आईसीयू के एसी 15 दिन तक बंद रहे, मीडिया को भी 16 वें दिन पता चला…. नहीं चलता तो ?
कोटा सम्भाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमबीएस के मेडिसिन आईसीयू में 2 अगस्त को हुए शाॅर्ट सर्किट से वहां के सभी 14 एसी बंद हो गए। निश्चित रूप से यह बात अस्पताल प्रशासन की जानकारी में आ गई, मगर उसने फाॅल्ट लाइन को दुरुस्त करवाने की जहमत नहीं उठाई। 15 दिन निकल गए। इस तेज उमस भरी गर्मी में 15 दिन तक अंदर वार्ड में भर्ती मरीज किस कदर बेहाल रहे, बेचैन रहे इसे कोई भी सामान्य व्यक्ति समझ सकता है। यहां तक कि घबराहट के कारण ऑक्सीजन की नलियां तक निकाल कर फेंक दीं। दिल के रोगियों की और भी बुरी हालत हो गई। बस, गनीमत यह रही कि अधिक बड़ा हादसा नहीं हुआ।
सुकून के लिए मरीजों का बाहर गैलरी में आना भी बेकार साबित हो रहा था, क्योंकि यहां पहले से ही उनके परिजन वहां लगे पंखों के बंद पड़े होने से बीजणियां झल रहे थे, तो मरीजों को भी इनसे ही तसल्ली करनी पड़ी। अंदर वार्ड में भी गर्मी से क्षणिक निजात पाने के लिए कुछ ऐसी ही मशक्कत जारी रही। राउंड के समय डाॅक्टर व ड्यूटी स्टाफ भी गर्मी से खासे परेशान होते। डाॅक्टरों ने दो बार अस्पताल प्रशासन को अवगत भी कराया, मगर उसने इस पर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि उसे गर्मी महसूस नहीं हुई।
बिन नागा रोज अस्पताल का दौरा करने वाले हम खबरनवीसों को भी इस बात की खबर 16 वें दिन 18 अगस्त को हुई। इस प्रकार…… सबसे तेज बढ़ते…..सबसे बड़े…. पल-पल की खबर रखने का दम भरने वाले…. कुल मिलाकर हम सभी फेल रहे। फिर भी चलिए 16 वें दिन ही सही खबर पाकर खबरनवीस मौके पर पहुंचे तो अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया। नई लाइन डलवा सभी एसी चालू करवा दिए गए।
इस पर अस्पताल अधीक्षक डाॅ. नवीन सक्सेना ने केवल यह नई जानकारी दी कि आईसीयू में फाॅल सिलिंग व वाटर प्रूफिंग के लिए 1 लाख 75 हजार रुपए जारी कर दिए गए हैं।
मगर हर किसी के मन में जो अहम सवाल हैं, उनके जवाब नहीं मिले, वे ये कि- शाॅर्ट सर्किट से डेमेज हुई लाइन 15 दिन तक क्यों सही नहीं हुई और मीडिया नहीं पहुंचता तो आगे और कितने दिन तक ऐसा ही रहना था।
यह हालात बताए थे मरीजों के परिजनों ने
आईसीयू के अंदर एसी तो बाहर पंखे बंद पड़े हुए हैं। कमरे के प्लास्टर के अलावा फाॅल सिलिंग भी टूटकर गिर रही है। लाइटों के बोर्ड भी उखड़े पड़े हैं। हालात यह है कि गर्मी के कारण मरीज बुरी तरह बेहाल हैं। यहां तक कि घबराहट के कारण ऑक्सीजन की नलियां तक निकाल कर फेंक रहे हैं। दिल के रोगियों की तो और भी बुरी हालत है।
