एकल पट्टा प्रकरण: यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और पूर्व उप सचिव मीणा के पक्ष में पेश राज्य सरकार की क्लोजर रिपोर्ट खारिज
एनसीआई@जयपुर
एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-4 ने सोमवार को गणपति कंस्ट्रक्शन कम्पनी को वर्ष 2011 में एकल पट्टा जारी करने से जुड़े मामले में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल और पूर्व उप सचिव एनएल मीणा के पक्ष में 12 जून 2019 को पेश क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। यह राज्य सरकार को बड़ा झटका है तो गहलोत मंत्रिमंडल के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक धारीवाल की परेशानी बढ़ाने वाला फैसला भी है। इसमें एक ओर बड़ी बात है कि अदालत ने जांच में शामिल अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश भी दिए हैं।
अदालत ने एसीबी के डीजी को कहा है कि वह मामले में कोर्ट की ओर से सुझाए बिन्दुओं पर एसपी से उच्च स्तर के अधिकारी से तीन माह में जांच पूरी कराए। वहीं, अदालत ने मामले की जांच में शामिल अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी कहा है। अदालत ने यह आदेश परिवादी रामशरण सिंह की प्रोटेस्ट पिटीशन पर दिए। अदालत ने मामले में धारीवाल सहित अन्य के खिलाफ प्रसंज्ञान लेने के बिन्दु पर फैसला सुरक्षित भी रखा है।
दरअसल, पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने परिवादी की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए एसीबी कोर्ट को कहा था कि वह परिवादी की प्रोटेस्ट पिटीशन पर जल्द से जल्द दस दिन में फैसला करे। प्रोटेस्ट पिटीशन में अधिवक्ता संदेश खंडेलवाल ने बताया कि पूरा मामला तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के निर्देशन में हुआ था। मामले में धारीवाल और यूडीएच के तत्कालीन उप सचिव एनएल मीणा सहित ललित के पंवार और वीएम कपूर भी आरोपी हैं। इन्होंने अपने उच्च पदों का दुरुपयोग कर अपने पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट पेश करवाई। पुलिस की रिपोर्ट कोर्ट मानने के लिए बाध्य नहीं है, ऐसे में क्लोजर रिपोर्ट रद्द कर चारों के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया जाए।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में यूडीएच के तत्कालीन सचिव जीएस संधू, उपायुक्त ओंकारमल सैनी, निष्काम दिवाकर सहित अन्य को आरोपी बनाया गया था। एसीबी ने पहले संधू, ओंकारमल और निष्काम दिवाकर के खिलाफ लम्बित मुकदमे को वापस लेने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ तीनों अधिकारियों और राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका हाईकोर्ट में लम्बित चल रही है।
