रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ बनाया गया है। वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व प्रमुख और ऑपरेशन सिंदूर के हीरो जितेंद्र मिश्र मंदिर के प्रशासनिक-वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान से कमान संभाली थी। सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल मिला था। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी हैं।
एनसीआई@नई दिल्ली
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र बन गए हैं। वे राम मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी प्रबंधन की अर्थात सभी जिम्मेदारियां संभालेंगे। यह फैसला चढ़ावे की चोरी के विवाद के बाद ट्रस्ट को पेशेवर और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ट्रस्ट को सीईओ पद के लिए 5 हजार 500 से अधिक आवेदन मिले थे। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने जांच के बाद तीन नामों का पैनल सौंपा था। इनमें से मिश्र का चयन हुआ है।
सीईओ मिश्रा ट्रस्ट के सचिव के निर्देश पर मंदिर की तमाम गतिविधियों और व्यवस्था का संचालन करेंगे। दरअसल, राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आने के बाद से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे। भक्तों की आस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। इसके बाद ट्रस्ट ने सीओ की नियुक्ति का निर्णय लिया। करीब दो महीने चली प्रक्रिया के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खूब चर्चा में रहे थे। वे भारतीय वायुसेना के वेस्टर्न कमांड के चीफ के पद पर कार्यरत थे। इस पद से वे 30 अप्रेल 2026 को रिटायर हुए थे।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा वर्ष 1986 में भारतीय वायु सेना में कमीशन हुए थे। एयर फोर्स में वे फाइटर पायलट और टेस्ट पायलट रहे। उन्हें 3000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने 38 साल से अधिक समय तक सैन्य सेवा की। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी पुणे के पूर्व छात्र हैं। 30 अप्रेल 2026 को रिटायर हुए एयर मार्शल को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वे अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल भी हासिल चुके हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में संभाली कमान
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान आसमान में कमान संभाली थी। पुलवामा में निर्दोष भारतीयों पर आतंकी हमले के बाद बड़ा एक्शन हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ मिला। यह एक खास तरह का सम्मान है जो युद्ध का संचालन करने के लिए दिया जाता है। यह संघर्ष के दौरान बेहतरीन सेवा के लिए देश का सबसे बड़ा सम्मान है। इसका मानक इतना ऊंचा है कि 46 सालों में यह केवल दस बार ही दिया गया है।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया जिले के भोपथपुरा के रहने वाले हैं। यह स्थान अयोध्या से सड़क मार्ग से केवल 3 घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता लेक्चरर थे।
इन तीन नामों में नहीं था नाम
बड़ी बात यह है कि अयोध्या राम मंदिर के प्रथम सीईओ के लिए पहले जिन तीन नामों राजेश पांडे (रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी), योगेश्वर राम मिश्रा (रिटायर्ड आईएएस अधिकारी) व परेश सक्सेना (रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी) की चर्चा थी, इनमें जितेंद्र मिश्रा का नाम कहीं नहीं था।
