पुलिस कस्टडी में युवक की हालत बिगड़ी, 3 दिन से बेहोश, डॉक्टर ने बताया-सीने पर चोट और दिमागी बुखार
एनसीआई@उदयपुर
पुलिस कस्टडी में लिए गए 19 वर्षीय युवक की हालत गम्भीर है। लूट की साजिश रचने के आरोप में हिरासत में लिए गए इस युवक को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, इसके सीने पर गम्भीर चोट है। तीन दिन से इसे होश नहीं आया है।
इस युवक की मां उदयपुर रोडवेज में कर्मचारी हैं। उन्होंने पुलिस पर अपने इकलौते बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट का आरोप लगाया है। खेरवाड़ा थानाधिकारी दलपत सिंह राठौड़ का कहना है कि युवक की तबीयत गिरफ्तारी के डर से बिगड़ी है।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए उदयपुर एसपी को जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गम्भीर उल्लंघन माना है। पुलिस हिरासत में मारपीट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए आयोग ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
बिना सूचना थाने ले गई पुलिस
खेरवाड़ा टोल प्लाजा के आगे बंजारिया गांव निवासी लीलादेवी ने बताया कि उनके बेटे अभिषेक मीणा को पुलिस 17 अप्रेल को बिना सूचना के थाने ले गई। उसी रात पुलिस उसे खेरवाड़ा के निजी अस्पताल ले गई, जहां से डॉक्टरों की सलाह पर उदयपुर एमबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
इकलौते बेटे को क्यों मारा
रोते हुए मां लीलादेवी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके इकलौते बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट की है। बेटे के शरीर पर जगह-जगह चोटों के निशान हैं और गले में सूजन है। बेटे ने किसी की जान थोड़े ही ली है जो उसकी यह हालत कर दी। 2008 में पति की मौत के बाद से वह अकेले बेटे को पाल रही हैं।
बिना मास्क MICU में तैनात हैं कॉन्स्टेबल
लीलादेवी ने बताया- अभिषेक को MICU में भर्ती किया गया है, जहां 24 घंटे दो पुलिस कॉन्स्टेबल निगरानी कर रहे हैं। MICU में मास्क अनिवार्य होने के बावजूद दोनों कॉन्स्टेबल बिना मास्क के मरीज के बिल्कुल सामने बैठे हैं, जिससे संक्रमण का खतरा है। वहीं, पुलिस मारपीट के आरोपों से इनकार कर रही है।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, एसपी को दिए जांच के निर्देश
राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कस्टडी में युवक की हालत बिगड़ने के मामले को प्राथमिक तौर पर मानव अधिकारों का गम्भीर उल्लंघन माना है। आयोग सदस्य जस्टिस रामचंद्र सिंह झाला ने बुधवार को उदयपुर एसपी योगेश गोयल को आदेश जारी कर कहा कि मानवाधिकार
आयोग के बाध्यकारी आदेश के 28 साल बाद भी पुलिस अभिरक्षा में प्रताड़ना और मारपीट की घटनाएं आ रही हैं, जो सभ्य समाज में बेहद कष्टप्रद हैं।
जस्टिस झाला ने कहा- उच्चाधिकारियों की लापरवाही के कारण ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने एसपी को मामले को गंभीरता से लेते हुए खेरवाड़ा डिप्टी के अलावा जिले के अन्य डिप्टी स्तर के अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं और जांच रिपोर्ट मांगी है।
