पूरा उत्तर भारत भूकम्प के झटकों से कांपा, नेपाल में 6.3 तीव्रता से डोली धरती, कम से कम 6 की मौत, कई घायल
एनसीआई@नई दिल्ली
देर रात आए भूकम्प के झटकों से दिल्ली-एनसीआर में दहशत फैल गई। 9 नवम्बर की रात करीब 1.57 बजे यह झटके लगे। राजधानी से लेकर नोएडा, गुड़गांव, गाजियाबाद और अन्य इलाकों में भी झटके महसूस किए गए। रात को सर्द मौसम की वजह से बंद पंखे अचानक हिलने लगे। खिड़कियां कड़कड़ाने लगीं। फर्निचर इधर-उधर होने लगा। सोशल मीडिया पर लोग झटकों के अनुभव बता रहे हैं।
नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकम्प का केन्द्र नेपाल में था। अपने ट्वीट में NCS ने कहा कि भूकम्प की गहराई जमीन से 10 किलोमीटर नीचे थी। भूकम्प के झटके उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों में भी महसूस हुए। नेपाल में 8 नवम्बर को 9.41 बजे और 8.52 पर भी भूकम्प आया था। हालांकि उनकी तीव्रता 5 से कम थी।
Earthquake of Magnitude:4.5, Occurred on 08-11-2022, 04:37:27 IST, Lat: 28.57 & Long: 86.58, Depth: 100 Km ,Location: 155km NE of Kathmandu, Nepal for more information download the BhooKamp App https://t.co/wkGXQTF1pO@Indiametdept @ndmaindia @moesgoi @Dr_Mishra1966 @PMOIndia pic.twitter.com/U5XJgy1eLW
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) November 7, 2022
1 नवंबर को एमपी में लगे थे झटके
मध्यप्रदेश के जबलपुर और आसपास के जिलों में 1 नवम्बर की सुबह 8.43 बजे 4.3 तीव्रता का भूकम्प आया था। यह अलग बात है कि इससे जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ था। आईएमडी के वैज्ञानिक वेद प्रकाश ने बताया कि इसका केन्द्र डिंडोरी के पास 10 किमी की गहराई में था।
आधी दुनिया कुदरती खतरों से निपटने को तैयार नहीं
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आधी दुनिया अभी तैयार नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में इस बारे में चिंता जाहिर की गई थी। इसके मुताबिक, दुनिया के आधे देशों में मल्टी हेजर्ड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम नहीं लगे हैं। ये सिस्टम कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं की पहले ही जानकारी देने में सक्षम होते हैं।
Earthquake of Magnitude:6.3, Occurred on 09-11-2022, 01:57:24 IST, Lat: 29.24 & Long: 81.06, Depth: 10 Km ,Location: Nepal, for more information download the BhooKamp App https://t.co/Fu4UaD2vIS @Indiametdept @ndmaindia @Dr_Mishra1966 @moesgoi @OfficeOfDrJS @PMOIndia @DDNational pic.twitter.com/n2ORPZEzbP
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) November 8, 2022
भारत में ऐसा है सिस्टम
भारत सरकार दावा करती है कि देश में अत्याधुनिक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम काम कर रहे हैं। यह सिस्टम बाढ़ और साइक्लोन के बारे में सही आकलन कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग को अमेरिकी मदद से बाढ़ की 6 से 24 घंटे पहले ही जानकारी मिल जाती है।
अर्ली वॉर्निंग सिस्टम आपदाओं के बाद होने वाले खतरों की चेतावनी भी जारी करता है। मसलन भूकम्प के बाद आने वाली सूनामी या फिर लेंड स्लाइड। कुछ सिस्टम एक आपदा के लिए काम करते हैं जैसे बाढ़ या चक्रवात। जिस तेजी से तीव्र मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में मल्टी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम में निवेश की जरूरत है, जिससे एक ही सिस्टम से ज्यादा से ज्यादा आपदाओं की जानकारी मिल सके।
