकों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना लगभग नामुमकिन है , इन विधेयकों का इसलिए अटकना तय है।
अब आगे क्या?
पहली संभावना तो यह है कि ये ​तीनों विधेयक राज्यपाल के पास ही अटककर रह जाएं।राज्यपाल इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजे ही नहीं। राज्यपाल विधेयक को केन्द्र या राष्ट्रपति के पास भेजे ही इसकी कोई समय सीमा या बाध्यता नहीं है। दूसरी सम्भावना यह है कि अगर राज्यपाल ने इन विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी के लिए केन्द्र के पास भेजा भी जाता है तो राष्ट्रपति की मंजूरी नामुककिन है। राष्ट्रपति के पास अनंत समय तक इन्हें रोकने का अधिकार है। जानकारों के मुताबिक, तीनों विधेयकों का हश्र धर्म स्वातंत्रय विधेयक जैसा होने के आसार बनते दिख रहे हैं।

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