दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी आतिशी: केजरीवाल ने विधायक दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव रखा, ऐलान थोड़ी देर में
एनसीआई@नई दिल्ली
केजरीवाल सरकार में शिक्षा मंत्री एवं कालका जी से विधायक आतिशी मार्लेना दिल्ली की नई मुख्यमंत्री होंगी। अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव रखा। आतिशी के नाम का ऐलान थोड़ी देर में किया जाएगा।
शाम साढ़े चार बजे केजरीवाल उपराज्यपाल (LG) विनय सक्सेना को इस्तीफा सौंपेंगे। इसी हफ्ते नए सीएम और केबिनेट का शपथ ग्रहण भी होगा। 26 और 27 सितम्बर को 2 दिन का विधानसभा सत्र बुलाया गया है।
13 सितम्बर को शराब नीति केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद केजरीवाल ने 15 सितम्बर को मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि, ‘अब जनता तय करे कि मैं ईमानदार हूं या बेईमान। जनता ने दाग धोया और विधानसभा चुनाव जीता तो फिर से कुर्सी पर बैठूंगा।’
आतिशी को मुख्यमंत्री चुनने के कारण
1. केजरीवाल और सिसोदिया के जेल में रहते हुए पार्टी का मजबूती से स्टेंड रखा। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने के लिए केजरीवाल ने आतिशी के नाम की सिफारिश की थी।
2. वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों के लिए आप का घोषणा पत्र तैयार करने वाली समिति की प्रमुख सदस्य थीं। इसके बाद से ही वह पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाती रही हैं।
पार्टी का चेहरा बदल सकते हैं, चरित्र नहीं
आम आदमी पार्टी के विधायक दल की बैठक में अरविंद केजरीवाल की जगह आतिशी के नाम पर नए मुख्यमंत्री के रूप में मोहर लगने पर दिल्ली के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा- आप के नेता पार्टी का कायाकल्प करने की कोशिश कर रहे हैं। वे भूल जाते हैं कि वे पार्टी का चेहरा बदल सकते हैं, लेकिन चरित्र नहीं। वे अपने चरित्र पर लगे भ्रष्टाचार के काले दागों को नहीं धो सकते। दिल्ली की जनता के लिए चुनाव में एकमात्र मुद्दा अरविंद केजरीवाल का भ्रष्टाचार होगा।
हम में से कोई कुर्सी पर बैठेगा
इससे पहले आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठता है, क्योंकि जनादेश अरविंद केजरीवाल का है। जनता ने अरविंद केजरीवाल को चुना है। जब तक जनता उन्हें दोबारा नहीं चुनेगी, तब तक वे सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। चुनाव होने तक हममें से कोई एक उस कुर्सी पर बैठेगा।
केजरीवाल को इसलिए देना पड़ रहा इस्तीफा
• मुख्यमंत्री तो हैं, लेकिन पावर नहीं
दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल 177 दिन बाद जमानत पर जेल से बाहर आए। सुप्रीम कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वे सीएम ऑफिस नहीं जाएंगे और न ही किसी फाइल पर साइन करेंगे। यानी जेल से बाहर आने और मुख्यमंत्री रहते हुए भी उनके पास कोई पावर नहीं रही।
• सिर्फ 5 महीने का बचा है कार्यकाल
दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल फरवरी 2025 में खत्म हो रहा है। यानी सरकार के पास चुनाव में सिर्फ 5 महीने ही बचे हैं। इस दौरान सरकारें लोक-लुभावन चुनावी फैसले लेती हैं। केजरीवाल कोर्ट की शर्तों में बंधे हैं। जेल से छूटने के बाद केजरीवाल के साथ सहानुभूति है। दो-तीन महीने पहले दिल्ली में चुनाव की मांग कर केजरीवाल इसे भुनाना चाहेंगे।
• ईमानदार नेता की छवि को मजबूत करेंगे
दिल्ली शराब नीति केस में नाम आने और गिरफ्तारी के बाद से ही भाजपा के नेता अरविंद केजरीवाल से मुख्यमंत्री पद छोड़ने की मांग कर रहे थे। इस्तीफा देने के बाद वे भाजपा नेताओं को सीधे कह सकेंगे कि सिर्फ आरोप रहते उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। अब उनकी ईमानदारी का फैसला जनता करेगी।
21 मार्च 2024 को शराब नीति केस में ED ने दो घंटे की पूछताछ के बाद केजरीवाल को उनके घर से गिरफ्तार किया था। 177 दिन बाद सुप्रीम काेर्ट ने 13 सितम्बर 2024 को उन्हें जमानत दी थी।
केजरीवाल इस्तीफे के बाद क्या करेंगे?
केजरीवाल मुख्यमंत्री पद से भले हट जाएं, लेकिन वे आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक बने रहेंगे। इस्तीफे के बाद उनका पूरा फोकस हरियाणा विधानसभा चुनाव पर होगा। वे पार्टी प्रत्याशियों के लिए फुल टाइम प्रचार कर पाएंगे। कांग्रेस से गठबंधन नहीं होने के बाद आम आदमी पार्टी सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। केजरीवाल खुद हरियाणा के सिरसा जिले के सिवानी गांव के रहने वाले हैं। इसके बाद वे झारखंड और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर फोकस करेंगे। झारखंड में आप झामुमो के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है।
