नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवाओं का उग्र प्रदर्शन, सेना की गोलीबारी में 18 की मौत, ढाई सौ से अधिक घायल, गृहमंत्री का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने का आदेश
काठमांडू/नई दिल्ली
नेपाल में 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन के खिलाफ सोमवार सुबह से ही युवाओं का उग्र प्रदर्शन शुरू हो गया। इस दौरान सेना की फायरिंग में देर शाम तक 20 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 250 से ज्यादा घायल हैं। इससे बढ़े विरोध और दबाव के बीच नेपाल के गृहमंत्री रमेश लेखक को इस्तीफा देना पड़ा। इधर, यह आंदोलन राजधानी काठमांडू के अलावा अन्य शहरों तक भी फैल गया। काठमांडू सहित 7 जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया। इधर, इस घटनाक्रम पर भारत सरकार की भी नजर है। नेपाल से सटे बिहार के जिलों में अलर्ट जारी करने साथ बॉर्डर को सील कर दिया है। दूसरी ओर प्रदर्शकारियों ने कल यानी मंगलवार को भी अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन के साथ सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सुबह 12 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी राजधानी काठमांडू में संसद भवन परिसर में घुस गए। इन्हें रोकने के लिए सेना ने कई राउंड फायरिंग की। इस विरोध की अगुआई Gen- Z यानी 18 से 28 साल के युवा कर रहे हैं। बुरी तरह बिगड़े हालात को देखते हुए संसद भवन, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, पीएम आवास के पास के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। काठमांडू प्रशासन ने तोड़फोड़ करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने संसद के गेट नम्बर 1 और 2 पर कब्जा कर लिया था। नेपाल के इतिहास में संसद में घुसपैठ का यह पहला मामला है। बढ़ते दबाव के बीच सरकार के द्वारा बैन किए गए सोशल मीडिया एप से बैन हटा लेने की अपुष्ट खबरें आईं, मगर बाद में ये गलत साबित हुईं।

यह है मामला
उल्लेखनीय है कि सरकार की शर्तों का पालन नहीं करने पर नेपाल सरकार ने 3 सितम्बर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन कर दिया था। इनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म ने नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। इसके लिए मंत्रालय ने 28 अगस्त को आदेश जारी कर 7 दिन का समय दिया था, यह समय सीमा 2 सितम्बर को खत्म हो गई थी। हालांकि इस बैन से चाइनीज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक अछूता रहा। बताया जा रहा है कि इसने सरकार की तीन शर्तों में से एक शर्त का पालन कर लिया है, बाकी पर भी उसका एक्शन जारी है। वॉट्सएप भी नेपाल में चालू बताया गया है।

केबिनेट ने स्वीकार किया गृहमंत्री का इस्तीफा
नेपाल के गृहमंत्री रमेश लेखक ने देश में जारी हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दे दिया। नेपाल की केबिनेट ने लेखक का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
इससे पहले नेपाली संसद की सेन्ट्रल वर्किंग कमेटी के मेम्बर प्रोफेसर गोविंदा राज पोखरेल ने लेखक के तत्काल इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि गृह मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो पार्टी को बिना देर किए उन्हें पद से हटा देना चाहिए।

नेपाल सरकार ने सभी परीक्षाएं स्थगित कीं
नेपाल सरकार ने बढ़ते हंगामे को देखते हुए देशभर के परीक्षा केन्द्रों पर 9, 10 और 11 सितम्बर को होने वाली निर्धारित परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। कई शहरों में अगले दो दिनों के लिए स्कूल और कॉलेज बंद करने का ऐलान किया गया है। प्रमुख राजनीतिक दलों के दफ्तरों और बड़े नेताओं के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सत्ताधारी यूएमएल और नेपाली कांग्रेस के मुख्यालयों के इर्द-गिर्द भी कर्फ्यू लगा दिया गया। यह कदम बढ़ती अशांति को रोकने के लिए उठाया गया।
प्रदर्शनकारी बोला-पुलिस घुटनों के ऊपर गोली मार रही
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पुलिस ने गोलियां चलाईं। मुझे नहीं लगी, लेकिन पीछे खड़े दोस्त को हाथ में लग गई। अभी भी गोलीबारी चल रही है। संसद के अंदर से भी आवाज आ रही है। सड़क पर खड़े दोस्त को सिर में गोली लगी। पुलिस घुटनों के ऊपर निशाना लगाकर अंधाधुंध गोली चला रही है। क्या उन्हें यह करने का हक है?

वहीं, नेपाल पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने संसद के गेट को तोड़ा दिया। हिमालयन टाइम्स ने बताया कि माहौल बहुत तनावपूर्ण है। सुरक्षा बल व्यवस्था बहाल करने की कोशिश जारी है। काठमांडू और झापा के अलावा पोखरा, बुटवल, चितवन, नेपालगंज और बीरतनगर में भी प्रदर्शन जारी है।
नेपाल में सोशल मीडिया इसलिए बंद हुआ था
नेपाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 7 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराने का आदेश दिया था। सरकार का तर्क था कि रजिस्ट्रेशन के बिना ये प्लेटफॉर्म्स देश में फेक ID, हेट स्पीच, साइबर क्राइम और गलत सूचनाएं फैलाने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।

तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर सरकार ने 4 सितम्बर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिया था। इसमें वॉट्सएप, फेसबुक, यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म शामिल थे। टिकटॉक, वाइबर जैसे प्लेटफॉर्म पर बैन नहीं लगा, क्योंकि उन्होंने समय पर रजिस्ट्रेशन करा लिया था।
यूट्यूब जैसी 26 कम्पनियों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया
नियमों के मुताबिक हर कम्पनी को नेपाल में लोकल ऑफिस रखना, गलत कंटेंट हटाने के लिए लोकल अधिकारी नियुक्त करना और कानूनी नोटिसों का जवाब देना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार के साथ यूजर डेटा शेयर करने के नियम भी मानना जरूरी कर दिया गया। कम्पनियों को डेटा-प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी के मामले में ये शर्तें बहुत सख्त लग रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत या यूरोप जैसे बड़े देशों में कम्पनियां लोकल प्रतिनिधि रख लेती हैं, क्योंकि वहां यूजर बहुत ज्यादा हैं। लेकिन नेपाल का यूजर बेस छोटा है, इसलिए कम्पनियों को यह बेहद खर्चीला लगा।

अगर कम्पनियां नेपाली सरकार की यह शर्त मान लेती हैं तो उन पर अन्य छोटे देशों में भी इन नियमों को पालन करने का दबाव पड़ता, जो काफी खर्चीला है। यही वजह रही कि पश्चिमी कम्पनियों ने नेपाल सरकार की शर्त नहीं मानी और तय समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया।

