राजस्थान के एक मेडिकल कॉलेज में हुआ मुम्बई के बच्चे का बेहद जटिल ऑपरेशन, मिली नई ज़िंदगी
एनसीआई@डूंगरपुर
डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम ने एक ढाई वर्षीय बच्चे की किडनी के केंसर का सफल ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. महेश पुकार ने यह जानकारी दी।

डॉ. महेश पुकार ने बताया कि मुम्बई के अशोक नगर निवासी लहू म्हात्रे के ढाई वर्षीय पुत्र रियांश की किडनी में केंसर की गांठ हो गई थी। इससे वह 20 दिन से ठीक से खा पी तक नहीं पा रहा था। रियांश को पेशाब आना भी बंद हो गया था। इससे वह इतना कमजोर हो गया था कि खड़ा तक नहीं रह पा रहा था। इस पर रियांश के परिजन उसे एमजीएम अस्पताल ले गए। वहां सीटी स्केन करने पर रियांश की किडनी में केंसर की गांठ होने की जानकारी मिली। इस पर एमजीएम के डॉक्टारों ने रियांश के परिजनों को मुम्बई के ही टाटा अस्पताल में इलाज करवाने को कहा। वहां ऑपरेश और कीमोथेरपी सहित करीब 7 लाख रुपए खर्च बताया गया।

ऐसे पता चला डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज का
रियांश के परिजनों ने डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. महेश पुकार की काबिलियत के बारे में अखबारों में पढ़ रखा था। इस पर उन्होंने डॉ. महेश पुकार से सम्पर्क किया। उनकी सलाह पर परिजन शनिवार,11 मार्च की रात रियांश को डूंगरपुर ले आए। यहां मेडिकल कॉलेज के हरिदेव जोशी हॉस्पिटल में उसकी सभी जांचों के बाद मंगलवार, 14 मार्च को 8 डॉक्टरों की एक टीम ने 45 मिनट चले ऑपरेशन में रियांश की किडनी से केंसर की करीब 500 ग्राम वजनी गांठ को अलग कर दिया।
यह था बड़ा खतरा
प्रिंसिपल डॉ. महेश पुकार ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान किडनी की वेन टूट जाने का खतरा बना हुआ था। इससे बच्चे की जान जा सकती थी। लेकिन डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को करने में सफलता हासिल की। इससे बालक को नई जिंदगी मिल गई है। डॉ. पुकार ने बताया कि बच्चे को कीमोथेरेपी भी यहीं पर दी जाएगी। अन्य जगह बच्चे के इलाज पर जो 5 से 7 लाख रुपए खर्च होता, सरकारी योजना के कारण वह बच गया है।
